फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुनवाई 5 अप्रैल को: सरकारी अफसरों के घर बाउंसर भेजने पर सुप्रीम कोर्ट हैरान, सुजान सिंह पार्क के फ्लैटों के मामले में केंद्र ने मांगी मदद

Fri, 25 Mar 2022 10:23 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र का तर्क है कि अनुदान अधिनियम की धारा-3 के प्रावधान से स्पष्ट है कि ‘अनुदान’ के रूप में किसी व्यक्ति के पक्ष में किसी भी सरकारी संपत्ति को किसी अन्य कानून के प्रावधानों के दायरे से बाहर रखा जाएगा। कोई भी कानून, जो सरकारी अनुदान की धारणाओं के विपरीत है, किसी विशिष्ट व्यक्ति के पक्ष में दी गई सरकारी संपत्ति पर लागू नहीं होगा।
विज्ञापन
1 of 3
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नई दिल्ली के खान मार्केट में सुजान सिंह पार्क के फ्लैटों से सरकारी अधिकारियों को बेदखल करने के लिए बाउंसर भेजे जा रहे हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस एनवी रमण से इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की।

चीफ जस्टिस ने हैरानी जताते हुए कहा, ‘वे सरकारी अधिकारियों के खिलाफ बाउंसर कैसे भेज सकते हैं?’ मेहता ने जवाब में कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’ इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि मामला 5 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के जनवरी-2020 के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।

हाईकोर्ट ने अतिरिक्त किराया नियंत्रण न्यायाधिकरण के फैसले की पुष्टि की थी। इसमें केंद्र को प्रतिवादी, शोभा सिंह एंड संस को बकाया किराए के भुगतान का निर्देश दिया गया था। विचाराधीन संपत्ति पर आवासीय फ्लैट हैं, जिन्हें सरकार को 1944 में रियायती दर से किराए पर दिया गया था। सरकार ने 1989 तक किराए का भुगतान किया, लेकिन उसके बाद प्रतिवादी शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कई अनियमितताओं के कारण मुकदमेबाजी शुरू हो गई।

केंद्र का तर्क है कि अनुदान अधिनियम की धारा-3 के प्रावधान से स्पष्ट है कि ‘अनुदान’ के रूप में किसी व्यक्ति के पक्ष में किसी भी सरकारी संपत्ति को किसी अन्य कानून के प्रावधानों के दायरे से बाहर रखा जाएगा। कोई भी कानून, जो सरकारी अनुदान की धारणाओं के विपरीत है, किसी विशिष्ट व्यक्ति के पक्ष में दी गई सरकारी संपत्ति पर लागू नहीं होगा।

किराया नियंत्रक और हाईकोर्ट का फैसला केंद्र सरकार के खिलाफ
प्रतिवादी ने 1998 में अतिरिक्त किराया नियंत्रण न्यायाधिकरण के समक्ष बेदखली याचिका दायर की। यहां से प्रतिवादी के पक्ष में फैसला आया। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इस फैसले की पुष्टि की। लिहाजा केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

केंद्र का तर्क, दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम में कवर नहीं होती संपत्ति
सरकार ने कहा कि अतिरिक्त किराया नियंत्रण न्यायाधिकरण ने एक सितंबर, 2007 के अपने आदेश में यह गलती से माना कि विवादित संपत्ति दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम (डीआरसीए) के प्रावधानों के तहत कवर की गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने 8 जनवरी, 2020 को अपने आदेश में उसके निष्कर्ष की पुष्टि की थी।
विज्ञापन

2 of 3
यूनिटेक - फोटो : social media
दादी के अंतिम संस्कार में जा सकेगी संजय चंद्रा की पत्नी
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति को अपनी दादी के अंतिम संस्कार में जाने की इजाजत दे दी है। धन शोधन मामले में तिहाड़ जेल में बंद प्रीति 26 मार्च या 5 अप्रैल को पांच घंटे के लिए जेल से बाहर जाकर दादी के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकेगी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह अनुमति देने से पहले प्रीति से अपने डोमिनिकन रिपब्लिक और अन्य पासपोर्ट जमा कराने के लिए कहा। इस अवधि में न तो वह दिल्ली से बाहर जाएगी और न ही सेलफोन का इस्तेमाल करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
ईसाई मिशनरियों पर निगरानी के लिए बोर्ड की मांग वाली याचिका खारिज 
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने देश में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए बोर्ड की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने याचिकाकर्ता हिंदू धर्म परिषद को इस तरह की याचिका दाखिल करने पर जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की मांग की। 

याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के पिछले साल 31 मार्च को आए आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने भी इस तरह की मांग को खारिज कर दिया था। याचिका में कहा गया था कि देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता तो मजबूती देने के लिए ईसाई मिशनरियों की आय और गतिविधियों पर निगरानी रखनी जरूरी है। राज्य व केंद्र सरकार इसके लिए बोर्ड गठित करें। 

याचिका के मुताबिक ईसाई धार्मिक संपत्तियों की कमाई पर निगरानी नहीं होने के कारण सैकड़ों नए अल्पसंख्यक ट्रस्ट एनजीओ के रूप में खुल गए हैं। इन एनजीओ को विदेश से बड़ी मात्रा में आर्थिक मदद मिली रही है। जिसका इस्तेमाल गैर सामाजिक गतिविधियों और मासूम लोगों को दंगों के लिए भड़काने में होता है। जिससे देश की एकता और संप्रभुता में शांति बाधित होती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें