सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का फैैसला
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अहम फैसला : कस्टम अफसरों को पुलिस अधिकारियों का दर्जा नहीं
- पीठ ने अहम फैसले में कहा, सीमा शुल्क अफसरों को पुलिस अधिकारियों का दर्जा प्राप्त नहीं है और इसलिए वे असीमित पुलिसिंग शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकते।
- पीठ ने कहा कि अपराध होने पर बलपूर्वक कार्रवाई करने से पहले, उसके कारणों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाना चाहिए।
- पीठ ने माना कि जीएसटी अधिनियम के तहत वसूली के लिए धमकी व बल प्रयोग चिंता की बात है। इस तरह का चलन अस्वीकार्य है।
सरकार का तर्क खारिज, कहा-गिरफ्तारी के अधिकार का उपयोग संयम से हो
सरकार ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि सीजीएसटी अधिनियम के तहत गिरफ्तारियां अधिकारी के संदेह से अधिक, लेकिन गंभीर संदेह से कम के आकलन पर आधारित है। हालांकि, अदालत ने मनमाने ढंग से गिरफ्तारी के लिए किसी भी औचित्य को खारिज कर दिया।
- पीठ ने जोर दिया कि गिरफ्तारी के अधिकार को आरोप तय करने के बराबर नहीं माना जा सकता है और इसका इस्तेमाल संयम से किया जाना चाहिए।
बल प्रयोग करने वाले अफसरों पर हो कार्रवाई
पीठ ने जीएसटी ढांचे के तहत तलाशी व जब्ती के दौरान अफसरों की ओर से धमकी और बल प्रयोग को भी अस्वीकार किया। पीठ ने निर्देश दिया कि ऐसे अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए।
यह था मामला
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कर अधिकारियों को कर चोरी व धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार देने वाले प्रावधानों को चुनौती दी थी। तर्क दिया कि ऐसी शक्तियां विधायी मंशा से परे हैं और अनुच्छेद 20(3) व 21 के तहत सांविधानिक सुरक्षा का उल्लंघन करती हैं। सीमा शुल्क अधिनियम के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय के समक्ष चुनौती दी गई कि गिरफ्तारी प्रावधान आपराधिक प्रक्रिया संहिता व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन नहीं करते हैं।