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SC: 'आज के युवा सोचते हैं कि वे बहुत होशियार और हम पुरानी पीढ़ी के', समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

Tue, 04 Mar 2025 07:49 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया को उनके 'द रणवीर शो' को प्रसारित करने की अनुमति दे दी। हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने समय रैना पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि रणवीर अपनी हरकत को लेकर पश्चाताप दिखाएंगे। सुनवाई के दौरान कोर्ट आशीष चंचलानी की अर्जी को भी सूचीबद्ध किया। आइए विस्तार से जानते हैं बीते दिन हुई सुनवाई में क्या-क्या हुआ? कोर्ट ने क्या-क्या कहा? मामले में पक्ष-विपक्ष में क्या-क्या दलीलें दी गईं?
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई - फोटो : Amar Ujala
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कॉमेडियन समय रैना को कनाडा में उनके शो 'इंडियाज गॉट लैटेंट' को लेकर उठे विवाद के बारे में बोलने के लिए फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि युवा पीढ़ी सोचती है कि वे बहुत होशियार हैं। शीर्ष अदालत पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। रणवीर ने पिछले महीने रैना के शो पर भद्दी टिप्पणी की थी, जिसके बाद काफी हंगामा मच गया था।

याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मामले का एक आरोपी कनाडा गया था और उसने इस मामले पर बात की थी। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'उनके एक सहकर्मी को लगता है कि ये युवा बहुत होशियार हैं और हम शायद पुरानी पीढ़ी के हैं। उनमें से एक कनाडा चला गया है और उसने वहां जो कुछ कहा है, वह हमें अच्छी तरह से पता है। वे नहीं जानते कि इस कोर्ट का किस तरह का अधिकार क्षेत्र है। हम इसे दिखाना नहीं चाहते क्योंकि वे युवा हैं और उम्मीद करते हैं कि वे जिम्मेदार लोगों की तरह व्यवहार करेंगे। अन्यथा हम जानते हैं कि इन लोगों से कैसे निपटना है।'

केंद्र सरकार, महाराष्ट्र, असम और ओडिशा जैसे राज्यों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें भी उनमें से एक की ओर से की गई टिप्पणी की जानकारी है, लेकिन वे इसे अनावश्यक रूप से उछालना नहीं चाहते। मेहता ने कहा, 'वह वास्तव में व्यंग्यात्मक टिप्पणी कर रहा था। वह इस अदालत में जारी कार्यवाही का मखौल उड़ा रहा था।' इस पर रणवीर अल्लाहबादिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव चंद्रचूड़ ने साफ किया कि उनके मुवक्किल का उस व्यक्ति की टिप्पणी से कोई संबंध नहीं है, जिसका अदालत ने उल्लेख किया है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
रणवीर अल्लाहबादिया को क्या राहत?
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया को उनके 'द रणवीर शो' को प्रसारित करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि शर्त यही है कि वह नैतिकता और शालीनता बनाए रखें और कार्यक्रम को को सभी उम्र के दर्शकों के लिए उपयुक्त बनाएं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रणवीर की इस दलील पर गौर किया कि पॉडकास्ट उनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत है और उनके की ओर से काम पर रखे गए लगभग 280 लोग भी इस शो पर निर्भर हैं।

पीठ ने कहा, 'याचिकाकर्ता द्वारा यह आश्वासन दिए जाने कि उनके पॉडकास्ट शो में शालीनता और नैतिकता के वांछित मानकों को बनाए रखा जाएगा, ताकि उसे किसी भी आयु वर्ग के दर्शक देख सकें, याचिकाकर्ता को 'द रणवीर शो' फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाती है।' इसलिए कोर्ट ने 18 फरवरी के अपने उस आदेश में बदलाव किया, जिसमें उसने रणवीर और उनके सहयोगियों पर यूट्यूब या किसी अन्य मंच पर कोई भी शो प्रसारित करने पर रोक लगाई थी।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
अभिव्यक्ति की आजादी पर लेख लिखने वालों पर आपत्ति जताई
सुनवाई के दौरान पीठ ने 18 फरवरी के आदेश के बाद अभिव्यक्ति की आजादी पर लेख लिखने वालों पर आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि वह इस मामले से निपटने में सक्षम है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'हम जानते हैं कि कुछ लोग अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ लेख लिख रहे हैं। हम जानते हैं कि उनसे कैसे निपटना है। इस देश में मौलिक अधिकार थाली में परोस कर नहीं मिलते। मौलिक अधिकार कर्तव्य से जुड़े हैं और जब तक वे लोग अपने कर्तव्य को नहीं समझना चाहते, तब तक हम जानते हैं कि ऐसे तत्वों से कैसे निपटना है।'

कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति मौलिक अधिकारों का लाभ उठाना चाहता है, तो देश ने इसके लिए एक गारंटी तो दी है, लेकिन वह गारंटी एक कर्तव्य के साथ आती है। पीठ ने कहा, 'तो उस गारंटी में वह कर्तव्य निभाने की गारंटी भी शामिल होगी। इसलिए हम जानते हैं कि किस तरह का... वैसे भी हम काफी आशान्वित हैं और हमें पूरा यकीन है कि उन्होंने जो किया है, उसके लिए कुछ पश्चाताप है)।'

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई
रणवीर अल्लाहबादिया पर सख्ती पर भी की
रणवीर अल्लाहबादिया के खिलाफ कॉमेडियन समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लैटेंट' में की गई आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी के लिए कई प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। हालांकि, पीठ ने रणवीर पर उनके पॉडकास्ट के ऐसे किसी भी कार्यक्रम को प्रसारित करने पर रोक लगाई, जिसका उन विचाराधीन मामलों के गुण-दोष पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता हो, जिनमें वह शामिल थे। पीठ ने कहा कि जांच में शामिल होने के बाद विदेश यात्रा के लिए उनकी प्रार्थना पर विचार किया जाएगा और उनके खिलाफ दर्ज मामलों में उनकी उपस्थिति की आवश्यकता नहीं है। पीठ ने रणवीर को गिरफ्तारी से दिए गए अंतरिम संरक्षण को अगले आदेश तक बढ़ा दिया और उन्हें गुवाहाटी में जांच में शामिल होने को कहा।
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Supreme Court - फोटो : PTI
'उन्हें कुछ समय के लिए चुप रहने दें'
केंद्र और महाराष्ट्र, असम एवं ओडिशा जैसे राज्यों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विवादास्पद यूट्यूब शो 'इंडियाज गॉट लैटेंट' पर की गई टिप्पणी न केवल अश्लील ही नहीं हैं, बल्कि अनुचित भी हैं। उन्होंने कोर्ट से कोई भी शो को प्रसारित नहीं करने की शर्त में बदलाव नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'उन्हें कुछ समय के लिए चुप रहने दें।' हालांकि, पीठ ने रणवीर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव चंद्रचूड़ से कहा कि कोर्ट को पूरा विश्वास और उम्मीद है कि उनके मुवक्किल कुछ पश्चाताप दिखाएंगे। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
केंद्र को मसौदा नियामक तंत्र के साथ आने का निर्देश
शीर्ष अदालत ने कार्यवाही के दायरे का भी विस्तार किया और केंद्र को सोशल मीडिया सामग्री पर एक मसौदा नियामक तंत्र के साथ आने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, 'हमने सॉलिसिटर जनरल को इस तरह के नियामक तंत्र पर विचार-विमर्श करने और सुझाव देने का सुझाव दिया है, जो स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति के अधिकार पर अतिक्रमण न करे, लेकिन साथ ही संविधान के अनुच्छेद 19 (4) में वर्णित ऐसे मौलिक अधिकार के मापदंडों को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रभावी भी हो।' अदालत ने कहा कि किसी भी मसौदा नियामक तंत्र को विषय पर विधायी या न्यायिक उपाय करने से पहले सभी हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक किया जा सकता है।

पीठ ने मेहता से कहा, 'समाज दर समाज नैतिक मानदंड अलग-अलग होते हैं.. .हमने खुद को बोलने और अभिव्यक्ति के अधिकार की गारंटी दी है, लेकिन ये गारंटी कुछ शर्तों के अधीन हैं। हम ऐसी कोई नियामक व्यवस्था नहीं चाहते हैं जो अंततः सेंसरशिप की ओर ले जाए।'
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
यूट्यूबर आशीष चंचलानी की अर्जी को भी सूचीबद्ध किया
इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने यूट्यूबर आशीष चंचलानी की प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने की अर्जी को अल्लाहबादिया की इसी तरह की याचिका के साथ सूचीबद्ध किया। सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी को रणवीर को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया था और उनकी टिप्पणी को अश्लील करार देते हुए कहा था कि उनकी विकृत मानसिकता से समाज को शर्मिंदा होना पड़ा। अल्लाहबादिया और रैना के अलावा असम मामले में नामजद अन्य लोगों में कॉमेडियन चंचलानी, जसप्रीत सिंह और अपूर्वा मखीजा शामिल हैं।

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