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Subhash Chandra Bose Jayanti 2020: सुभाष चंद्र बोस की हत्या हुई या मृत्यु?

Thu, 23 Jan 2020 02:25 PM IST
Priyesh Mishra बीबीसी हिंदी
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
भारत की स्वतंत्रता के लिए आजाद हिंद फौज का नेतृत्व करने वाले सुभाष चंद्र बोस की मौत आज भी एक रहस्य बनी हुई है। हाल में इस मुद्दे पर फिर राजनीतिक हलकों और बुद्धिजीवियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। आखिर 'नेताजी' सुभाष बोस किन परिस्थियां में गायब हुए या फिर उनकी मौत हुई? क्यों कई जाने-माने लोग उनकी मौत की खबर पर भरोसा नहीं कर रहे है?

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
जियाउद्दीन ने इंटेलिजेंस को चकमा दिया
18 जनवरी 1941, रात एक बज कर पैंतीस मिनट पर 38/2, एलगिन रोड, कोलकाता पर एक जर्मन वांडरर कार आ कर रुकी। कार का नंबर था बीएलए 7169। लंबी शेरवानी, ढीली सलवार और सोने की कमानी वाला चश्मा पहने बीमा एजेंट मोहम्मद जियाउद्दीन ने कार का पिछला दरवाजा खोला।
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
ड्राइवर की सीट पर उनके भतीजे बैठे हुए थे। उन्होंने जानबूझ कर अपने कमरे की लाइट बंद नहीं की। चंद घंटों में वो गहरी नींद में सोए कोलकाता की सीमा पार कर चंदरनागोर की तरफ बढ़ निकले। वहां भी उन्होंने अपनी कार नहीं रोकी। वो धनबाद के पास गोमो स्टेशन पर रुके। उनींदी आंखों वाले एक कुली ने जियाउद्दीन का सामान उठाया।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
कोलकाता की तरफ से दिल्ली कालका मेल आती दिखाई दी। वो पहले दिल्ली उतरे। वहां से पेशावर होते हुए काबुल पहुंचे... वहां से बर्लिन... कुछ समय बाद पनडुब्बी का सफर तय कर जापान पहुंचे। कई महीनों बाद उन्होंने रेडियो स्टेशन से अपने देशवासियों को संबोधित किया... 'आमी सुभाष बोलची।'
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
अपने घर में नजरबंद सुभाष चंद्र बोस बीमा एजेंट जियाउद्दीन के वेशभूषा में 14 ख़ुफिया अधिकारियों की आखों में धूल झोंकते हुए न सिर्फ भारत से भागने में सफल रहे बल्कि लगभग आधी दुनिया का चक्कर लगाते हुए जापान पहुंच गए।
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो चला था। जापान को आत्मसमर्पण किए हुए अभी तीन दिन हुए थे। 18 अगस्त 1945 को सुभाष बोस का विमान ईंधन लेने के लिए ताइपे हवाई अड्डे पर रुका था। दोबारा उड़ान भरते ही एक जोर की आवाज सुनाई दी थी। बोस के साथ चल रहे उनके साथी कर्नल हबीबुररहमान को लगा था कि कहीं दुश्मन की विमानभेदी तोप का गोला तो उनके विमान को नहीं लगा है।
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
बाद में पता चला था कि विमान के इंजन का एक प्रोपेलर टूट गया था। विमान नाक के बल जमीन से आ टकराया था और हबीब की आंखों के सामने अंधेरा छा गया था। जब उन्हें होश आया तो उन्होंने देखा कि विमान के पीछे का बाहर निकलने का रास्ता सामान से पूरी तरह रुका हुआ है और आगे के हिस्से में आग लगी हुई है। हबीब ने सुभाष बोस को आवाज दी थी, आगे से निकलिए नेताजी।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
बाद में हबीब ने याद किया था कि जब विमान गिरा था तो नेताजी की ख़ाकी वर्दी पेट्रोल से सराबोर हो गई थी। जब उन्होंने आग से घिरे दरवाजे से निकलने की कोशिश की तो उनके शरीर में आग लग गई थी। आग बुझाने के प्रयास में हबीब के हाथ भी बुरी तरह जल गए थे।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
उन दोनों को अस्पताल ले जाया गया था। अगले छह घंटों तक नेता जी को कभी होश आता तो कभी वो बेहोशी में चले जाते। उसी हालत में उन्होंने आबिद हसन को आवाज दी थी। "आबिद नहीं है साहब, मैं हूं हबीब।" उन्होंने लड़खड़ाती आवाज में हबीब से कहा था कि उनका अंत आ रहा है। भारत जा कर लोगों से कहो कि आजादी की लड़ाई जारी रखें।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
उसी रात लगभग नौ बजे नेता जी ने अंतिम सांस ली थी। 20 अगस्त को नेता जी का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के पच्चीस दिन बाद हबीबुररहमान नेता जी की अस्थियों को लेकर जापान पहुंचे।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी पत्नी एमिली शेंकल - फोटो : Social media
पत्नी एमिली फूट-फूट कर रोईं
1945 में ही अगस्त के आख़िरी महीने में नेताजी की पत्नी एमिली अपने वियना के फ्लैट के रसोईघर में अपनी मां और बहन के साथ बैठी हुई ऊन के गोले बना रही थीं। हमेशा की तरह वो रेडियो पर शाम का समाचार भी सुन रही थीं। तभी समाचार वाचक ने कहा कि भारत के देशद्रोही सुभाषचंद्र बोस ताइपे में एक विमान दुर्घटना में मारे गए हैं।

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Social media
एमिली की मां और बहन ने स्तब्ध हो कर उनकी ओर देखा। वो धीरे से उठीं और बगल के शयन कक्ष में चली गईं, जहां सुभाष बोस की ढाई साल की बेटी अनीता गहरी नींद में सोई हुई थीं। सालों बाद एमिली ने याद किया कि वो बिस्तर के बगल में घुटने के बल बैठीं और सुबक सुबक कर रोने लगीं।'

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
'विमान दुर्घटना का रिकॉर्ड नहीं'
हालांकि सुभाष बोस के साथ उस विमान में सवार हबीबुररहमान ने पाकिस्तान से आकर शाहनवाज समिति के सामने गवाही दी कि नेता जी उस विमान दुर्घटना में मारे गए थे और उनके सामने ही उनका अंतिम संस्कार किया गया था। लेकिन भारत में बहुत बड़ा तबका ये मानता रहा कि सुभाष बोस उस विमान दुर्घटना में जीवित बच निकले थे और वहां से रूस चले गए थे।

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नेहरू जी के साथ सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी कहते हैं कि विमान दुर्घटना के समय ताइवान जापानियों के कब्जे में था। उसके बाद उस पर अमेरिका का कब्जा हो गया। दोनों देशों के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि उस दिन वहां कोई विमान दुर्घटना हुई थी।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
उन्होंने कहा, "1991 के सोवियत विघटन के बाद एक सोवियत स्कॉलर ने मुझे बताया था कि नेता जी तो ताइवान गए ही नहीं थे। वो साएगोन से सीधे मंचूरिया आए थे, जहां उन्हें हमने गिरफ्तार किया था। बाद में स्टालिन ने उन्हें साइबेरिया की यकूत्स्क जेल में भिजवा दिया था जहां 1953 में उनकी मौत हो गई थी।"

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
नेहरू के स्टेनोग्राफर की गवाही
स्वामी नेहरू के स्टोनोग्राफर श्याम लाल जैन की शाहनवाज जांच समिति के सामने दी गई गवाही का ज़िक्र भी करते हैं। जैन ने आयोग के सामने कहा था कि 1946 में उन्हें एक रात नेहरू का संदेश मिला कि वो उनसे तुरंत मिलने आ जाएं। उनके निवास तीन मूर्ति पर नहीं बल्कि आसफ अली के यहां जो उस जमाने में दरियागंज में रहा करते थे।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
जैन के अनुसार नेहरू ने उन्हें ब्रिटिश प्रधानमंत्री एटली के लिए एक पत्र डिक्टेट कराया था जिसमें कहा गया था कि उन्हें स्टालिन से संदेश मिला है कि सुभाष बोस जीवित हैं और उनके कब्जे में हैं। स्वामी के अनुसार स्टालिन बोस से इसलिए नाराज थे क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने उनके सबसे बड़े दुश्मन हिटलर से हाथ मिलाया था।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
जापान का अजीब अनुरोध
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बीबीसी को बताया कि इसका दूसरा बड़ा सबूत उन्हें तब मिला जब वो चंद्रशेखर के मंत्रिमंडल में मंत्री बने। उन्होंने बताया, "हमारे पास जापान से अनुरोध आया कि रिंकोजी मंदिर में सुभाष बोस की जो अस्थियाँ रखी हैं, उनको आप ले लीजिए लेकिन एक शर्त पर कि आप इसका डीएनए टेस्ट नहीं कराएंगे।"

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
स्वामी कहते हैं कि उन्हें पता चला था कि इंदिरा गाँधी ने अपने कार्यकाल में नेता जी पर एक पूरी फ़ाइल को अपने सामने फड़वाया (श्रेड करवाया) था। लेकिन इस बात की पुष्टि किसी और सूत्र से नहीं हो पाई है। स्वामी के अनुसार, "पहली बात सोवियत संघ अब है नहीं। उस जमाने में जनसंहार के जिम्मेदार माने गए स्टालिन पूरी दुनिया में बदनाम हो चुके हैं। पुतिन को इस बात की कोई परवाह नहीं होगी अगर स्टालिन पर सुभाष बोस को हटाने का दाग लगता है।"

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
क्या नेहरू को जानकारी थी?
सवाल उठता है कि क्या सुभाष बोस के परिवार पर हो रही जासूसी की जानकारी नेहरू को व्यक्तिगत तौर पर थी। भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ में विशेष सचिव के पद पर काम कर चुके सी बालाचंद्रन कहते हैं कि ये एक ऐसी परंपरा है जो आजाद भारत की ख़ुफिया एजेंसियों ने ब्रिटेन से ग्रहण की है।

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
उन्होंने कहा, "1919 के बाद से ही ब्रिटिश सरकार के लिए कम्युनिस्ट आंदोलन एक चुनौती रहा है। उन्होंने शुरू से ही उन लोगों पर नजर रखना शुरू किया जिनका कहीं न कहीं सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध रहा है। बालाचंद्रन कहते हैं, "इसी सिलसिले में बोस की भी जासूसी शुरू की गई। एक इनसाइडर के तौर पर मैं बता सकता हूँ कि खुफिया एजेंसियों में जो चीज एक बार शुरू हो जाती है, वो बहुत लंबे समय तक जारी रहती है।"

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जवारहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
नेहरू के हाथ से लिखा नोट
लेकिन अनुज धर बालाचंद्रन के इस आकलन से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि इस तरह की जासूसी नेहरू की जानकारी के बगैर नहीं हो सकती थी। धर कहते हैं कि आईबी वाले कोई भी काम बिना अनुमति के नहीं करते। सुभाष बोस के बारे में उनका हर नोट आईबी के बड़े अफसर मलिक और काव तक पहुंचता था।

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सुभाष चंद्र बोस और मोहम्मद अली जिन्ना - फोटो : Netaji Research Bureau
अनुज धर के मुताबिक, "मेरे पास ऐसे दस्तावेज हैं जिसमें नेहरू ने अपने हाथों से आईबी को चिट्ठी लिख कर निर्देश दिया है कि पता लगाओ कि बोस का पौत्र अमिय बोस जापान क्यों गया है और वहां क्या कर रहा है? क्या वो रेंकोजी मंदिर भी गया था?"

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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
नेहरू के मन में संदेह
भारतीय जनता पार्टी के नेता और जाने माने पत्रकार एमजे अकबर का मानना है कि इस पूरे प्रकरण से यही संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं नेहरू के मन में संदेह था कि बोस उस विमान दुर्घटना में नहीं मरे थे। अकबर कहते हैं, "कॉमन सेंस कहता है वो अपने परिवार से जरूर संपर्क करते। शायद इसलिए नेहरू उनके पत्रों की निगरानी करवा रहे थे।"
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
किन परिस्थितियों में सुभाष बोस की मौत हुई और बीस वर्षों तक उनके परिवार पर क्यों नजर रखी गई, ये तो उनसे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक होने के बाद ही पता चल पाएगा। लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं उन्होंने इस कहावत को गलत साबित करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया कि ब्रिटिश साम्राज्य में सूरज कभी अस्त नहीं होता और अपनी इस मुहिम में बहुत हद तक वो सफल भी रहे।
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