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इसरो ने लॉन्च की IRNSS-1I नैविगेशन सैटेलाइट, स्वदेशी जीपीएस होगा ताकतवर

Thu, 12 Apr 2018 07:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आंध्र प्रदेश
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से आईआरएनएसएस-1आई नैविगेशन सैटेलाइट लॉन्च की। यह स्वदेशी जीपीएस नाविक की आठवीं सैटेलाइट है। इससे भारतीय जीपीएस नाविक को नई ताकत मिलेगी।

इसरो अधिकारियों ने बताया, पीएसएलवी-सी41 रॉकेट ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से सुबह 4.04 बजे उड़ान भरी। 19 मिनट में सैटेलाइट कक्षा में पहुंच गई। यह पीएसएलवी के कुल 43 मिशन में से 41वां सफल मिशन है। 
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1425 किलोग्राम की यह सैटेलाइट बंगलूरू की कंपनी अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजी ने तैयार की है। यह निजी कंपनी की ओर से तैयार दूसरी भारतीय सैटेलाइट है। पिछले साल अगस्त में पहली निजी सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1एच का प्रक्षेपण असफल हो गया था। इसरो चेयरमैन के सिवन ने मिशन को सफल बताया है और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को बधाई दी है।
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मजबूत होगा स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक

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रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम यानी नाविक का इस्तेमाल सैन्य और नागरिक सेवाओं दोनों में होगा। इससे सटीक टाइमिंग सिग्नल प्रसारित होंगे, जिससे रिसीवर से सटीक स्थिति का अनुमान लगाना संभव होगा। सैटेलाइट दो तरह के पेलोड लगे हैं, नेविगेशन और रेंजिंग। नई सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1आई नाविक की पहली सैटेलाइट आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगी। परमाणु घड़ियों के विफल होने के बाद यह सैटेलाइट अप्रभावी हो चुकी है।

अन्य फायदे

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विदेशी जीपीएस पर निर्भरता कम होगी, समुद्री मछुआरों को रास्ता और खराब मौसम का अलर्ट मिलेगा।
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नाविक के इस्तेमाल के लिए बनेगा एप

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नाविक के इस्तेमाल के लिए मोबाइल ऐप बनाया गया है। यह जल्द रिलीज होगा। इस एप के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए उद्योग और संस्थानों से अपील की गई है।
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पहले एक सैटेलाइट मिशन हो गया था असफल

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इसरो ने दो हफ्ते पहले जीसैट-6ए सैटेलाइट लॉन्च की थी, लेकिन दो दिन बाद ही उससे संपर्क टूट गया। 
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