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Cheetah : 120 की रफ्तार, 23 फीट की छलांग और एक मिनट में कर लेता है शिकार, जानें चीते की सारी खासियतें

Sat, 17 Sep 2022 05:29 PM IST
हिमांशु मिश्रा रिसर्च डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज हम आपको चीतों की सारी खासियत बताएंगे। कितनी रफ्तार से चीते दौड़ सकते हैं? कितना ऊंचा छलांग लगा सकते हैं? शरीर की बनावट कैसी होती है? आइए जानते हैं...
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Cheetah Reintroduction Project - फोटो : अमर उजाला
नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को आज मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहुंच गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसके लिए कूनो पहुंचे। कभी चीतों का घर रहे हिन्दुस्तान में आजादी के वक्त ही चीते पूरी तरह विलुप्त हो गए थे। 1947 में देश के आखिरी तीन चीतों का शिकार मध्य प्रदेश के कोरिया रियासत के महाराजा रामानुज प्रताप सिंह देव ने किया था। इसकी फोटो भी बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी में है। उस दिन के बाद से भारत में कभी भी चीते नहीं दिखे। अब 75 साल बाद आठ चीतों को नामीबिया से लाया गया है। 

ऐसे में आज हम आपको चीतों की सारी खासियत बताएंगे। कितनी रफ्तार से चीते दौड़ सकते हैं? कितना ऊंचा छलांग लगा सकते हैं? शरीर की बनावट कैसी होती है? आइए जानते हैं...
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Cheetah Reintroduction Project - फोटो : अमर उजाला
120 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ सकता है चीता
  • चीता हर सेकेंड में चार छलांग लगाता है। चीते की अधिकतम रफ्तार 120 किमी प्रति घंटे की हो सकती है। सबसे तेज रफ्तार के दौरान चीता 23 फीट यानी करीब सात मीटर लंबी छलांग लगा सकता है।
  • चीते की रिकॉर्ड रफ्तार अधिकतम एक मिनट के लिए रह सकती है। यह अपनी फुल स्पीड से 300 से 450 मीटर दूर तक दौड़ सकता है।
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Cheetah Reintroduction Project - फोटो : अमर उजाला
पतली हड्डियों की खोपड़ी
चीते का सिर बाघ, शेर, तेंदुए और जगुआर की तुलना में काफी छोटा होता है। इससे तेज रफ्तार के दौरान उसके सिर से टकराने वाली हवा का प्रतिरोध काफी कम हो जाता है।
चीते की खोपड़ी पतली हड्डियों से बनी होता है। इससे उसके सिर का वजन भी कम हो जाता है। इसके चलते चीता आसानी से दौड़ लगा सकता है। 

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चीता - फोटो : अमर उजाला
शारीरिक बनावट भी होती है खास
  • 1973 में हावर्ड में एक रिसर्च हुई थी। इसके अनुसार, आमतौर पर चीते के शरीर का तामपमान 38 डिग्री सेल्सियस होता है, लेकिन रफ्तार पकड़ते ही उसके शरीर का तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस हो जाता है। चीते का दिमाग इस गर्मी को नहीं झेल पाता। तब वो अचानक से दौड़ना बंद कर देता है।
  • तेज रफ्तार से दौड़ने के लिए चीते की मांसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस ऑक्सीजन की सप्लाई को बरकरार रखने के लिए चीते के नथुनों के साथ श्वास नली भी मोटी होती है। इसके चलते कम बार सांस लेकर भी ज्यादा ऑक्सीजन शरीर में पहुंच जाता है। 
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चीता - फोटो : अमर उजाला
कई मील दूर तक देख सकता है चीता
  • चीते की आंख सीधी दिशा में होती है। इसकी वजह से वह कई मील दूर तक आसानी से देख सकता है। इससे चीते को अंदाजा हो जाता है कि उसका शिकार कितनी दूरी पर है।
  • चीते की आंखों में इमेज स्टेबिलाइजेशन सिस्टम होता है। इसकी वजह से वह तेज रफ्तार में दौड़ते वक्त भी अपने शिकार पर फोकस बनाए रखता है।
  • चीते के पंजे घुमावदार और ग्रिप वाले होते हैं। दौड़ते वक्त चीता पंजे की मदद से जमीन पर ग्रिप बनाता है और आगे की ओर आसानी से जंप कर पाता है।
  • चीता अपने पंजे की वजह से ही शिकार को कसकर पकड़ पाता है।
  • चीते की पूंछ 31 इंच यानी 80 सेंटीमीटर तक लंबी होती है। 
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चीता - फोटो : अमर उजाला
एक मिनट के अंदर शिकार
  • चीते का दिल शेर के मुकाबले साढ़े तीन गुना बड़ा होता है। यही वजह है कि दौड़ते समय इसे अच्छे से ऑक्सीजन मिलती है। यह तेजी से पूरे शरीर में ब्लड को पंप करता है और इसकी मांसपेशियों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। 
  • चीता अपने शिकार का पीछा करीब एक मिनट तक ही करता है। अगर इस दौरान वह उसे नहीं मार पाता तो उसका पीछा करना छोड़ देता है। 
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