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Shraddha Murder Case: श्रद्धा के शव को काटते समय भी क्यों नहीं घबराया आफताब, क्यों आपको भी सचेत रहने की जरूरत?

Wed, 16 Nov 2022 09:17 AM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आखिर आफताब ने ये सबकुछ कैसे किया? मर्डर करने के बाद जब वह शव के टुकड़े कर रहा था तो क्या उसे डर नहीं लगा? आखिर कैसे वह 20 दिन तक शव के टुकड़े के साथ उसी फ्लैट में रहा? उस वक्त आफताब की मनोदशा क्या रही होगी? 
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श्रद्धा मर्डर केस - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण दिल्ली के महरौली में हुए श्रद्धा मर्डर केस की चर्चा पूरे देश में हो रही है। श्रद्धा की हत्या उसके ही प्रेमी आफताब अमीन पूनावाला ने की थी। इसके बाद उसके शव के 35 टुकड़े किए और जंगल में फेंक आया। इस वारदात के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर आफताब ने ये सबकुछ कैसे किया? मर्डर करने के बाद जब वह शव के टुकड़े कर रहा था तो क्या उसे डर नहीं लगा? आखिर कैसे वह 20 दिन तक शव के टुकड़े के साथ उसी फ्लैट में रहा? उस वक्त आफताब की मनोदशा क्या रही होगी? 


 
हमने इन तमाम सवालों का जवाब जानने के लिए मनोवैज्ञानिक डॉ. हेमा खन्ना से बात की।  पुलिस और मीडिया के सामने आए वाले फैक्ट्स और आरोपी आफताब के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मौजूद जानकारी के आधार पर हमें उसकी मनोदशा के बारे में जानकारी दी। आइए जानते हैं उन्होंने इस मर्डर केस को लेकर क्या-क्या बताया?  
 
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Shraddha walker murder case - फोटो : अमर उजाला
पहले पूरी घटना के बारे में जान लीजिए
श्रद्धा मुंबई के मलाड़ में रहती थी और एक कॉल सेंटर में काम करती थी। आफताब अमीन पूनावाला भी मुंबई का रहने वाला है। यहीं दोनों की मुलाकात एक डेटिंग एप के जरिए हुई। इसके बाद दोनों के प्रेम संबंध बन गए। दोनों लिव-इन में रहने लगे। श्रद्धा के घरवालों को इस रिश्ते की जानकारी हुई तो उन्होंने श्रद्धा को आफताब का साथ छोड़ने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं मानी। हिमाचल और उत्तराखंड घूमने की बात कहकर श्रद्धा आफताब के साथ मुंबई से निकल गई। दोनों ऋषिकेश घूमने गए और वापस आकर दिल्ली में ही रहने लगे। यहां इन्होंने छतरपुर, महरौली में किराए पर कमरा लिया। 
 
 
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Shraddha walker murder case - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धा के पिता को ये बात जब मालूम हुई तो उन्होंने उससे बातचीत बंद कर दी। कभी-कभी श्रद्धां अपनी मां से जरूर बात कर लिया करती थी। 18 मई को आफताब और श्रद्धा के बीच झगड़ा हो गया। पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, श्रद्धा ने आफताब से शादी का प्रस्ताव रखा। आफताब शादी नहीं करना चाह रहा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लड़ाई हो गई। आफताब ने एक हाथ से श्रद्धा का मुंह दबाया। जब श्रद्धा चिल्लाने लगी तो आरोपी ने दूसरे हाथ से उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने शव को बाथरूम में रखा। 
 
 

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Shraddha walker murder case - फोटो : अमर उजाला
रातभर शव के साथ रहने के बाद दूसरे दिन आफताब मिनी आरी लेकर आया और श्रद्धा के शव को 35 टुकड़ों में काट दिया। पहले हाथ, फिर पैर और एक-एक करके शरीर के सारे अंगों को काटने के बाद उसने पानी से उसे साफ किया। फिर उसपर बोरिक पाउडर छिड़कर अलग-अलग पन्नी में सारे टुकड़ों को भर दिया। इसके बाद पन्नी को फ्रीजर में रख दिया। 
 
 
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मृतका श्रद्धा वाकर और हत्यारोपी आफताब - फोटो : अमर उजाला
फ्रीजर के बाहरी हिस्से में कोल्ड ड्रिंक व अन्य खाने-पीने का सामान भी रखता था और उसी को यूज करता था। हर रोज फ्रीज से शव के एक दो टुकड़े लेकर अपने बैग में रखता था और उसे महरौली के जंगल में फेंक आता। शव की पहचान न हो सके इसके लिए उसने फायर टॉर्च खरीदा था। उसके जरिए उसने श्रद्धा का चेहरा पूरी तरह से जला दिया। ये सिलसिला 22 दिनों तक चलता रहा। पूरे शव को ठिकाने लगाने के बाद आफताब ने फ्लैट बदल दिया। इस बीच, वह अपनी एक नई गर्ल फ्रेंड को भी फ्लैट पर लाता था। श्रद्धा के बारे में उसने अपनी नई गर्ल फ्रेंड को भनक तक नहीं लगने दी। 
 
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मृतक श्रद्धा का फाइल फोटो और आरोपी आफताब - फोटो : अमर उजाला
शव के टुकड़े करते समय भी क्यों नहीं डरा आफताब?
इसे समझने के लिए हमने मनोवैज्ञानिक डॉ. हेमा खन्ना से बात की। उन्होंने कहा, 'तकनीक के जमाने में हर किसी की मनोदशा काफी तेजी से बदलने लगी है। अब वर्चुअल दुनिया को लोग हकीकत मानने लगे हैं। वर्चुअल दुनिया में जो कुछ होता है, उसे असल जिंदगी में करने की कोशिश करते हैं। फिल्मों, सीरियल, वीडियो गेम का इंसान के दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। बचपन से जिन चीजों को लोग देखते हैं, उसकी उन्हें आदत पड़ जाती है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही होना प्रतीत हो रहा है।'
 
डॉ. खन्ना के अनुसार, 'आफताब ने पुलिस को बताया है कि वह हमेशा से क्राइम और साइकोलॉजिकल थ्रिलर शो देखता था। वह अमेरिकन क्राइम शो डेक्स्टर का रेगुलर व्यूवर था। इस शो में एक फॉरेंसिक टेक्नीशियन रहता है, जो हर रोज रात में लोगों का मर्डर करता था। मर्डर करके शव को इस तरह से ठिकाने लगाता था कि वह किसी भी तरह कानून के शिकंजे में न फंसे। यहीं से आफताब ने शव को ठिकाने लगाने का तरीका इस्तेमाल किया।'
 
गुस्से में जान लेने के बाद जब उसने शव के टुकड़े करने शुरू किए तो भी आफताब विचलित क्यों नहीं हुआ? इसका जवाब देते हुए डॉ. खन्ना कहती हैं कि आफताब के दिमाग में उस वक्त सिर्फ यही चल रहा था कि कैसे वह खुद को बचाए रखे। आजकल क्राइम सीरियल में खून और भयावह तस्वीरें, वीडियो आने लगे हैं। आफताब रेगुलर उसे देखता था। ऐसे में उसने इसे किसी सीरियल या गेम की तरह अंजाम दिया। 
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दिल्ली में श्रद्धा हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
क्यों सचेत रहने की जरूरत? 
डॉ. खन्ना बताती हैं, 'मौजूदा समय हर कोई मोबाइल में ही व्यस्त है। घर-परिवार और दोस्तों के लिए लोगों के पास समय नहीं है। लोग आभासी दुनिया में ज्यादा रहने लगे हैं। ऐसे में इंसानी रिश्तों की दूरियां बढ़ने लगी हैं, जबकि वर्चुअल दुनिया इंसान पर हावी होते जा रही है। लोग हिंसक चीजों को ज्यादा देखने लगे हैं। फिल्में, सीरियल भी हिंसक ही बनाई जाती हैं। जिसे लोग मनोरंजन के रूप में लेते हैं। ये अलार्मिंग सिचुएशन है। वर्चुअल दुनिया में जो कुछ होता है, वो इंसान को पूरी तरह से अपने काबू में कर लेता है। इंसान की सोचने-समझने की क्षमता खत्म कर देता है। इससे लोगों को उबरने की जरूरत है।'
 
डॉ. खन्ना के अनुसार, 'हर पैरेंट्स को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि आपका बच्चा क्या देख रहा है और क्या सीख रहा है? कौन सा वीडियो गेम खेल रहा है? कैसे लोगों से मिल रहा है? बच्चे का बर्ताव कहीं बदल तो नहीं रहा? अगर बच्चर चिड़चिड़ा हो रहा, बात-बात में गुस्सा कर रहा, हिंसक हो रहा तो सावधान रहने की जरूरत है। बच्चे की तुरंत काउंसलिंग कराएं। युवा अवस्था में ये बातें और भी जरूरी हो जाती हैं। युवा अवस्था में बच्चे अपनी बातों को अपने तक सीमित कर लेते हैं। ये सबसे ज्यादा दिक्कत की बात है। युवा अवस्था में भी इस तरह के लक्षण मिलने पर काउंसलिंग कराना चाहिए।'
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