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Shraddha Murder Case: क्या श्रद्धा के हत्यारे को हो सकती है फांसी, कोर्ट में कैसे साबित होगा आफताब का जुर्म?

Wed, 16 Nov 2022 04:07 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोर्ट के सामने पुलिस की थ्योरी साबित हो पाएगी? क्या कोर्ट में आफताब का जुर्म साबित हो पाएगा? जुर्म साबित होता है तो क्या श्रद्धा के हत्यारे को फांसी मिलेगी? इसे लेकर कानून क्या कहता है? आइये जानते है...
 
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श्रद्धा मर्डर केस - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के महरौली में हुए श्रद्धा मर्डर केस की जांच तेज हो गई है। आफताब को गिरफ्तार हुए चार दिन हो चुके हैं। श्रद्धा के पिता ने आरोपी आफताब को फांसी देने की मांग की है। आफताब अपना गुनाह कबूल कर चुका है। उसकी निशानदेही पर अब तक श्रद्धा के शव के 18 से ज्यादा टुकड़े महरौली के जंगल से मिले हैं। हालांकि, अभी भी कई सवाल हैं, जिसके जवाब मिलने बाकी हैं। 
 
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोर्ट के सामने पुलिस की थ्योरी साबित हो पाएगी? क्या कोर्ट में आफताब का जुर्म साबित हो पाएगा? जुर्म साबित होता है तो क्या श्रद्धा के हत्यारे को फांसी मिलेगी? इसे लेकर कानून क्या कहता है? आइये जानते है...
 
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Shraddha walker murder case - फोटो : अमर उजाला
अब तक पुलिस को क्या-क्या सबूत मिले? 
पुलिस के सामने आफताब ने अपना जुर्म कबूल किया है। उसकी निशानदेही पर महरौली के जंगल में श्रद्धा के शव के कई टुकड़े मिले हैं। इसके अलावा फ्रिज भी बरामद हो चुका है, जिसमें श्रद्धा के शव के टुकड़ों को रखा गया था। पुलिस ने उस फ्लैट को सील कर दिया है, जहां श्रद्धा का मर्डर हुआ था और उसके शव को काटा गया था। 


 
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Shraddha walker murder case - फोटो : अमर उजाला
और किन-किन सबूतों को जुटाने की कोशिश में जुटी है पुलिस? 
अभी तक पुलिस को वह हथियार नहीं मिला है, जिससे श्रद्धा के शव के टुकड़े किए गए थे। इसके अलावा श्रद्धा का मोबाइल फोन, उसके और आफताब के खून से सने कपड़े की बरामदगी भी नहीं हो पाई है। आफताब ने पुलिस को बताया है कि उसने श्रद्धा का मोबाइल मुंबई में कहीं फेंक दिया है। इसके अलावा जिस कटर से श्रद्धा के शव के टुकड़े किए थे उसे दिल्ली के कूड़ेदान में फेंक दिया। 

खून से सने कपड़ों को दिल्ली नगर निगम की कूड़े वाली गाड़ी में फेंक दिया था। ये भी सामने आया है कि श्रद्धा के अकाउंट से 55 हजार रुपये निकाले गए थे। पुलिस ने कोर्ट से आफताब के नार्को टेस्ट के लिए इजाजत भी मांगी है। बताया जाता है कि इससे कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। 
 

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Shraddha walker murder case - फोटो : अमर उजाला
तो क्या कोर्ट में आफताब के गुनाहों को साबित कर पाएगी पुलिस? 
इसे समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय से बात की। उन्होंने कहा, 'अभी तक जो तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुसार पुलिस के सामने आफताब ने अपना जुर्म कबूला है। ये कोर्ट में मान्य नहीं होता है। पुलिस के सामने गुनाह कबूल करना कोर्ट में एडमिसिबल नहीं होता है। हालांकि, इस मामले में बात थोड़ी अलग है। आरोपी के निशानदेही पर पुलिस ने शव के कई टुकड़े बरामद किए हैं। इसकी भी रिकॉर्डिंग होती है। जिसमें उसे घटनास्थल पर लेकर जाया जाता है और वह इशारा करके बताता है कि उसने शव को किस जगह ठिकाने लगाया है। अगर उसके निशानदेही वाली जगह से पुलिस को कुछ मिलता है तो ये केस का अहम सबूत माना जाएगा।'
 
 
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Shraddha walker murder case - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा, 'अभी शव के टुकड़ों का डीएनए टेस्ट होगा। इसके बाद श्रद्धा के पिता के डीएनए से उसका मिलान किया जाएगा। आफताब के खिलाफ शव की बरामदगी एक मजबूत आधार बन सकती है। हालांकि, उसे सख्त सजा दिलाने के लिए ये काफी नहीं होगा। अभी तक पुलिस ने वो हथियार बरामद नहीं किया है, जिससे उसके शव के टुकड़े किए गए थे। श्रद्धा का मोबाइल भी नहीं मिला है। वो कपड़े भी ढूंढना जरूरी है, जिसे पहनकर आफताब ने श्रद्धा के शव के टुकड़े किए थे। जो उसके खिलाफ एक अहम सबूत साबित हो सकते हैं।'
 
 
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श्रद्धा मर्डर केस - फोटो : अमर उजाला
चंद्र प्रकाश पांडेय का कहना है, 'कोर्ट में श्रद्धा और आफताब के कॉमन फ्रेंड्स की गवाही, डिजिटल सबूत, श्रद्धा के माता-पिता और पड़ोसियों की गवाही के काफी मायने हैं। इससे पुलिस श्रद्धा और आफताब के रिश्तों में आई कड़वाहट की कड़ी को मजबूती से पेश कर सकती है। श्रद्धा ने अपने दोस्तों से आफताब के बारे में बताया था। आफताब से लड़ाई झगड़े और मारपीट की बात भी शेयर की थी। इसके अलावा पड़ोसी भी दोनों के झगड़ों की आवाज को तस्दीक कर सकते हैं।'
 
 
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मृतका श्रद्धा वाकर और हत्यारोपी आफताब - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा, 'श्रद्धा को आखिरी बार आफताब के साथ ही देखा गया था। उसके अकाउंट से ट्रांजेक्शन भी हुए हैं। श्रद्धा के खाते से निकाला गया पैसा आफताब के खाते में गया था, वो भी उसके मरने के बाद। ऐसे में ये आफताब के खिलाफ काफी मजबूत सबूत होगा। श्रद्धा को मारने के बाद आफताब ने लंबे समय तक उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स हैंडल किए। उसके दोस्तों से बात की। फिर अचानक उसके गायब होने की बात भी किसी को नहीं बताई। पुलिस दोनों के मोबाइल लोकेशन को भी मैच करेगी। इससे साबित होगा कि दोनों उस वक्त एक ही जगह थे। आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस खंगाले जा सकते हैं। इसके जरिए मालूम करने की कोशिश होगी कि श्रद्धा फ्लैट पर पहुंची लेकिन वहां से निकली नहीं। ये सब बातें आफताब के खिलाफ कोर्ट में रखी जाएंगी।'
 
 

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श्रद्धा मर्डर केस का आरोपी आफताब। - फोटो : अमर उजाला
चंद्र प्रकाश पांडेय कहते हैं, 'ये केस रेयरेस्ट ऑफ द रेयर है। ऐसे में पुलिस को हर एक कड़ी को बहुत ही गंभीरता से जोड़ना होगा। हर उन बिंदुओं का जवाब ढूंढना होगा, जो कोर्ट में उठ सकता है। जिसके जरिए आफताब के वकील उसे बेगुनाह साबित करने की कोशिश कर सकते हैं।'
 

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आरोपी आफताब - फोटो : सोशल मीडिया
तो क्या आफताब को फांसी की सजा मिल सकती है? 
इलाहाबाद हाईकोर्ट के क्रिमिनल मामलों के एडवोकेट आजाद सिंह से हमने यही सवाल पूछा। उन्होंने कहा, 'हत्या मामले में किसी मुजरिम को तभी फांसी की सजा सुनाई जाती है जब मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर का हो। इस कारण सजा पर बहस के दौरान एक तरफ जहां सरकारी पक्ष मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में लाने की कोशिश करती है वहीं बचाव पक्ष की यह कोशिश होती है कि वह मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में न आने दे।'
 
 

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हत्यारोपी आफताब और मृतका श्रद्धा (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने आगे कहा, '1955 से पहले हत्या के केस में दोषी ठहराए जाने पर मुजरिम को फांसी की सजा ही दी जाती थी लेकिन समय के साथ कानूनी प्रावधान में बदलाव आया। उस वक्त अगर किसी मुजरिम को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दी जाती थी तो जजमेंट में इसके लिए कारण बताने होते थे कि क्यों मुजरिम को उम्रकैद की सजा दी जा रही है। लेकिन अब कानून में बदलाव हुआ है। अब अदालत के विवेक पर छोड़ा गया है कि किस मुजरिम को उम्रकैद दी जानी है और किसे फांसी। जजमेंट में कारण बताने की अनिवार्यता भी नहीं है।'  
 

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आरोपी आफताब - फोटो : ANI
आजाद सिंह के मुताबिक, '1973 में सीआरपीसी में फिर से बदलाव हुआ और धारा-354 में सब क्लॉज 3 जोड़ा गया। इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि हत्या मामले में उम्रकैद की सजा देने के वक्त कारण देने की जरूरत नहीं है लेकिन फांसी की सजा सुनाते वक्त जजमेंट में कारण बताने को अनिवार्य किया गया। अब किसी मुजरिम को हत्या मामले में फांसी की सजा तभी होती है जब सरकारी पक्ष मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर साबित करने में कामयाब होता है। उसे यह साबित करना होता है कि हत्या को जघन्यतम तरीके से अंजाम दिया गया है।'
 
 

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इंदिरा गांधी - फोटो : amar ujala
उनके अनुसार, 'अगर देश की संप्रभुता को चुनौती दी गई हो और देश की व्यवस्था को हिला कर रखने वाला अपराध किया गया हो तो भी फांसी की सजा दी जाती है। संसद पर अटैक का केस इसका प्रमुख उदाहरण है। इसी तरह जिस पर रक्षा की जिम्मेदारी होती है और उसी ने अगर भक्षक का काम किया हो तो भी वह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में आता है। इंदिरा गांधी के हत्यारे का मामला इसका उदाहरण है।'
 
 
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श्रद्धा - फोटो : अमर उजाला
आजाद आगे कहते हैं, 'श्रद्धा मर्डर केस भी काफी हद तक रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में आता है। आफताब और श्रद्धा दोनों लिव इन रिलेशन में थे। एक तरह से श्रद्धा की जिम्मेदारी आफताब की थी। इसके अलावा हत्या के बाद जिस तरह से आफताब ने शव को टुकड़ों में काटा और उसे फेंका ये भी भयावता को दर्शाता है। ऐसे में अगर सरकारी वकील इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में रखने में कामयाब होते हैं तो आफताब को जरूर फांसी हो सकती है।'
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