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तीन तलाक बिल: दो साल पहले शायरा ने दी थी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, इस तरह पहुंची अंजाम तक

Fri, 29 Dec 2017 12:41 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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- फोटो : PTI
तीन तलाक के खिलाफ 10 अक्टूबर 2015 को शुरू हुई लड़ाई 28 दिसंबर को अंजाम तक पहुंची। 

10 अक्टूबर 2015 को शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को चुनौती दी थी। 
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15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने बेंच बनाई ये पता करने के लिए कि क्या मुस्लिम महिलाओं को भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
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5 फरवरी 2016 को तीन तलाक और हलाला को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की मदद के लिए मुकुल रोहतगी को नियुक्त किया गया। 

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29 जून 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक को संवैधानिक ढांचे को कसौटी पर परखेंगे।
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- फोटो : PTI
7 अक्टूबर 2016 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक का विरोध किया। 

9 दिसंबर 2016 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, कोई भी पर्सनल लॉ अधिकारों से बड़ा नहीं। 
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27 मार्च 2017 को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि तीन तलाक जैसे मामलों पर कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। 
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- फोटो : PTI
12-18 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गलत तरीका बताया। मुकुल रोहतगी ने कहा कि केंद्र सरकार नया कानून लाएगी। 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि ये 1400 साल पुराना आस्था से जुड़ा मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।

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22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया। 
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15 दिसंबर को केंद्र ने तीन तलाक पर कानून बनाया। नए कानून के मुताबिक एक साथ तीन तलाक देने पर 3 साल जेल का प्रावधान है। 

28 दिसंबर 2017 को लोकसभा में तीन तलाक पर बिल पास हुआ।
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