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7 घोटाले जिनमें गांधी-नेहरू परिवार पर आरोप लगे

Wed, 27 Apr 2016 05:23 PM IST
बीबीसी/ नई दिल्ली
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गांधी परिवार
एक नजर आजाद भारत में हुए उन घोटालों पर जिनमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके बाद उनके परिवार के लोगों पर आरोप लगे हैं। तो आइए जानते हैं कौन-कौन से हैं वो घोटाले।
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अगस्ता हेलिकॉप्टर घोटाला- 2013

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हेलीकॉप्टर डील - फोटो : BBC
ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर 2013 में इतालवी चॉपर कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से कमीशन लेने के आरोप लगे। अगस्ता वेस्टलैंड से भारत को 36 अरब रुपए के सौदे के तहत 12 हेलिकॉप्टर खरीदने थे। इतालवी कोर्ट में रखे गए 15 मार्च 2008 के एक नोट में इशारा किया गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया इस वीआईपी चॉपर खरीद के पीछे अहम भूमिका निभा रही थीं।
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वाड्रा-डीएलएफ घोटाला- 2012

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robert vadra
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर 2012 में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याजमुक्त लोन लेने का आरोप लगा। ये आरोप भी लगे कि इस बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक फायदा पहुँचाना मकसद था। यह भी कहा गया कि इस दौरान केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई हिस्सों में बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं।

नेशनल हेराल्ड केस-2011

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राजीव गांधी के अच्छे दोस्त थे अमिताभ - फोटो : BBC
कांग्रेस के पैसे से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड नाम की कंपनी 1938 में बनी और तीन अखबार चलाती थी– नेशनल हेरल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज। एक अप्रैल 2008 को ये अखबार बंद हो गए। मार्च 2011 में सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी ने यंग इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी खोली, जिसमें दोनों की 38-38 फीसदी हिस्सेदारी थी। कंपनी को खड़ा करने का मकसद एजेएल पर मौजूद 90।21 करोड़ रुपए की देनदारियां उतारना था।  पार्टी ने हेरल्ड हाउस में एक करोड़ रुपया और लगाया जो कभी एजेएल के पास होता था। इस मामले में सोनिया और राहुल के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी अदालत गए और संपत्ति के बेजा इस्तेमाल का केस दर्ज कराया।
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बोफोर्स घोटाला– 1990-2014

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बोफोर्स घोटाला - फोटो : BBC
इस घोटाले ने 1980 और 1990 के दशक में गांधी परिवार और खासकर तब प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी की छवि को गहरा धक्का पहुँचाया। आरोप थे कि स्वीडन की तोप बनाने वाली कंपनी बोफोर्स ने कमीशन के बतौर 64 करोड़ रुपए राजीव गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं को दिए थे ताकि वो भारतीय सेना को अपनी 155 एमएम हॉविट्जर तोपें बेच सके। बाद में सोनिया गांधी पर भी बोफोर्स तोप सौदे के मामले में आरोप लगे जब सौदे में बिचौलिया बने इतालवी कारोबारी और गांधी परिवार के करीबी ओतावियो क्वात्रोकी अर्जेंटिना चले गए।
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मारुति घोटाला- 1973

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मारुति कार - फोटो : BBC
कार कंपनी मारुति की स्थापना से भी पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम मारुति घोटाले में आया था, जब उनके बेटे संजय गांधी को यात्री कार बनाने का लाइसेंस मिला था। 1973 में सोनिया गांधी को मारुति टेक्निकल सर्विसेज प्राइवेट लि. का एमडी बनाया गया, हालांकि सोनिया के पास इसके लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं थी। कंपनी को इंदिरा सरकार की ओर से टैक्स, फंड और जमीन को लेकर कई छूटें मिलीं। मगर कंपनी बाजार में उतारने लायक एक भी कार नहीं बना सकी और 1977 में बंद कर दी गई।
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नागरवाला स्कैंडल- 1971

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इंदिरा गांधी के समय में भी घोटाला - फोटो : BBC
सेना के एक पूर्व कैप्टेन रुस्तम सोहराब नागरवाला ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आवाज की नकल करके संसद मार्ग स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा को फोन किया और उससे 60 लाख रुपए निकलवा लिए। घोटाला तब खुला जब नागरवाला ने पैसा लेने के बाद टैक्सी वाले को ढेर सारे नोट दिए। इसके बाद एसबीआई के हैड कैशियर वेद प्रकाश मल्होत्रा को इस्तीफा देना पड़ा। नागरवाला को पकड़ा गया और उनकी जेल में ही मौत हो गई। नागरवाला ने रुपए निकलवाने के लिए बहाना किया था कि प्रधानमंत्री दफ्तर के आदेश पर उन्होंने पैसा मांगा है और पैसा बांग्लादेश संकट से निपटने के लिए चाहिए।
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मूंदड़ा स्कैंडल –1951

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जवाहर लाल नेहरु पर भी लगे आरोप - फोटो : BBC
कलकत्ता के उद्योगपति हरिदास मूंदड़ा को आजाद भारत के पहले ऐसे घोटाले के बतौर याद किया जाता है जिसे तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जोड़कर देखा गया। 1957 में मूंदड़ा ने सरकारी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी के जरिए अपनी छह कंपनियों में 12 करोड़ 40 लाख रुपए का निवेश कराया। यह निवेश सरकारी दबाव में एलआईसी की इन्वेस्टमेंट कमेटी की अनदेखी करके किया गया। जब तक एलआईसी को पता चला उसे कई करोड़ का नुकसान हो चुका था। इस केस को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दामाद फिरोज गांधी ने उजागर किया, जिसे नेहरू खामोशी से निपटाना चाहते थे क्योंकि इससे देश की छवि खराब होती थी। नेहरू ने अपने वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को बचाने की कोशिश भी कीं, मगर आखिरकार उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
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