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Ratan Tata: महिला ने छोटू कहा, ट्रोलिंग हुई तो बचाव में उतरे टाटा; फौजी के दिव्यांग बेटे को मुख्यालय में नौकरी

Fri, 11 Oct 2024 06:37 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला विशेष

सार

दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा का दुनिया को अलविदा कह जाना सभी के दिलों को कचोट रहा है। दुनिया उन्हें  न केवल एक सफल उद्योगपति के तौर पर, बल्कि एक बेहतरीन, सौम्य, सत्यनिष्ठ, सादगीपसंद और परोपकारी शख्सियत के तौर पर भी हमेशा याद रखेगी। और एक ऐसे किवदंती के रूप में भी, जो हमेशा मीडिया की नजरों से दूर, बिना हो हल्ला किए, बिना दिखावा किए लोगों की मदद करते रहे, उन्हें प्रेरित करते रहे... ऐसे ही कुछ किस्से बता रहे हैं सौरभ चौहान...
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रतन टाटा - फोटो : amarujala.com
उद्योगपति रतन टाटा को कुत्तों से बहुत प्रेम था। एक बार उन्होंने अपने बीमार कुत्ते की देखभाल के लिए ब्रिटेन के राजकुमार चार्ल्स का आमंत्रण ठुकरा दिया था। रतन टाटा को बकिंघम पैलेस में बेमिसाल परोपकार के लिए सम्मानित किया जाना था लेकिन उन्होंने अपने बीमार कुत्ते को छोड़कर ब्रिटेन जाने से मना कर दिया था। यह किस्सा एक इंटरव्यू में उद्योगपति सुहैल सेठ ने सुनाया था। उन्होंने बताया, जब मैं लंदन में विमान से उतरा तो मैंने देखा कि मेरे फोन में रतन टाटा की 11 मिस कॉल थीं। मैंने उन्हें तुरंत फोन मिलाया। तब उन्होंने बताया कि वह सम्मान लेने ब्रिटेन नहीं आ पाएंगे। इसकी वजह भी उन्होंने बताई कि उनके कुत्ते की तबीयत ठीक नहीं थी और वे उसे बीमार हालत में छोड़कर नहीं जा सकते। यह बात जब प्रिंस चार्ल्स को पता चली, तो उन्होंने भी रतन टाटा की तारीफ करते हुए उन्हें महान इन्सान बताया। 

बदली पारसी परंपरा से अंतिम संस्कार
पारसी समुदाय के लोग पारंपरिक तौर पर अपने परिजनों के शव टॉवर ऑफ साइलेंस में रख देते हैं, ताकि गिद्ध उन्हें खा सकें। लेकिन रतन टाटा के अंतिम संस्कार ने समुदाय में बदलती परंपरा को दर्शाया। गिद्धों की घटती आबादी के कारण पारसी अब टॉवर ऑफ साइलेंस की जगह विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार करने लगे हैं। वर्ली स्थित श्मशान गृह में पारसी व जोरास्ट्रियन लोगों के अंतिम संस्कार के लिए जगह निर्धारित है।
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ऐसा लगाव...बॉम्बे हाउस में लावारिस कुत्तों को खुली छूट

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रतन टाटा की स्मृतियां - फोटो : अमर उजाला
टाटा संस के मुख्यालय बॉम्बे हाउस में घुसने से पहले जहां हर किसी की तलाशी ली जाती है, वहीं सड़क पर घूमने वाले लावारित कुत्ते इसमें बेरोकटोक घुस सकते हैं। दशकों से सभी स्टाफ को यह खास निर्देश हैं, कोई भी लावारिस कुत्ता, जो अंदर आना चाहे उसे रोका नहीं जाएगा। बताया जाता है, टाटा एक दिन दफ्तर पहुंचे तो देखा कि एक कुत्ता बाहर बारिश में भीग रहा है। इसके बाद लावारिस कुत्तों के लिए बॉम्बे हाउस के दरवाजे हमेशा के लिए खुल गए। लोग ताज होटल के बाहर भी कुत्तों को आराम करते देख सकते हैं। मुंबई में टाटा ट्रस्ट ने जानवरों के लिए एक अस्पताल भी खोला है।
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अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा लाडला कुत्ता गोवा

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श्रद्धांजलि देने पहुंचा पालतू कुत्ता गोवा और दाहिने रतन टाटा (फाइल) - फोटो : अमर उजाला / एएनआई
एनसीपीए में रतन टाटा के अंतिम दर्शन करने के लिए टाटा का लाडला कुत्ता गोवा भी पहुंचा। वह कुछ देर तक बेहद शांत भाव से उनके पार्थिव शरीर के पास बैठा रहा। यह दृश्य मन को झकझोर देने वाला था। काले रंग के कुत्ते को रतन टाटा ने गोवा से रेस्क्यू किया था। इसलिए इसका नाम गोवा रखा था।

तस्वीर पर महिला ने लिखा छोटू, ट्रोल हुईं तो टाटा ने दिया करारा जवाब

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जब छोटू कहे जाने के बाद महिला के बचाव में सोशल मीडिया ट्रोल्स को टाटा ने दिया जवाब - फोटो : अमर उजाला / इंस्टाग्राम
रतन टाटा इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय रहे और अक्सर तस्वीरें भी साझा करते थे। इस बीच, उन्होंने अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह जमीन पर बैठे थे। इस पर एक महिला ने अजीब सा कमेंट करते हुए लिखा, बधाई हो छोटू। उनके लाखों फॉलोअर में से कई को यह रवैया खटक गया और उन्होंने महिला की ट्रोलिंग शूरू कर दी। लेकिन रतन टाटा जो आलोचकों को भी विनम्रता से लेते थे, उन्होंने ट्रोलिंग करने वालों की बोलती बंद कर दी। उन्होंने लिखा, मैं युवा महिला की तारीफ करता हूं कि उन्होंने अपने दिल की बात कही। उम्मीद करता हूं कि वे आगे भी इसी तरह लिखती रहेंगी। हमे नहीं भूलना चाहिए कि बच्चा तो हर किसी के अंदर होता है। ऐसे में इस महिला को सम्मान दीजिए, उनकी इज्जत कीजिए।
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राजनीतिज्ञों से सच बोलने का साहस

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रतन टाटा - फोटो : Amar Ujala
टाटा के निधन के बाद देश के पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह ने अपने एक संदेश में कहा, रतन टाटा में सत्ता में बैठे लोगों से सच बोलने का साहस था। मेरे पास कई मौकों पर उनके साथ बेहद करीब से काम करने की सुखद यादें हैं। उनकी दूरदर्शिता और मानवता उनके कई परमार्थ कार्यों में दिखी। दूसरी तरफ भारत रत्न से सम्मानित लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि टाटा ने भारतीय उद्योग पर अमिट छाप छोड़ी और वह वास्तव में दिवंगत जेआरडी टाटा के योग्य उत्तराधिकारी साबित हुए। उनकी उदारता और दयालुता हमेशा असाधारण रही है। देश उनका ऋणी रहेगा।

फ्रांस ने एक प्रिय मित्र को खो दिया
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा, रतन टाटा की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता ने भारत और फ्रांस में नवाचार और विनिर्माण के क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी विरासत को उनके मानवतावादी दृष्टिकोण, विशाल परोपकारी उपलब्धियों और उनकी विनम्रता के लिए याद किया जाएगा। हम समाज की बेहतरी के प्रति आपकी आजीवन प्रतिबद्धता को प्रशंसा और सम्मान के साथ याद करेंगे। उनके निधन से फ्रांस ने भारत में एक मित्र खो दिया।
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कर्मचारियों के लिए गैंगस्टर को कराया गिरफ्तार

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रतन टाटा - फोटो : अमर उजाला
1980 में एक गैंगस्टर रंगदारी के लिए टाटा के कर्मचारियों को परेशान कर रहा था। उसने स्टाफ के कई लोगों से मारपीट भी की। जब रतन टाटा को इसकी खबर मिली तो वह खुद एक प्लांट पर पहुंच गए और कई दिन तक वहीं डटे रहे। बाद में उन्होंने इस गैंगस्टर को गिरफ्तार कराया।

बीमार कर्मचारी को देखने मुंबई से पुणे पहुंचे
टाटा समूह की कंपनी का एक सामान्य स्टाफ लंबे समय से बीमार चल रहा था। रतन टाटा बिना किसी को बताए पुणे में उसके घर पहुंच गए और उसके इलाज में पूरी मदद की।

26/11 हमले के पीड़ित 80 परिवारों से मिलने पहुंचे
रतन टाटा का एक मानवीय पहलू 2008 में 26/11 आतंकी हमले के दौरान भी सबने देखा था। ताज होटल को भी इस हमले का दंश झेलना पड़ा था। तब 80 पीड़ित परिवारों से रतन टाटा ने खुद जाकर मुलाकात की, उन्हें सांत्वना दी और ऐसे परिवारों के बच्चों की पूरी शिक्षा का खर्च भी उठाया।
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छंटनी पर कंपनियों को दिखाया आईना

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रतन टाटा सफलता के मंत्र - फोटो : Amar Ujala
कोरोना काल के दौरान हो रही छंटनियों पर रतन टाटा ने एक पोस्ट कर कंपनियों को आईना दिखाया। उन्होंने लिखा कि कारोबार में नुकसान का मतलब यह नहीं, कि स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया जाए। क्या इससे कारोबार सही चलने लगेगा।

एक वादा जो निभाया

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रतन टाटा और उनके सबसे करीबी दोस्त शांतनु नायडू - फोटो : AMAR UJALA
सेना से रिटायर्ड कर्नल विनायक सुपेकर ने भी दिग्गज  उद्योगपति का एक यादगार किस्सा सुनाया और कहा, रतन टाटा का उन्हें- हाय कैप्टन -कहना उन्हें हमेशा याद आता रहेगा। सुपेकर ने बताया कि 1992 में वह कैप्टन के तौर पर महाराष्ट और गुजरात के क्षेत्रीय मुख्यालय बेस में तैनात थे। मुंबई में कोलाबा स्थित यूनाइटेड सर्विसेज क्लब में अक्सर रतन टाटा से उनकी मुलाकात होती थी। एक मुलाकात के दौरान उन्होंने रतनटाटा से जिक्र किया कि उनके एक दोस्त (तत्कालीन लेफ्टिनेंट कर्नल बीएस बिष्ट) का बेटा विजय घोड़े से गिरकर चोट लगने से दिव्यांग हो गया है और उसे नौकरी की जरूरत है। और अगली ही सुबह विजय को बॉम्बे हाउस से फोन आ गया कि वह टाटा मुख्यालय में प्रशासकीय विभाग में ड्यूटी ज्वॉइन कर लें। कतार में ही लगकर कुत्ते को दिखाया ऐसा ही एक और वाकया उन्होंने बताया, कि रतन टाटा कोलाबा में सेना के पशु क्लिनिक पर अपने कुत्ते नियमित जांच के लिए लाते थे।
  • एक बार एक सैन्य अधिकारी ने टाटा समूह के चेयरमैन को अपनी बारी के लिए कतार में लगे देखा। सैन्य अधिकारी ने रतन टाटा से कहा, वह कतार से निकल कर सीधे आ जाएं, लेकिन रतन टाटा ने विनम्रता से इन्कार कर दिया।

टाटा की मदद से फतह किया माउंट एवरेस्ट

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रतन टाटा सफलता के मंत्र - फोटो : Amar Ujala
वर्ष 1997 में महाराष्ट्र के कुछ युवाओं ने फैसला किया कि वह माउंट एवरेस्ट पर जाकर देश की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ मनाएंगे। लेकिन संसाधनों के अभाव में उनका सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का सपना दम तोड़़ता दिखा। टीम के सभी युवा पहले कई जगह ट्रैकिंग कर चुके थे। ऐसे में यह युवा मदद की गुहार लेकर टाटा के दरवाजे पर पहुंचे। चार दिन बाद वह हैरान थे, जब टाटा समूह ने उनके प्रयास को सराहते हुए उन्हें हर संभव आर्थिक मदद का भरोसा भी दिया। इस टीम के लीडर रहे ऋषिकेश यादव ने बताया कि इससे पहले माउंट एवरेस्ट के सभी अभियान सेना या अन्य सेवाओं की ओर से होते थे, लेकिन भारी खर्च के चलते आम नागरिक इसे नहीं कर पाते थे। यादव ने बताया कि रतन टाटा को किसी की मदद का ढिंढोरा पीटना कतई पसंद नहीं था। वह हमेशा लाइमलाइट से दूर रहे।
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टाटा को एक रुपये का वेलकम मैसेज भेज नैनो को बंगाल से गुजरात लाए मोदी

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Ratan Tata with Tata Nano Car - फोटो : Instagram/@RatanTata
गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने टाटा समूह के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा को 2008 में एक शब्द का मैसेज भेजा था। यह शब्द था वेलकम। यही वह मैसेज था, जिसके बाद टाटा नैनो परियोजना पश्चिम बंगाल के सिंगूर से गुजरात पहुंच गई थी। सीएम मोदी ने टाटा को यह एसएमएस तब भेजा था, जब रतन टाटा कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की अगुवाई में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद प. बंगाल से टाटा नैनो परियोजना के विदाई की घोषणा की थी। मोदी ने 2010 में साणंद में 2,000 करोड़ रुपये के निवेश से निर्मित टाटा नैनो संयंत्र का उद्घाटन करते हुए कहा था, जब टाटा ने कोलकाता में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वे पश्चिम बंगाल छोड़ रहे हैं, तो मैंने उन्हें वेलकम कहते हुए छोटा एसएमएस भेजा था। और अब आप देख सकते हैं कि एक रुपये का एसएमएस क्या कर सकता है। टाटा ने तीन अक्तूबर, 2008 को पश्चिम बंगाल से नैनो परियोजना के बाहर निकलने की घोषणा की थी और कहा था कि अगले चार दिनों के भीतर गुजरात के साणंद में संयंत्र स्थापित किया जाएगा। मोदी ने तब कहा था कि कई देश नैनो परियोजना के लिए हरसंभव मदद देने को इच्छुक थे, लेकिन गुजरात सरकार के अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि परियोजना भारत से बाहर न जाए।
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