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रमजान का पाक महीना आज से शुरू, एक के बदले मिलेंगी 70 नेकी

Tue, 07 May 2019 09:11 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रमजान 2019 - फोटो : अमर उजाला
रमजान का मुकद्दस (पवित्र) महीना आज से शुरू हो गया। आज पहला रोजा है। रमजान के पाक महीने में खुदा के बंदे उसकी इबादत करते हैं। मस्जिदों और घरों से कुरान शरीफ की तिलावत की आवाज आनी शुरू हो जाती है।
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रमजान 2019 - फोटो : Social Media
जिस तरह नमाज पढ़ना हर मुसलमान के लिए फर्ज है उसी तरह रोजे रखना भी खुदा ने फर्ज करार दिया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। इस पाक महीने को रहमतों का महीना कहा जाता है। 
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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
प्यास की शिद्दत, भूख की तड़प, गर्मी की तपिश होने के बाद भी एक रोजेदार खुदा का शुक्रिया अदा करता है। रोजेदार के सामने दुनिया की सारी अच्छी चीजें रखी हों पर वो खुदा की बिना इजाजत के उसे हाथ तक नहीं लगाता। यही सब चीजें एक रोजेदार को खुदा के नजदीक लाती हैं। 

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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
रूह को पाक करके अल्लाह के करीब जाने का मौका देने वाला रमजान का मुकद्दस महीना हर इंसान को अपनी जिंदगी को सही राह पर लाने का पैगाम देता है। भूख-प्यास की तड़प के बीच जबान से रूह तक पहुंचने वाली खुदा की इबादत हर मोमिन को उसका खास बना देती है।
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फाइल फोटो
आम दिनों में इंसान का पूरा ध्यान खाने-पीने और दूसरी जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है और यही रमजान माह की खासियत भी है।
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फाइल फोटो
रमजान के महीने को तीन अशरों (हिस्सों) में रखा गया है। पहला अशरा 'रहमत' का है जिसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत बरसाता है। दूसरा अशरा 'बरकत' का है जिसमें खुदा अपने बंदों पर बरकत नाजिल करता है, जबकि तीसरा अशरा 'मगफिरत' का है। इसमें अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है।
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फाइल फोटो - फोटो : rajeev gupta/ amarujala
आम दिनों में बंदे को एक नेकी के बदले में 10 नेकी मिलती हैं लेकिन रमजान के पाक महीने में खुदा अपने रोजेदार बंदों को एक के बदले 70 नेकियां अता फरमाता है। रमजान का मकसद खुद को गलत काम करने से रोकने की ताकत पैदा करना या उसे फिरसे जिंदा करना है।

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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
खुद को गलत कामों से रोकने की ताकत को शरीअत में तकवा कहा गया है जिसमें इंसान खुद को रोक लेता है। रोजेदार को सख्त प्यास लगी होती है लेकिन वो खुद को रोक लेता है। गलत बात होने के बावजूद खुद को गुस्सा होने से रोकता है। झूठ बोलने और बदनिगाही से परहेज करता है।
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फाइल फोटो - फोटो : विवेक निगम
इंसान से जिंदगी में सारे गुनाह इसीलिए होते हैं, क्योंकि वो खुद को गलत काम करने से नहीं रोक पाता। जिस तरह बारिश के मौसम में आसमान से गिरने वाली बूंदें तमाम गंदगी और कूड़े-करकट को किनारे लगा देती हैं, वैसे ही रमजान के महीने में अल्लाह की रहमतें अपने प्यारें बंदों को पाक-साफ कर देती हैं।
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