भारतीय रेलवे ने यात्रियों को 21वीं सदी की सुख सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। रेलवे के इस कदम से न केवल यात्रियों को हवाई यात्रा का अहसास होगा बल्कि भारतीय ट्रेनें विश्वस्तर की बन सकेंगी। आगे स्लाइड में जानते हैं इन मार्डन विस्टाडोम कोच की खासियत-
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Vistadome coach
- फोटो : अमर उजाला
रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने ओडिशा के भुवनेश्वर से रविवार को विशेष रुप से डिजाइन किए गए विस्टाडोम कोच का अनावरण किया। यह कोच विशाखापट्टनम-किरांदूल पैसेंजर ट्रेन में लगाया गया है। इस कोच को बनाने के पीछे रेलवे का एक खास मकसद है।
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असल में यह ट्रेन अराकू घाटी से होकर गुजरती है। रेलवे ने यात्रियों को प्रकृति की नैसर्गिक खूबसूरती दिखाने के लिए ये विशेष रुप डिजाइन किए गए माडर्न कोच बनवाए हैं। इसमें ऐसी कई ऐसी खासियत है जिससे यात्रियों को इस बेइतंहा खूबसूरत घाटी को निहारने का मौका मिलेगा।
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इन एसी कोच की सबसे बड़ी खूबी बड़े-बड़े पारदर्शी शीशे हैं। इन शोशों के कारण यात्री अपनी करीब 128 किमी यात्रा के दौरान प्रकृति को निहार सकेंगे। ये अपनी तरह के पहले कोच हैं। एक कोच बनाने में रेलवे का करीब तीन करोड 38 लाख रुपये खर्च आया है।
प्रत्येक कोच में 40 सीटें हैं जिन्हें चारों तरफ घुमाया जा सकता है ताकि यात्री प्राकृतिक सौंदर्य का पूरा मजा ले सकें। यहीं नहीं कोच की छत भी शीशे की बनी है। प्रत्येक कोच में एलईडी लाइट लगी हैं। यात्रियों को त्वरित सूचना देने के लिए जीपीसी आधारित सूचना प्रणाली भी लगी है।