भारत ने अपनी छठी नैविगेशन सैटेलाइट गुरुवार को लॉन्च कर दी। IRNSS1F यानी भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली की मदद से जहां स्थलीय और समुद्री नैविगेशन आसान होगा वहीं यह सैटेलाइट आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग और जहाजी बेड़े के प्रबंधन के लिए मदद गार साबित होगा।
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मिलेगी सटीक जानकारी
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इसके तहत तीन उपग्रहों को जिओस्टेशनरी कक्षा और चार को जिओसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इस सैटेलाइट की मदद से किसी भी स्थान के 20 मीटर के अंदर की जानकारी सटीक रुप से ली जा सकेगी। ये सैटेलाइट बॉर्डर 1500 किलो मीटर तक दूर की जानकारी हासिल की जा सकती है।
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छठा उपग्रह हुआ लॉंच
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नैविगेशन की श्रृंखला में यह छठा उपग्रह है। यह सैटेलाइट अपने साथ दो तरह के पेलोड्स लेकर गया है। पहला है नैविगेशन पेलोड और दूसरा है रेंजिंग पेलोड। नैविगेशन पेलोड जहां संचारित नेविगेशन सेवा संकेतों के लिए काम में आएगा वहीं दूसरा C- बैंड के साथ ट्रांसपोंडर है जो उपग्रह की सीमा के सही निर्धारण की सुविधा प्रदान करेगा।
अपना जीपीएस सिस्टम होगा
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IRNSS1Fकी मदद से देश का अपना जीपीएस सिस्टम होगा। इस प्रक्षेपण से पूर्व आईआरएनएसएस श्रृंखला के उपग्रहों को क्रमश: 1 जुलाई 2013 (आईआरएनएसएस-1ए), 4 अप्रैल 2014 (आईआरएनएसएस-1बी), 16 अक्तूबर 2014 (आईआरएनएसएस-1सी), 28 मार्च 2015 (आईआरएनएसएस-1डी) और पांचवें उपग्रह (आईआरएनएसएस-ई) को 20 जनवरी, 2016 को प्रक्षेपित किया गया था।
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अमेरिका के समकक्ष होगा भारत
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इस श्रेणी के सातो उपग्रह लॉंच होने के बाद भारत जीपीएस प्रणाली में अमेरिका के समकक्ष हो जाएगा। इसरो के इस सफल लॉंच पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी है।
राष्ट्रपति मुखर्जी ने IRNSS1F के सफल लॉंच पर इसरो की टीम को बधाई दी है। वहीं पीएम मोदी ने ट्वीट में लिखा है कि 'IRNSS1F का लॉंच बड़ी उपलब्धि है जिस पर हमें गर्व है। मैं अपने वैज्ञानिकों और इसरो के कठिन परिश्रम को सलाम करता हूं।'