-वर्ष 2019-2020 के संयंत्र में 35 इंजन तैयार कर लिए जाएंगे।
-वर्ष 2020-21 में संख्या बढ़ाते हुए संयंत्र से 60 इंजनों का उत्पादन किया जाएगा।
-इसके बाद लक्ष्य हासिल करने तक हर साल 100 इंजनों का निर्माण किया जाएगा।
-इन इंजनों का इस्तेमाल कोयला और लौह अयस्क की ढुलाई में किया जाएगा।
-अब तक भारत के पास सबसे ज्यादा 6,000 हॉर्स पावर क्षमता के इंजन हैं।
-भारत के अलावा रूस, चीन, जर्मनी और स्वीडन के पास 12 हजार हॉर्स पावर क्षमता के रेल इंजन हैं।
-परियोजना से 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।