फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेज रफ्तार-धुआं कम, मोदी ने लगाया भारतीय रेल को नया इंजन

Tue, 10 Apr 2018 06:19 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
विज्ञापन
1 of 9
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिहार के मधेपुरा संयंत्र से 12 हजार हॉर्स पावर क्षमता के इलेक्ट्रिक इंजन को हरी झंडी दिखाई। इस संयंत्र में ऐसे 800 इंजन के निर्माण की योजना है। उम्मीद की जा रही है कि यह लक्ष्य 11 साल में हासिल कर लिया जाएगा।
विज्ञापन

तकनीकि फायदा

2 of 9
फ्रांस की कंपनी अल्स्टॉम के साथ समझौते के तहत पहले पांच इंजन आयात करने हैं। इंजन की अधिकतम रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा होगी। बाकी 795 इंजनों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत इसी संयंत्र में किया जाएगा।
विज्ञापन

ये है उद्देश्य

3 of 9
संयंत्र 250 एकड़ में फैला है। इसमें एक परीक्षण ट्रैक भी है। इस इंजन को रेलवे की परिचालन लागत घटाने और प्रदूषण कम करने के लिए ट्रैक पर उतारा जा रहा है....

बड़ी बातें

4 of 9
-रेलवे में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया गया है।
-परियोजना में फ्रांस की कंपनी अल्स्टॉम की 74 फीसदी और भारतीय रेलवे की 26 फीसदी हिस्सेदारी है।  
-परियोजना की अनुमानित लागत 20 हजार करोड़ रुपये है। 
-अगले 11 साल में संयंत्र में 800 उच्च क्षमता वाले इंजन तैयार होंगे। 
-हर इंजन की औसत लागत 25 करोड़ रुपये होगी।
-मधेपुरा निर्माण संयंत्र (बिहार) सहित सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) व नागपुर 
(महाराष्ट्र) के मरम्मत डिपो के निर्माण पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
विज्ञापन

बाकी इंजनों को इस साल मिलेगी मंजूरी

5 of 9
-वर्ष 2019-2020 के संयंत्र में 35 इंजन तैयार कर लिए जाएंगे।
-वर्ष 2020-21 में संख्या बढ़ाते हुए संयंत्र से 60 इंजनों का उत्पादन किया जाएगा।
-इसके बाद लक्ष्य हासिल करने तक हर साल 100 इंजनों का निर्माण किया जाएगा।
-इन इंजनों का इस्तेमाल कोयला और लौह अयस्क की ढुलाई में किया जाएगा।
-अब तक भारत के पास सबसे ज्यादा 6,000 हॉर्स पावर क्षमता के इंजन हैं।
-भारत के अलावा रूस, चीन, जर्मनी और स्वीडन के पास 12 हजार हॉर्स पावर क्षमता के रेल इंजन हैं।
-परियोजना से 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
विज्ञापन

ये है अंतर

6 of 9
विशेष रूप से भारत की कुछ सबसे तेज रेलगाड़ियां, गतिमान एक्सप्रेस और भोपाल शताब्दी ट्रेनों को WAP-5 इंजनों द्वारा खींचा जाता है और ये नई दिल्ली-आगरा में 160 किलोमीटर प्रति घंटे (99 मील प्रति घंटा) और 150 किमी/घंटा (93 मील प्रति घंटा) पर दौड़ती है। वहीं सबसे बड़े (लंबाई के अनुसार) स्टीम लोकोमोटिव इंजन हैं। 1941 से 1945 के मध्य में बने इन इंजनों को 'बिग बॉयज़' के नाम से जाना जाता है। 
विज्ञापन

कहां से मिला फायदा?

7 of 9
याद दिला दें कि भारतीय रेलवे को अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से पहला डीजल-इलेक्ट्रिक रेल इंजन पहले ही प्राप्त हो चुका है। यह इस तरह के एक हजार इंजनों की 2.5 अरब डॉलर में आपूर्ति करने के सौदे के तहत प्राप्त हुआ है। यह परियोजना भारतीय रेलवे और जनरल इलेक्ट्रिक के बीच संयुक्त उपक्रम है जिसका उद्देश्य 4500 हॉर्सपावर और 6000 एचपी के आधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक इंजनों की आपूर्ति एवं रख-रखाव करना है। इस संयुक्त उपक्रम की घोषणा नवंबर 2015 में की गयी थी।

क्या आएगा बदलाव?

8 of 9
इससे डीजल इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन सिस्टम में डीजल इंजन और इलेक्ट्रिक जेनरेटर कनेक्ट किया जा सकता है। उच्च क्षमता के इंजन में इलेक्ट्रिक इंजन को रिचार्जेबल बैटरी में स्टोर किया जा सकता है। भारत में रेलवे नेटवर्क को तेजी से इलेक्ट्रीफिकेशन की ओर ले जाया जा रहा है। मतलब ये है कि आगे आने वाले दिनों में इलेक्ट्रिक इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा और डीजल इंजन को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।
विज्ञापन

रेलवे रचेगा इतिहास

9 of 9
डेमो इमेज
इसके साथ ही रेलवे में डीजल इंजन का चलन अगले पांच साल में इतिहास बन जाएगा। घने कोहरे में ड्राइवर को नहीं दिखती दूसरी ट्रेन उत्तर भारत में सर्दियों के वक्त काफी घना कोहरा पड़ता है। इस दौरान पटरी पर खड़ी ट्रेन को दूर से पीछे से आ रही ट्रेन के ड्राइवर को नहीं दिखती है। ऐसे में टक्कर हो जाती है। अब ट्रेनों की टक्कर न हो, इसके लिए सभी प्रमुख रूटों पर सिग्नल प्रणाली को मैन्युल तरीके से हटाकर के ऑटोमेटिक किया जा रहा है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें