भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को उज्जैन सिंहस्थ कुंभ में वाल्मीकि घाट पर दलित साधु संतों के साथ स्नान तो जरूर किया, लेकिन नाम बदलकर। पहले ‘समरसता स्नान’ नाम दिया गया था, लेकिन साधु-संतों के तीखे विरोध के चलते ऐन वक्त पर इसका नाम बदलकर ‘संत समागम स्नान’ कर दिया गया।
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अमित शाह ने किया ‘संत समागम’ में स्नान
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अमित शाह
दरअसल, अखाड़ा परिषद ने नाम नहीं बदलने पर शाह के कार्यक्रम का बहिष्कार करने की धमकी दी थी। लिहाजा आनन-फानन में नाम बदला गया। इसके बाद साधु-संत और महामंडलेश्वर आदि मंच पर भाजपा अध्यक्ष शाह के साथ नजर आए।
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अमित शाह ने किया ‘संत समागम’ में स्नान
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इसके बाद शाह ने चांदी की थाली में सबके साथ भोजन किया। मालूम हो कि भाजपा के सामाजिक समरसता स्नान कार्यक्रम को संत समाज ने पूरी तरह राजनीतिक बताया था। साथ ही कहा था कि साधुओं में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होता। कुंभ में सभी बिना भेदभाव के स्नान करते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम से साधुओं में मतभेद बढ़ेगा।
बहरहाल, साधुओं में नाराजगी को देखते हुए भाजपा को पूर्व घोषित कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। यही वजह है कि शाह वाल्मीकि धाम से दलित साधु संतों के साथ जुलूस की शक्ल में रामघाट नहीं पहुंचे। बल्कि वाल्मीकि घाट पर ही शिप्रा के जल में डुबकी लगाई। उनके साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरि, महामंडलेश्वर अवधेशानंद, वाल्मीकि धाम के पीठाधीश्वर उमेश नाथ और अन्य साधु-संत भी मौजूद थे।