लोकसभा चुनाव में महज कुछ महीने बाकी रह गए हैं, तो विपक्ष के कई दल मोदी सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक चुके हैं। कोलकाता में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के आमंत्रण पर महारैली में शनिवार को कई दलों के दिग्गज नेता पहुंचे। साल 2019 के इस शुरुआती महीने में ही विपक्षी एकता दिखाने का यह पहला मंच रहा।
ये रैली कई मायनों में अलग रही। तीन भाषाओं में यहां संबोधन किया गया। कुछ समय पहले तक एनडीए और भाजपा के सहयोगी रहे नेता तो इसमें शामिल हुए ही, भाजपा के कुछ बागी नेताओं ने भी मंच की शान बढ़ाई। देखें महारैली की कुछ शानदार तस्वीरें
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कोलकाता में विपक्ष की महारैली
- फोटो : PTI
लोकसभा चुनाव में सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कवायद के तहत शनिवार को यहां आयोजित विशाल रैली में प्रमुख विपक्षी दलों के नेता एक मंच पर नजर आए और उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार भरी।
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जनसैलाब की मौजूदगी में हुई इस रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जनता दल सेक्यूलर प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, तीन वर्तमान मुख्यमंत्री - चंद्रबाबू नायडू (तेलुगु देशम पार्टी), एचडी कुमारस्वामी (जनता दल सेक्यूलर) और अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी), छह पूर्व मुख्यमंत्री - अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला (दोनों नेशनल कांफ्रेंस), बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा), हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) शामिल हुए।
वहीं इसी हफ्ते भाजपा छोड़ चुके गेगांग अपांग, आठ पूर्व केंद्रीय मंत्री- मल्लिकार्जन खड़गे (कांग्रेस), शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), अजित सिंह (राष्ट्रीय लोक दल), शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, शत्रुघ्न सिन्हा और राम जेठमलानी ने हिस्सा लिया। इनके अलावा, राजद नेता एवं बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रतिनिधि एवं राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और जानेमाने दलित नेता एवं गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी भी मंच पर नजर आए।
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कोलकाता में विपक्ष की महारैली
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ममता बनर्जी ने कहा कि मोदी सरकार की एक्सपायरी डेट खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि राजनीति में शिष्टता होती है लेकिन भाजपा इसका पालन नहीं करती और जो भाजपा के साथ नहीं होता उसे वे चोर बता देते हैं। रैली में ममता ने ‘बदल दो, बदल दो, दिल्ली की सरकार बदल दो’ का नारा भी दिया।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) को सत्ता से बाहर करने की बात नहीं है। यह देश को बचाने और आजादी के लिए लड़ने वालों के बलिदान का सम्मान करने की बात है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्ष को साथ मिलकर लड़ना होगा। झामुमो नेता हेमंत सोरेन ने भाजपा को देश से उखाड़ फेंकने का आह्वान करते हुए विपक्षी दलों से अपील की।
कश्मीर समस्या का हल निकालने के लिए गठित समिति में शामिल रहे यशवंत सिन्हा ने कहा कि जब उन्होंने प्यार-मोहब्बत वाले वातावरण में सभी तबके के लोगों से बात करने का सुझाव दिया था तो उन्हें पकिस्तानी एजेंट बताया गया था।
सिन्हा ने मोदी सरकार के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास’ का भी मजाक उड़ाया। उन्होंने इसे ‘सबका साथ, सबका विनाश’ बताया। रैली में जुटे जनसैलाब की ओर इशारा करते हुए हार्दिक पटेल ने कहा कि यह संकेत है कि भाजपा सत्ता से बाहर जा रही है। दलित नेता जिगनेश मेवानी ने कहा कि महागठबंधन आरएसएस और भाजपा की हार सुनिश्चित करेगा।