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One Nation One Poll: JPC को भेजे गए 'एक देश-एक चुनाव' से जुड़े विधेयक; इस सांसद को बनाया गया अध्यक्ष

Fri, 20 Dec 2024 11:18 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब को देश में एक साथ चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार के लिए गठित जेपीसी का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। ओडिशा से सात बार लोकसभा सदस्य रह चुके महताब 31 सदस्यीय जेपीसी में शामिल हैं। इसमें अनुराग ठाकुर और पीपी चौधरी जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं।
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एक देश-एक चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

लोकसभा ने देश में एक साथ चुनाव कराने से संबंधित दो विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके लिये जेपीसी का भी गठन कर दिया गया है। इस संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा के 27 और राज्यसभा के 12 सदस्य शामिल होंगे। पीपी चौधरी को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। यह समिति देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव वाले दो विधेयकों की समीक्षा करेगी। इस समिति के सदस्यों की संख्या 31 से बढ़ाकर 39 कर दी गई है। 

सदस्यों की संख्या बढ़ाने के बाद अधिक दलों को प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। सरकार की ओर से प्रस्तावित लोकसभा सांसदों की सूची में अब शिवसेना (यूबीटी), सीपीआई (एम) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एक-एक सदस्य के अलावा भाजपा के दो और समाजवादी पार्टी के एक और सदस्य को शामिल किया गया है।

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One Nation One Election - फोटो : Amar Ujala
बता दें कि समिति में शामिल होने के लिए प्रस्तावित नए लोकसभा सांसदों में भाजपा के बैजयंत पांडा और संजय जायसवाल, सपा के छोटेलाल, शिवसेना (यूबीटी) के अनिल देसाई, लोजपा की शांभवी और सीपीआई (एम) के के. राधाकृष्णन शामिल हैं।

समिति दो विधेयकों पर चर्चा करेगी, जिसमें 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' से जुड़े विधेयकों की समीक्षा शामिल है। इसके अलावा संविधान में संशोधन करने वाले विधेयक की भी समीक्षा की जाएगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और पीपी चौधरी के अलावा भाजपा से भर्तृहरि महताब और कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा भी पैनल के लिए प्रस्तावित लोकसभा सदस्यों में शामिल हैं। लोकसभा सदस्यों में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के 17 सदस्य हैं, जिनमें भाजपा के 12 सदस्य शामिल हैं।
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One Nation One Election - फोटो : Amar Ujala
क्यों बढाई गई सदस्यों की संख्या?
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे और कुछ अन्य दलों ने बताया था कि समिति में उनके किसी भी सदस्य को शामिल नहीं किया गया है। इस वजह से समिति में सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई है। हालांकि, समिति में सरकार सभी राजनीतिक दलों को शामिल करना चाहती थी। फिर भी नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी का काई भी सदस्य इसमें शामिल नहीं हैं। वहीं, राज्यसभा सदस्यों के नाम अभी तय नहीं किए गए हैं।

राज्यसभा के 12 सदस्यों को नामित किया गया
राज्यसभा ने शुक्रवार को देश में संसदीय और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले विधेयक और उससे संबंधित एक अन्य विधेयक पर विचार के लिए गठित की जाने वाली समिति में उच्च सदन के 12 सदस्यों को नामित करने के प्रस्ताव को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी। उच्च सदन से इस समिति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घनश्याम तिवाड़ी, भुनेश्वर कलिता, के. लक्ष्मण, कविता पाटीदार, जनता दल (यूनाइटेड) के संजय झा, कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला, और मुकुल वासनिक, तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले, द्रविड़ मुनेत्र कषगम के पी विल्सन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, बीजू जनता दल के मानस रंजन मंगराज और वाईएसआर कांग्रेस के वी विजय साई रेड्डी को शामिल किया गया है।

लोकसभा के 27 सदस्यों को किया गया नामित
इस समिति में लोकसभा से जिन 27 सदस्यों को शामिल किया गया उनमें भारतीय जनता पार्टी से पीपी चौधरी, सीएम रमेश, बांसुरी स्वराज, पुरुषोत्तम रुपाला, अनुराग ठाकुर, विष्णु दयाल शर्मा, भर्तृहरि महताब, संबित पात्रा, अनिल बलूनी, विष्णु दत्त शर्मा, बैयजंत पांडा और संजय जायसवाल शामिल हैं। कांग्रेस से प्रियंका गांधी वाद्रा, मनीष तिवारी और सुखदेव भगत को इस समिति का हिस्सा बनाया गया है। समाजवादी पार्टी से धर्मेंद्र यादव और छोटेलाल, तृणमूल कांग्रेस से कल्याण बनर्जी, द्रमुक से टी एम सेल्वागणपति, तेलुगु देशम पार्टी से हरीश बालयोगी, शिवसेना (उबाठा) से अनिल देसाई, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) से सुप्रिया सुले, शिवसेना से श्रीकांत शिंदे, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से शांभवी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के के. राधाकृष्णन, राष्ट्रीय लोक दल के चंदन चौहान और जन सेना पार्टी के बालाशौरी वल्लभनेनी को इस समिति में शामिल किया गया है।

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एक देश एक चुनाव विधेयक पेश कर सकती है सरकार - फोटो : एएनआई
ऐसे हुई शुरुआत
  1. प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले 2019 में 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक देश एक चुनाव के अपने विचार को आगे बढ़ाया था। 
  2. उन्होंने कहा था कि देश के एकीकरण की प्रक्रिया हमेशा चलती रहनी चाहिए। 2024 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी प्रधानमंत्री ने इस पर विचार रखा।
  3. कोविंद समिति ने इस वर्ष मार्च में अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी थी। 
  4. 'एक देश, एक चुनाव' पर बनी कोविंद समिति की रिपोर्ट को 18 सितंबर को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल गई थी।
  5. संसद के शीतकालीन सत्र के बीच 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' विधेयक को मंजूरी दे दी। 
  6. केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में इसे सदन में पेश किया।
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'एक देश एक चुनाव' पर पीएम मोदी की बैठक - फोटो : अमर उजाला
बजट सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक रिपोर्ट पेश करनी होगी
समिति को आगामी बजट सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। इन विधेयकों को गत 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था। सदन में मत विभाजन के बाद ‘संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024’ को पुर:स्थापित किया गया। विधेयक को पेश किए जाने के पक्ष में 263 वोट, जबकि विरोध में 198 वोट पड़े थे। इसके बाद मेघवाल ने ध्वनिमत से मिली सदन की सहमति के बाद ‘संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024’ को भी पेश किया था।

कोविंद समिति की अहम सिफारिशें
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक साथ चुनाव की सिफारिशें को दो चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ आयोजित किए जाएगे। दूसरे चरण में आम चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) किए जाएंगे। इसके तहत सभी चुनावों के लिए समान मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके लिए पूरे देश में विस्तृत चर्चा शुरू की जाएगी। वहीं एक कार्यान्वयन समूह का भी गठन किया जाएगा। माना जा रहा है कि 'एक देश एक चुनाव' के लिए संविधान में संशोधनों और नए सम्मिलनों की कुल संख्या 18 है।
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