टीम इंडिया के सफल कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली के 45 वें जन्मदिन के मौके पर चलिए जानते हैं 'दादा' की जिंदगी से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें।
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सौरव गांगुली
- फोटो : SELF
क्या आप जानते हैं सौरव गांगुली को भले ही टीम इंडिया में दादा के नाम से जाना जाता है, लेकिन बचपन में उनका उपनाम महाराजा था। गांगुली का बचपन रईसी में बिना अभाव के बीता।
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सौरव गांगुली
सौरव गांगुली अपने बड़े भाई स्नेहाशिष से प्रेरित थे। वह बंगाल क्रिकेट टीम का हिस्सा थे। लेकिन परिवार के समक्ष क्रिकेट को लेकर अपनी इच्छा बताना गांगुली के लिए बेहद मुश्किल था।
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सौरव गांगुली
- फोटो : ESPN
सौरव गांगुली का बाएं हाथ से बल्लेबाजी सीखने का भी एक राज है। इसके पीछे उनके बड़े भाई स्नेहाशिष ही है।
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सौरव गांगुली
गांगुली के बड़े भाई बाएं हाथ से खेलते थे। इसलिए क्रिकेट सीखने के लिए गांगुली ने भी बाएं हाथ से खेलना शुरू किया ताकि वह उनके क्रिकेट सामान को आसानी से प्रयोग में ला सके।
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सौरव गांगुली
- फोटो : Cricket Country
जैसे कि यह विदित ही है कि कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) फुटबॉल खेल के लिए जाना जाता है। लेकिन गांगुली में क्रिकेट को लेकर जुनून बचपन से ही था।
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सौरव गांगुली
- फोटो : getty
गांगुली की मां निरुपा खेल को करियर बनाने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थी। इसके अलावा गांगुली के पिता चंडीदास गांगुली भी क्रिकेट को पसंद नहीं करते थे। लेकिन बड़े भाई के मनाने पर दोनों मान गए।
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सौरव गांगुली
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2000 में मैच फिक्सिंग का आरोप लगने के बाद मोहम्मद अजहरुद्दीन के टीम से बेदखल होने के बाद सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर दोनों टीम इंडिया की कप्तानी में आमने-सामने थे।
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सौरव गांगुली
- फोटो : getty
लेकिन उस वक्त सचिन कंधे की चोट से जूझ रहे थे। इसलिए गांगुली को उपकप्तान से टीम इंडिया का कप्तान चुन लिया गया।
खुद की सिफारिश से पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्रैग चैपल को टीम इंडिया का कोच बनाना गांगुली के लिए महंगा पड़ा। जल्द ही दोनों के बीच आपसी मनमुटाव पैदा होने लगा। चैपल ने गांगुली के लिए बीसीसीआई को एक ई-मेल भेजा जिसमें गांगुली को शारिरिक और मानसिक रुप से अक्षम बताया। जिससे बाद में काफी बवाल भी हुआ।