इसरो ने देश के सातवें नेविगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1जी को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। इस लॉन्च के साथ ही अब भारत के पास खुद का जीपीएस नेविगेशन सिस्टम 'नाविक' (NAVIC) हो गया है जिसके बाद अब दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके जरिए मिलिट्री नेविगेशन में किसी अन्य देश की मदद नहीं लेनी पड़ेगी। आइए जानते हैं भारते के इस जीपीएस नेविगेशन सिस्टम 'नाविक' की 6 बातें-
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भारत के पास अब है खुद का जीपीएस सिस्टम, जानिए इसकी 6 खास बातें
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नेविगेशन सिस्टम का आखिरी सैटेलाइट हुआ लॉन्च
- फोटो : ANI
इस लॉन्च के साथ ही भारत के नेविगेशन सिस्टम में सात सेटेलाइट हो जाएंगे, जिससे नेविगेशन सिस्टम अच्छे से काम करेगा और किसी दूसरे देश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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इसे भारत और भारत के आस पास 1500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में रीयल टाइम पोजिशनिंग बताने के लिए डिजाइन किया गया है।
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यह सिस्टम काफी हद कर अमेरिका के जीपीएस (24 सेटेलाइट), रशिया के ग्लोनएस (24 सेटेलाइट), यूरोप के गैलिलियो (27 सेटेलाइट) और चीन के बीडोऊ (35 सेटेलाइट) की तरह ही है। मोदी ने कहा है कि दुनिया इसे नाविक (NAVIC) नाम से पहचानेगी। इसे तकनीकी भाषा में भी इसी नाम से जाना जाएगा।
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इस सिस्टम का इस्तेमाल नौसेना के नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, गाड़ियों की ट्रैकिंग, मोबाइल फोन के इंटिग्रेशन, मैप और जियोग्राफिकल डेटा, विजुअल और वॉयस नेविगेशन के लिए किया जाएगा।
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इससे पहले इस नेविगेशन सिस्टम में 6 सेटेलाइट लॉन्च किए जा चुके हैं। 10 मार्च को IRNSS-1F, 1 जुलाई 2013 को IRNSS-1B, 4 अप्रैल 2014 IRNSS-1C, 16 अक्टूबर 2014 को IRNSS-1C, 28 मार्च 2015 को IRNSS-1D और 20 जनवरी 2016 को IRNSS-1E लॉन्च हुई थीं।