सुप्रीम कोर्ट ने एक आदिवासी की हत्या मामले में आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर द्वारा एफआईआर निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह के भीतर इस नोटिस का जवाब देने को कहा है।
पुलिस ने नवंबर 2015 में सुकमा में एक आदिवासी शामनाथ बघेल की हत्या के मामले में उसकी पत्नी की शिकायत पर प्रोफेसर नंदिनी, जेएनयू प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, राजनीतिक कार्यकर्ता विनीत तिवारी और सीपीएम से जुड़े संजय पराटे समेत समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि करीब दो वर्ष पूर्व नंदिनी समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी लेकिन दो वर्ष में जांच के काम में कोई प्रगति नहीं हुई है। अब तक आरोपियों को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया है। ऐसे में आरोपियों के सिर पर एफआईआर का बोझ क्यों रहना चाहिए।
पीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार को तीन हफ्ते के भीतर यह बताने के लिए कहा है कि क्यों नहीं एफआईआर निरस्त कर दी जानी चाहिए। पीठ ने राज्य सरकार को हलफनामा दायर कर यह बताने के लिए कहा है कि आखिर दो वर्षों में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। साथ ही सरकार को यह बताने के लिए कहा गया है कि इस मामले में आगे की क्या योजना है?
वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इन सभी के खिलाफ जांच चल रही है और आगे भी जांच की जाएगी। दूसरी तरह नंदिनी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अशोक देसाई ने कहा यह झूठा मुकदमा है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए। अगली सुनवाई तीन हफ्ते के बाद होगी।