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‘कोरोना के हवा में फैलने’ वाले अध्ययन से घबराने की जरूरत नहीं, यहां समझें क्यों?

Thu, 09 Jul 2020 03:38 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘कोरोना के हवा में फैलने’ वाले अध्ययन से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। दरअसल, अध्ययन करने वाले 200 से ज्यादा वैज्ञानिक सिर्फ ये कहना चाहते थे कि यह हवा में सिर्फ कुछ समय तक रहता है। 
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कोरोना टेस्ट के लिए नमूना एकत्र करता एक स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI
इस अध्ययन का मतलब कतई यह नहीं है कि यह हवा में हर समय मौजूद रहता है और इससे हर किसी के संक्रमित होने का खतरा है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
सेंटर फॉर सेलुलर एंड मोलेकुलर बायोलॉजी-सीएसआईआर के निदेशक राकेश मिश्रा का कहना है कि लंबे समय तक मास्क पहनने के अलावा सोशल डिस्टेंसिंग जैसे अन्य एहतियाती उपाय कर वायरस से बचा जा सकता है। 

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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
हाल ही में 239 वैज्ञानिकों ने डब्ल्यूएचओ को पत्र लिखकर कहा था कि कोरोना वायरस हवा से फैलता है। मिश्रा ने कहा, यह दो शोध पेपर पर आधारित था। 
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTi
डब्ल्यूएचओ को कहा गया कि वायरस हवा में अस्थायी तौर पर रहता है यानी पांच माइक्रोन से छोटे ड्रॉपलेट में यह लंबे समय तक रह सकता है। इसका मतलब है कि जब हम बोलते हैं या सांस लेते हैं तो इतने छोटे ड्रॉपलेट निकलते हैं। 
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नई दिल्ली के निगम बोध घाट पर शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते पीपीई किट पहने स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI
अगर हम लंबे समय तक मास्क पहनते हैं और सामाजिक दूरी का पालन करते हैं तो इससे बच सकते हैं। फिलहाल मेरा मानना है कि लोगों को इस निष्कर्ष से घबराने की आवश्यकता नहीं है।
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