फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आ गई नेक्स्ट जनरेशन मार्क 3 EVM, जानिए इसके बारे में 10 बड़ी बातें

Thu, 26 Apr 2018 04:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 11
चुनाव आयोग ने बुधवार को थर्ड जनरेशन के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को पेश किया। चुनाव आयोग ने इस नई ईवीएम को मार्क 3 नाम दिया है। अगले महीने होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव इसी नेक्स्ट जनरेशन मार्क 3 ईवीएम से होने हैं। 

हालिया हुए विधानसभा चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे। विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम में छेड़छाड़ और हैकिंग की आशंका व्यक्त कर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। इन सबके मद्देनजर इस नई जनरेशन ईवीएम के बारे में जानना बहुत अहम है। 

क्या है मार्क थ्री ईवीएम की खासियतें आइए जानते हैं। 
विज्ञापन

2 of 11
चुनाव आयोग के का कहना है कि इस इसके चिप को सिर्फ एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है। चिप के सॉफ्टवेयर कोड को पढ़ा नहीं जा सकता और न ही दोबारा लिखा जा सकता है। 
विज्ञापन

3 of 11
- फोटो : ANI
चुनाव आयोग के मुताबिक ईवीएम को इंटरनेट या किसी भी नेटवर्क से कंट्रोल नहीं किया जा सकता है। 

4 of 11
आयोग का कहना है कि नई ईवीएम मशीन से छेड़छाड़ संभव नहीं है। अगर कोई मशीन या उसका एक स्क्रू भी खोलने की कोशिश करेगा तो ये बंद हो जाएगा। 
विज्ञापन

5 of 11
नई ईवीएम मशीन में 24 बैलेट यूनिट और 384 प्रत्याशियों की जानकारी रखी जा सकती है। 
विज्ञापन

6 of 11
जबकि इससे पहले वाले मार्क 2 ईवीएम में सिर्फ 4 बैलेट यूनिट और 64 प्रत्याशियों की जानकारी ही रखी जा सकती थी। 
विज्ञापन

7 of 11
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव आयोग ने बताया कि विदेश में बने किसी भी ईवीएम का इस्तेमाल भारत के चुनावों में नहीं होता। ईवीएम स्वदेशी तकनीक से भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियां भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बंगलूरु और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद में तैयार की जाती हैं। 

8 of 11
ईवीएम के सॉफ्टवेयर भी यहीं तैयार किए जाते हैं और फिर इन्हें मशीन कोड में बदला जाता है। इसके बाद ही इन्हें अमेरिका और जापान में चिप निर्माण करने वाली कंपनियों को दिया जाता है। 

9 of 11
EVM LOGO
ईवीएम बनाने का विचार सबसे पहले 1977 में आया था। फिर नवंबर 1998 में मध्य प्रदेश की पांच, राजस्थान की पांच और दिल्ली की छह विधानसभा क्षेत्रों के कुछ सेंटर में इसका उपयोग किया गया। 

10 of 11
गौरतलब है कि पहली पीढ़ी के ईवीएम मार्क 1 का निर्माण 1989 से 2006 तक हुआ और इनका इस्तेमाल 2014 के आम चुनावों तक हुआ था। 
विज्ञापन

11 of 11
वहीं दूसरी पीढ़ी के ईवीएम मार्क 2 का निर्माण 2006 से 2012 तक हुआ। इनमें रियल टाइम क्लॉक और डायनेमिक कोडिंग जैसी विशेषताएं हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें