थाईलैंड गुफ में फंसे 12 बच्चे और उनके एक कोच को सही सलामत निकाल लिया गया है। लेकन अब थाईलैंड सेना ने इस ऑपरेशन के दौरान की तस्वीरें और वीडियो शेयर की हैं। थाईलैंड सेना ने यह तस्वीरें अपने फेसबुक पेज पर साझा की हैं। इनमें दिखाया गया है कि कैसे इस मुश्किल ऑपेशन को अंजाम दिया गया है।
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Thailand Cave
ये तस्वीरें इस बात की गवाह हैं कि कैसे थाईलैंड की सेना ने इन 12 बच्चों को बचाया। और अपनी बहादुरी का परिणाम दिया।
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यह नए फुटेज थाईलैंड की गुफा में फंसे फुटबॉल टीम के बच्चों को दिखाते हैं। इन बच्चों ने भी बुरे समय में संयम रखा और अपने सहयोगियों के साथ एक दूसरे का हौसला बांधे रखा।
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यही नहीं थाई सेना ने अपने इस ऑफरेशन की वीडिया भी साझा की हैं। जिसमें थाई सैनिक इस ऑपरेशन को सफल बनाने की तैयारी करते दिख रहे हैं। और कठिन परिस्थितियों में वह बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बना रहे हैं।
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बता दें कि इस ऑपरेशन को अकेले थाई सेना ने ही नहीं बल्कि भारत सहित कई अन्य देशों की मदद के बाद इस ऑपरेशन को सफल बनाया गया है। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद थाईलैंड के पीएम ने भारत का शुक्रिया भी किया है।
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थाई नेवी ने अपने फेसबुक पेज पर अपनी सेना के साथ साथ अन्य देशों से आए लोगों के भी फोटो साझा किये हैं। जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। वह रस्सी, रबर, पाइपिंग का उपयोग करते दिख रहे हैं।
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थाई अधिकारियों ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकलने के बाद अस्पताल पहुंचाया। जिसके बाद बच्चों की अस्पताल वाली तस्वीर भी सामने आयी। जब बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया तो उन्हें बहुत भूख लगी थी क्योंकि उन्होंने काफी दिन से कुछ नहीं खाया था। लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें अभी सिर्फ तरल पदार्थ ही खाने की इजाजत दी है।
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बता दें कि थाईलैंड की थाम लुआंग गुफा से बच्चों को सुरक्षित निकालना बड़ी मिसाल है। हफ्ते भर तो अधिकारियों को यह समझने में लग गए कि उन्हें निकालें कैसे। चार किमी लंबी गुफा में ऊपर से ड्रिल से छेद करने और चार महीने तक मानसून खत्म होने जैसी बातों पर विचार किया गया।
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जोखिम के हर पहलू को इसलिए आंका गया क्योंकि अभियान में जरा सी चूक भारी पड़ सकती है और कोई अनहोनी घट सकती थी। ऐसा होता तो थाईलैंड की नौसेना न सिर्फ बच्चों के परिवारों के निशाने पर होती, बल्कि उसके अभियान सवाल उठ जाते क्योंकि अभियान पर पूरी दुनिया की नजर थी।
बचाव प्रमुख ने असंभव से लगने वाले मिशन को पूरा करने की ठान ली। हालांकि तब भी गुफा में खतरनाक स्तर तक गिरता ऑक्सीजन का स्तर और बारिश के कारण पानी बच्चों तक पहुंचने के खतरे लगातार बने हुए थे। इसके बाद गोताखोरों की मदद से बच्चों को बाहर निकालने का फैसला हुआ। यह रास्ता प्रशिक्षित गोताखोरों के लिए भी चुनौतीपूर्ण था।