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Drugs: दूसरे मुल्कों तक खतरनाक ड्रग भेजने वाली लैब, कारोबारी, केमिस्ट और तिहाड़ जेल वार्डन का कारनामा

सार

एनसीबी के डीडीजी ज्ञानेश्वर सिंह 'आईपीएस' के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ मिलकर एनसीबी की ऑप्स यूनिट ने एक संयुक्त अभियान में दिल्ली एनसीआर में एक गुप्त मेथामफेटामाइन निर्माण प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। इस लैब से कई देशों में ड्रग्स निर्यात की जा रही थी।
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ड्रग माफिया का दुस्साहस - फोटो : अमर उजाला
इसे ड्रग माफिया का दुस्साहस ही कहा जाएगा कि दिल्ली एनसीआर में विभिन्न जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी के बीच मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग तैयार करने के लिए लैब स्थापित कर दी गई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने गौतम बुद्ध नगर में स्थित इस लैब पर छापेमारी की थी। ब्यूरो को खतरनाक ड्रग्स तैयार करने वाली इस लैब के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी। यह भी मालूम हुआ कि यहां से भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भेजने के लिए भी सिंथेटिक दवाएं तैयार की जा रही हैं। 

इस छापेमारी में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी एनसीबी के साथ रही है। छापेमारी के दौरान लैब से ठोस और तरल, दोनों ही रूपों लगभग 95 किलोग्राम मेथामफेटामाइन के साथ-साथ दूसरे रसायन और ड्रग्स तैयार करने वाली मशीनरी बरामद भी की गई है। इस मामले में दिल्ली के एक व्यापारी और तिहाड़ जेल के कर्मचारी को गिरफ्तार किया गया है। बताया जाता है कि लैब के संचालन में इन दोनों लोगों की अहम भूमिका है। 

एनसीबी के मुताबिक, मुंबई के एक केमिस्ट की मदद से ड्रग्स तैयार की जाती थी। मेथामफेटामाइन लैब से 95 किलोग्राम ड्रग्स जब्त हुई है। एनसीबी के डीडीजी ज्ञानेश्वर सिंह 'आईपीएस' के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ मिलकर एनसीबी की ऑप्स यूनिट ने एक संयुक्त अभियान में दिल्ली एनसीआर में एक गुप्त मेथामफेटामाइन निर्माण प्रयोगशाला का भंडाफोड़ किया है। इस लैब से कई देशों में ड्रग्स निर्यात की जा रही थी। प्रयोगशाला में मैक्सिकन सीजेएनजी ड्रग कार्टेल (कार्टेल डी जलिस्को नुएवा जेनरेशन) के सदस्य भी शामिल रहे हैं। एनसीबी ने 25 अक्टूबर जिला गौतमबुद्ध नगर के कसाना औद्योगिक क्षेत्र में जब तलाशी अभियान चलाया तो यह लैब सामने आई थी। इस लैब में ठोस और तरल रूप में लगभग 95 किलोग्राम मेथामफेटामाइन पाया है। 
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ड्रग माफिया का दुस्साहस - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानेश्वर सिंह के अनुसार, लैब में एसीटोन, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, मेथिलीन क्लोराइड, प्रीमियम ग्रेड इथेनॉल, टोल्यूनि, रेड फॉस्फोरस, एथिल एसीटेट आदि जैसे रसायन और विनिर्माण के लिए आयातित मशीनरी भी पाई गई है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस ऑपरेशन में हिस्सा लिया, क्योंकि ड्रग नेटवर्क के निशान दिल्ली एनसीआर में कई जगहों पर बताए गए थे। प्रारंभिक जांच के दौरान यह पता चला है कि दिल्ली स्थित एक व्यवसायी, जो छापे के समय तिहाड़ जेल वार्डन के साथ कारखाने के अंदर पाया गया था, ने अवैध कारखाने की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विभिन्न स्रोतों से मेथमफेटामाइन के निर्माण के लिए आवश्यक रसायनों की खरीद की गई थी। इन लोगों ने ही मशीनरी का आयात किया था। उक्त व्यवसायी को पहले राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) द्वारा एनडीपीएस मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसे तिहाड़ जेल में रखा गया था। वहीं पर उसकी मुलाकात जेल वार्डन से हुई। बाद में वह जेल वार्डन भी उसका साथी बन गया। दवा के निर्माण के लिए उनके द्वारा मुंबई स्थित एक रसायनज्ञ को अपनी टीम में शामिल किया गया। दवा की गुणवत्ता का परीक्षण दिल्ली में रहने वाले मैक्सिकन कार्टेल के एक सदस्य द्वारा किया गया था।
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ड्रग माफिया का दुस्साहस - फोटो : अमर उजाला
एनसीबी ने चारों व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों को 27 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सभी आरोपियों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अनुवर्ती कार्रवाई में सिंडिकेट के एक महत्वपूर्ण सदस्य और दिल्ली स्थित व्यवसायी के करीबी सहयोगी को दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके से पकड़ा गया है। उसे संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा। अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के माध्यम से अभियुक्तों द्वारा उत्पन्न उनके आगे और पीछे के संबंधों, वित्तीय निशान और संपत्तियों का पता लगाया जा रहा है। इस साल एनसीबी ने गुजरात के गांधीनगर और अमरेली, राजस्थान के जोधपुर और सिरोही और मध्य प्रदेश के भोपाल में पांच स्थानों पर ऐसी गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। इस महीने की शुरुआत में, भोपाल के बगरोदा इंडस्ट्रियल एस्टेट में गुजरात एटीएस के साथ एक संयुक्त अभियान में एक गुप्त लैब का भंडाफोड़ किया गया था, जिसमें ठोस और तरल रूप में लगभग 907 किलोग्राम मेफेड्रोन, मशीनरी के साथ लगभग 7000 किलो विभिन्न रसायन जब्त किए गए थे।
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ड्रग माफिया का दुस्साहस - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानेश्वर सिंह के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि मेथामफेटामाइन और मेफेड्रोन जैसी सिंथेटिक दवाओं के उत्पादन की कम लागत को देखते हुए, ड्रग माफिया तेजी से औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी गुप्त प्रयोगशालाएं स्थापित करने की ओर बढ़ रहे हैं। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि ताकि स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां को शक न हो। इस तरह के कारखानों में मशीनरी, प्रयोगशालाओं से उत्पन्न अपशिष्ट और रासायनिक प्रसंस्करण के दौरान चिमनी से निकलने वाला जहरीला धुआं, बहुत खतरनाक होता है। सिंथेटिक दवाओं के निर्माण और तस्करी की इस प्रवृत्ति के बारे में स्थानीय पुलिस को संवेदनशील बनाने और गुप्त प्रयोगशालाओं का पता लगाने की उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए, एनसीबी लगातार देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस महीने की शुरुआत में, यूएसए की ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी (डीईए) के सहयोग से अहमदाबाद में 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था
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