ड्रग माफिया का दुस्साहस
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ज्ञानेश्वर सिंह के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि मेथामफेटामाइन और मेफेड्रोन जैसी सिंथेटिक दवाओं के उत्पादन की कम लागत को देखते हुए, ड्रग माफिया तेजी से औद्योगिक क्षेत्रों में ऐसी गुप्त प्रयोगशालाएं स्थापित करने की ओर बढ़ रहे हैं। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि ताकि स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां को शक न हो। इस तरह के कारखानों में मशीनरी, प्रयोगशालाओं से उत्पन्न अपशिष्ट और रासायनिक प्रसंस्करण के दौरान चिमनी से निकलने वाला जहरीला धुआं, बहुत खतरनाक होता है। सिंथेटिक दवाओं के निर्माण और तस्करी की इस प्रवृत्ति के बारे में स्थानीय पुलिस को संवेदनशील बनाने और गुप्त प्रयोगशालाओं का पता लगाने की उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए, एनसीबी लगातार देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इस महीने की शुरुआत में, यूएसए की ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी (डीईए) के सहयोग से अहमदाबाद में 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था