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मदर टेरेसा की पुण्यतिथि आज, जानें उनके जीवन से जुड़ी अहम बातें

Mon, 05 Sep 2016 06:05 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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मदर टेरेसा - फोटो : Getty Images
शिक्षा को पेशे के दायरे से हटकर देखा जाए, तो सीखने की शुरुआत घर से होती है। मदर टेरेसा ने कोलकाता को अपना घर बनाया और 68 साल तक गरीबों और लाचार वर्ग की सेवा कर दुनिया को मानवता की शिक्षा दी। उनकी स्थापित की हुई संस्था, मिशनरीज ऑफ चैरिटी दुनिया के 123 देशों में 4500 सिस्टर के जरिए लोगों की सेवा निरंतर जारी रखे हुए है। 

1910 में मैसेडोनिया के कोसोवर में जन्मीं टेरेसा ने 1950 में कोलकाता का रुख किया। यहां आने से पहले वह ऑटोमन, सर्बिया, बुल्गेरिया और युगोस्लाविया की नागरिक रह चुकी थीं। भारत उनका पांचवां और सबसे पसंदीदा घर बना। 
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- फोटो : Getty Images
उन्होंने नन के पारंपरिक परिधानों से इतर नीले बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनकर खुद को लोगों से जोड़ा। वह भारतीय जनमानस की नब्ज को जानती थीं। समझती थीं कि कोलकाता भी उन्हें तभी अपनाएगा, जब वह इसे अपनाएंगी। टेरेसा की संस्था ने यहां कई आश्रम, गरीबों के लिए रसोई, स्कूल, कुष्ठ रोगियों के लिए बस्ती, अनाथों के लिए घर आदि बनवाए। उनके आलोचक भी कम नहीं थे।

गंदी बस्तियों में सेवा करने के कारण पश्चिमी जनमानस ने उन्हें ‘गटर की संत’ तक कहा था, लेकिन वह कहतीं थीं कि जख्म भरने वाले हाथ प्रार्थना करने वाले होंठ से कहीं पवित्र होते हैं। दुनिया का सर्वोच्च सम्मान नोबेल शांति पुरस्कार, भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न और दुनिया के ढेरों अवॉर्ड पाकर भी 1997 में उन्होंने कोलकाता में ही आखिरी सांस ली।
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- फोटो : Getty Images
1979 में जब टेरेसा नोबेल का शांति पुरस्कार लेकर देश लौटी थीं, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने कहा था आजतक आप भारत की मां थीं और अब पूरी दुनिया की मां बन गई हैं, जो आपसे जिंदगी जीने की शिक्षा लेगी। अब वेटिकन सिटी उन्हें संत की उपाधि देने जा रही है। 

दुनिया भर से अति विशिष्ट एक लाख लोग इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे। पूरा रोम शहर मदर टेरेसा के पोस्टरों से पटा है, जिन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो आप रोम नहीं कोलकाता में हों। फोटोग्राफर कौंतेय सिन्हा की तस्वीरें रोम में कोलकाता शहर, उसमें मदर टेरेसा और उनके जीवन को प्रस्तुत करती हैं।

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- फोटो : Getty Images
मदर टेरेसा का व्यक्तित्व इतना प्रभावी था कि पोप जॉन पॉल द्वितीय भी उनके मुरीद थे। वैसे वह उनके अच्छे दोस्त भी थे। टेरेसा की मौत के बाद उन्हें संत घोषित करने की प्रक्रिया को पोप ने तेजी से पूरा करवाया। वेटिकन की नजर में संत की उपाधि उसे ही दी जाती है, जिसके दो चमत्कारों की पुष्टि हो जाए।

 
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- फोटो : Getty Images
टेरेसा की मौत के पांच साल बाद उनका पहला चमत्कार स्वीकार किया गया था। एक बंगाली आदिवासी महिला मोनिका बेसरा के पेट का अल्सर तब ठीक होने का दावा किया गया, जब उसके पेट पर टेरेसा की तस्वीर रखी गई। 

इसके बाद ब्राजील के एक व्यक्ति ने अपनी दिमागी बीमारी के टेरेसा के चमत्कार से ठीक होने की बात स्वीकार की। आखिरकार पोप फ्रांसिस ने टेरेसा को संत की उपाधि देने का निर्णय लिया।
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