महाशिवरात्रि पर काशी विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन के आगे किसी की हनक नहीं चली। न किसी की पैरवी काम आई न रसूख। पहली बार मंदिर प्रशासन ने सबके लिए समान नियम बनाया। मंगला आरती में इसकी बनागी साफ दिखी। चाहे विशिष्ट हों या अतिविशिष्ट, बिना टिकट लिए कोई भी मंगला आरती में प्रवेश नहीं कर सका। डीजी (सुरक्षा) गोपाल गुप्ता भी टिकट लेकर आरती में शामिल हुए।
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काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मंगला आरती में पहली बार महाशिवरात्रि पर बडे़ ओहदेदारों को मंगला आरती के लिए टिकट कटाना पड़ा। इतना ही नहीं, उच्चाधिकारियों की उनके हिसाब से टिकट की मांग भी पूरी नहीं हो सकी। आईजी एसके भगत को 10 टिकट मिले। वह सपत्नीक मंगला आरती के दर्शन के लिए पहुंचे थे।
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इसी तरह मंडलायुक्त/मुख्य कार्यपालक समिति के सभापति नितिन रमेश गोकर्ण ने भी पत्नी शीला गोकर्ण के साथ मंगला आरती के दर्शन किए। उन्होंने कुल पांच टिकट लिए थे। डीएम राजमणि यादव के अलावा एसएसपी आकाश कुलहरी और मुख्य कार्यपालक अधिकारी एमपी सिंह के भी नाम से टिकट जारी किए गए।
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कई अफसरों को तो मंगला आरती के दौरान गर्भगृह के दरवाजों पर बैठने की जगह नहीं मिली। कोई बरामदे में तो कोई बैकुंठ नाथ के दरबार में बाबा के ध्यान में मग्न नजर आया। जाने माने कथा मर्मज्ञ संत रमेश भाई ओझा और उनके साथ आए लोगों को भी टिकट जारी किया गया था। सूबे के पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्र और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री कृपाशंकर सिंह ने भी आरती का टिकट लिया था।
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मंगला आरती के दौरान उत्तरी द्वार पर मंडलायुक्त थे तो दक्षिणी द्वार पर डीजी सुरक्षा और सीआरपीएफ के अफसर के अलावा अन्य लोग। पश्चिमी द्वार पर डीआईजी और विश्वनाथ मंदिर के सीईओ थे और पूर्वी द्वार पर आईजी जोन। इस दौरान मंदिर परिसर में करीब पांच सौ से अधिक भक्त थे। हालांकि 325 टिकट ही जारी किए गए थे लेकिन बाद में अफसरों और राजनेताओं के आग्रह पर मंदिर प्रशासन ने अपने विशेषाधिकार से और टिकट जारी किए।
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महाशिवरात्रि पर सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी की सड़कों पर आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। विश्वनाथ मंदिर जाने वाले मार्गों पर आधी रात से ही लंबी कतारें लग गईं। हर हर महादेव और बोल बम के जयकारे के साथ श्रद्धालु नंगे पांव बाबा दरबार की ओर बढ़े। किसी को पांच घंटे तो किसी को आठ घंटे कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
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इस दौरान कतार के बीच दर्शनार्थियों को घुसाए जाने को लेकर जगह-जगह नोकझोंक भी हुई। पास निरस्त होने और सुरक्षा इंतजाम चुस्त होने की वजह से वीआईपी के नाम पर किसी की नहीं चली। पंडे, पुजारी और पुलिस के जवान भी अपने परिवारीजनों, चहेतों को मंदिर में प्रवेश नहीं करा सके। शाम पांच बजे तक दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया।
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बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए देश के कोने-कोने से उमड़े भक्त रविवार की रात 11 बजे से ही छत्ताद्वार पर कतारबद्ध होने लगे। मंगला आरती के बाद भोर में चार बजे आम भक्तों के लिए मंदिर का पट खोला गया, तब गगनभेदी जयकारे के साथ श्रद्धालु स्वर्ण शिखरों वाले बाबा के मुक्तांगन की ओर बढ़े और जलाभिषेक शुरू हुआ।
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सुबह छह बजे तक करीब तीन किलोमीटर लंबी लाइन शहर की सड़कों पर लग गई। लक्सा थाने के पास से भक्तों की कतार दशाश्वमेध होते हुए दोबारा गिरजाघर से घुमाकर गोदौलिया-बांसफाटक से छत्ताद्वार तक लगाई गई। उधर, बुलानाला से दूसरी कतार छत्ताद्वार के लिए लगी। इस दौरान इन सड़कों पर दो पहिया वाहनों के अलावा रिक्शा, साइकल तक का आवागमन रोक दिया गया। गलियों को भी बैरियर लगाकर बंद कर दिया गया था।
इस वजह से मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर वाहनों की आवाजाही बिल्कुल ठप रही। दोपहर भोग आरती के समय दिन के 11:30 बजे तक एक लाख भक्तों ने बाबा का जलाभिषेक किया। इस दौरान छत्ताद्वार पर पुलिस क्षेत्राधिकारी स्तर के अफसरों की ड्यूटी लगाई गई थी। शार्टकट दर्शन के लिए छत्ताद्वार पहुंचे दरोगा और इंस्पेक्टर भी वापस कर दिए गए। शाम को पांच बजे कोतवालपुरा से ढुंढिराज प्वाइंट होते हुए वीआईपी दर्शन की छूट दी गई।