फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेजर शैतान सिंह जयंती: चीनी सेना को चटाई थी धूल, जानें उनके साहस और शौर्य की कहानी

Tue, 01 Dec 2020 09:19 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
मेजर शैतान सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
भारतीय सेना के दिवंगत मेजर शैतान सिंह की आज जयंती है। उन्होंने 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध में अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना के 120 जवानों ने चीन के पांच-छह हजार सैनिकों को धूल चटाई थी। इस युद्ध में मेजर सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए, लेकिन चीन को उन्होंने जो सबक सिखाया उसे आज तक याद किया जाता है। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया था।
विज्ञापन

2 of 7
चीनी सेना पर नजर बनाए हुए भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
मेजर शैतान सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1924 को राजस्थान के जोधपुर जिले के बंसार गांव के एक राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट कर्नल हेम सिंह थे जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस में भारतीय सेना में सेवा दी थी। इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर (ओबीई) से सम्मानित किया था। वहीं मेजर शैतान सिंह एक अगस्त 1949 को अधिकारी के तौर पर जोधपुर राज्य बल में शामिल हुए थे।
विज्ञापन

3 of 7
सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
साल 1962 में नवंबर महीने के 18वें दिन, देश में दिवाली की धूम थी वहीं लद्दाख की बर्फ से ढकी चुशुल घाटी इतिहास रचने जा रही थी और इस बात की भनक किसी को लगी नहीं थी। तड़के साढ़े तीन बजे शांत घाटी में गोलियों की गंध घुलनी शुरू हो गई थी।

4 of 7
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गोलीबारी - फोटो : Social Media
पांच से छह हजार की संख्या में चीनी जवानों ने लद्दाख पर हमला कर दिया था। इस दौरान सीमा पर मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व वाली टुकड़ी देश की सीमा की सुरक्षा कर रही थी। इस टुकड़ी में केवल 120 जवान थे। लेकिन मुट्ठीभर जवान चीन को ऐसा सबक सिखाएंगे, इस बात की कल्पना तो दुनिया ने नहीं की थी। जवानों ने किस अंदाज में यह जंग लड़ी थी उसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि 120 सैनिकों ने चीन के करीब 1300 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था।
विज्ञापन

5 of 7
अस्थाई कैंप बनाकर इलाके की रक्षा करते भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
इस टुकड़ी के पास न तो आधुनिक हथियार थे और न ही तकनीक। हथियार के नाम पर इनके पास थी सिर्फ वीरता। जिसका लोहा बाद में पूरी दुनिया ने माना। 120 जवानों की इस टुकड़ी का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह कर रहे थे। कहा जाता है कि गिन पाना मुश्किल था कि शैतान सिंह ने अकेले ही कितने चीनी सैनिकों को मार डाला था। इतना ही नहीं वो अपने साथियों को लगातार प्रोत्साहित कर रहे थे। इसी बीच उन्हें कई गोलियां लगीं।
विज्ञापन

6 of 7
पहाड़ी इलाकों में गश्त करती भारतीय सेना - फोटो : Social Media
दो सैनिक उन्हें उठाकर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे तभी एक चीनी सैनिक ने आकर मशीनगन से उन पर हमला कर दिया। जब शैतान सिंह पर हमला हुआ तो उन्होंने अपने साथी सैनिकों को पीछे हटने का आदेश दिया और खुद मशीनगन के सामने आ गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
चीनी सैनिकों के समाने खड़े भारतीय सैनिक - फोटो : Social Media
इसके बाद सैनिकों ने शैतान सिंह को एक बड़े पत्थर के पीछे छुपा दिया। जब युद्ध खत्म हुआ तो उसी पत्थर के पीछे शैतान सिंह का शव मिला। उन्होंने अपने हाथों से मजबूत तरीके से बंदूक पकड़ रखी थी। टुकड़ी में 120 जवान और सामने दुश्मनों की फौज, बावजूद इसके मेजर के कुशल नेतृत्व के बूते 18 नवंबर 1962 का दिन इतिहास के अमर पन्नों में दर्ज हो गया। मेजर को उनके शौर्य के चलते परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें