फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

Tue, 08 Nov 2016 04:03 PM IST
बीबीसी
विज्ञापन
1 of 12
मई में नरेंद्र मोदी की कनु गांधी से फोन पर बात कराते संस्कृति मंत्री महेश शर्मा
महात्मा गांधी की जितनी बेहतरीन तस्वीरें आपनी देखी होंगी, उनके पीछे जो शख्स थे, वो अब इस दुनिया में नहीं रहे। गांधी के पौत्र, बेहतरीन फोटोग्राफर और नासा के पूर्व वैज्ञानिक कनु रामदास गांधी का सोमवार शाम निधन हो गया। लंबे वक़्त से बीमार चल रहे कनु 87 बरस के थे। कनु का जन्म साल 1917 में महात्मा गांधी के भतीजे नारायण गांधी और जमुना गांधी के यहां हुआ था। कनु जब छोटे थे, तो उनकी वो तस्वीर बेहद मशहूर हुई, जिसमें वो दांडी मार्च के दौरान महात्मा गांधी की लाठी पकड़े हुए आगे-आगे चल रहे हैं।

अक्टूबर में उन्हें दिल का दौरा पड़ा और ब्रेन हैमरेज भी हुआ, जिसकी वजह से वो कोमा में चले गए थे। महात्मा गांधी के सेक्रेटरी के तौर पर काफी साल काम करने वाले कनु ने उनकी 2,000 से ज्यादा तस्वीरें ली थीं। हालांकि, इनमें से कई तस्वीरें सालों तक गुमनाम रहीं। कई दशक पहले भारत में अमरीका के तत्कालीन राजदूत जॉन केनेथ गलब्रेथ, कनु को पढ़ाई के लिए अमरीका के एमआईटी ले गए।
बाद में उन्होंने नासा के लिए भी काम किया।

महात्मा गांधी की वो बेहद खास तस्वीरें, जो कनु ने खींची:
विज्ञापन

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

2 of 12
ये तस्वीर 1938 की है। महात्मा गांधी महाराष्ट्र में सेवाग्राम आश्रम में। (फोटोः कनु गांधी)
कनु गांधी को उनके माता-पिता ने 20 साल की उम्र में गांधी की मदद करने को सेवाग्राम भेज दिया था। वो मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते थे लेकिन फिर उन्हें फोटोग्राफी में दिलचस्पी पैदा हो गई।

 
विज्ञापन

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

3 of 12
साल 1945 में मुंबई का बिरला हाउस। गांधी अपना वज़न जांचते हुए। (फोटोः कनु गांधी)
कनु, मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते थे लेकिन फिर उन्हें फोटोग्राफी में दिलचस्पी पैदा हो गई।

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

4 of 12
साल 1940, सेवाग्राम में कड़ी धूप से बचने के लिए सिर पर तकिया रखे गांधी। (फोटोः कनु गांधी)
कनु गांधी आमतौर पर महात्मा गांधी के आस पास ही रहते थे। ऐसे में कई ऐसे अंतरंग और एकांत के पल उनके कैमरे में कैद हो गए।
विज्ञापन

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

5 of 12
अक्टूबर 1938 में सड़क पर फंसी गांधी की गाड़ी को धक्का देते पठान और कांग्रेस कार्यकर्ता। (फोटोः कनु गांधी)
उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में एक बार गांधी की गाड़ी कुछ ऐसे ही फंस गई थी। कनु गांधी ने महात्मा गांधी के साथ देश-दुनिया जगह जगह यात्राएं की।
विज्ञापन

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

6 of 12
नवंबर 1938 में अबोटाबाद में महात्मा गांधी और कस्तूरबा। (फोटोः कनु गांधी)
गांधी के जीवन के अंतिम दशक में कई अहम घटनाएं और क्षण गुजरे। कनु की तस्वीरों में उन सबकी कहानी कैद है।
विज्ञापन

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

7 of 12
मार्च 1939 में तीन दिनों के उपवास के दौरान गुजरात के राजकोट में गांधी। (फोटोः कनु गांधी)
तीन दिनों के उपवास के दौरान गांधी की मालिश करती हुई उनकी बड़ी बहन रालियातबेन और एक रिश्तेदार।

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

8 of 12
सेवाग्राम में एक ईसाई और दलित लड़की के विवाह के दौरान गांधी और कस्तूरबा। (फोटोः कनु गांधी)
ये तस्वीर साल 1940 की है।

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

9 of 12
संजीव सेठ के अनुसार कस्तूरबा गांधी के जीवन के अंतिम महीनों की तस्वीर।
साल 1944 में पुणे के आगा़ खा पैलेस के एक बिस्तर पर कस्तूरबा गांधी अचेत अवस्था में लेटी हुई हैं।

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

10 of 12
गांधी आजादी के एक अहम नायक सुभाष चंद्र बोस के साथ। (फोटोः कनु गांधी)
1938 की एक ऐतिहासिक तस्वीर जिसमें महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करते हुए। पीछे कस्तूरबा दिखाई दे रही हैं।

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

11 of 12
नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्रनाथ टैगार के साथ गांधी पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में। (फोटोः कनु गांधी)
1940 में खिंची गई इस तस्वीर में गांधी और टैगोर चिंतन-मनन करते दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन

गांधी की लाठी थामने वाला चला गया...

12 of 12
बंगाल, असम और दक्षिणी भारत की रेल यात्रा के दौरान हाथ फैलाकर दान जुटाते गांधी। (फोटोः कनु गांधी)
महात्मा गांधी भारत में दलितों की मौजूदा दशा के प्रति खासे चिंतित रहा करते थे। उन्होंने 1945-46 के दौरान तीन महीने लंबी रेल यात्रा की और जगह-जगह जाकर धन जुटाया था। इसी संदर्भ में उन्होंने एक बार कहा था, "मैं बनिया हूं। मेरे लोभ का कोई अंत नहीं है।"
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें