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सियासी उपवास से याद आए वो बड़े अनशन, जिसमें दांव पर लगी जिंदगी

Thu, 12 Apr 2018 05:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अनशन कर विरोध जताने का तरीका नया नहीं है। आज भाजपा और इससे पहले कांग्रेस का अनशन मात्र एक दिन का है। लेकिन उनके बारे में भी जान लीजिए, जिन्होंने अपनी जान दांव पर रख अनशन किया क्योंकि ये सभी भाव दिखाने के लिए नहीं बल्कि परिवर्तन चाहते थे।   

इरोम चानू शर्मिला, अनशन- 16 साल

इन्हें आयरन लेडी या मेंगुओबी भी कहा जाता है। मणिपुर की नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम ने AFSPA हटाने की मांग को लेकर साल 2000 में 5 नवंबर को भूख हड़ताल शुरू की थी और 16 साल बाद साल 2016 में 9 अगस्त को खत्म हुई।
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जतिन दास, अनशन- 63 दिन

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साल 1929 में 13 जुलाई को लाहौर जेल के भीतर एक ऐसी भूख हड़ताल शुरू हुई जिसकी गूंज आज भी सुनाई देती है। जतिन दास ने भारत के राजनीतिक कैदियों के साथ भी यूरोपीय कैदियों की तरह व्यवहार करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की।
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पोट्टि श्रीरामुलु, अनशन- 58 दिन

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पोट्टि श्रीरामुलु भारतीय क्रांतिकारी हैं, जिन्होंने साल 1952 में 58 दिन भूख हड़ताल के बाद दम तोड़ दिया था। वो अलग राज्य की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर बैठे थे। श्रीरामुलु को अमरजीवी भी कहा जाता है। वो खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और मजदूर कहा करते थे। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ भी लंबा वक्त गुजारा।

सुंदरलाल बहुगुणा, अनशन- 74 दिन

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कई दशकों से टिहरी बांध विरोधी प्रदर्शनों के लिए मशहूर रहे सुंदरलाल बहुगुणा अपने सत्याग्रह से कई बार सरकारों और संसद के लिए मुश्किल पैदा कर चुके हैं। उन्होंने कई बार विरोध जताने के लिए भागीरथी के किनारे भूख हड़ताल की हैं। इसके बाद उन्होंने राजघाट पर 74 दिन लंबा उपवास भी रखा।
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वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली, अनशन- 80 दिनों से ज्यादा

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टिहरी राजशाही को जड़ से उखाड़ने की खातिर वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली भी अनशन पर बैठे थे। उनका ये अनशन 80 दिनों से ज्यादा चला था। 
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महात्मा गांधी, अनशन- 21 दिन

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Hunger Strike
मोहनदास करमचंद गांधी अहिंसा और सत्याग्रह के तहत कई बार उपवास किया करते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में क़रीब 15 उपवास किए, जिनमें से तीन बार इनकी मियाद 21 दिन रही। पहली बार 21 दिन का उपवास उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए किया था जो दिल्ली में साल 1924 में 18 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चला।
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बॉबी सैंड्स, अनशन- 66 दिन

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बॉबी जेरार्ड सैंड्स प्रॉविज़नल आइरिश रिपब्लिकन आर्मी का सदस्य थे जिन्होंने भूख हड़ताल करते हुए अपनी जान दे दी। उनकी अगुवाई में साल 1981 में अनशन किया गया था और विरोध था स्पेशल कैटेगरी का दर्जा हटाने का।
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