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भाजपा के ये दिग्गज नेता 75 पार, कुछ ने किया चुनाव लड़ने से इनकार, कुछ हुए दरकिनार

Sat, 06 Apr 2019 07:42 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा चुनाव 2019
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए इस बार का घमासान महासंग्राम में तब्दील हो गया है। नेताओं की रैलियां, बयानबाजी और चुनावी मैदान में खम ठोने वाले नेताओं का अंदाज देखने लायक है। हर पार्टी नई-नई रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। भारतीय जनता पार्टी ने इस बार उम्रदराज नेताओं को चुनाव मैदान से दूर कर दिया है। कई दशक से चुनाव लड़ रहे बड़े नेता इस बार चुनावी घमासान से दूर रहेंगे। ऐसे ही कुछ दिग्गज नेताओं पर डालते हैं नजर। 
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लालकृष्ण आडवाणी (फाइल फोटो)
लालकृष्ण आडवाणी 

छह बार गुजरात के गांधीनगर से सांसद रहे भाजपा के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता लालकृष्ण आडवाणी इस बार यहां से चुनाव लड़ते नहीं दिखेंगे। वर्षों से गांधीनगर आडवाणी की परंपरागत सीट रही है और वह यहां से लोकसभा पहुंचते रहे हैं। उनकी जगह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह यहां से चुनाव लड़ेंगे। 

यह पहला मौका है जब अमित शाह लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। 91 साल के आडवाणी पिछले छह बार से लगातार गांधीनगर से चुनकर लोकसभा पहुंचते रहे हैं। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही आडवाणी राजनीति में बहुत ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आ रहे थे, हालांकि संसद में उनकी उपस्थिति 90 फीसदी रही। 
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मुरली मनोहर जोशी (फाइल फोटो)
मुरली मनोहर जोशी 

इस बार भाजपा ने एक और सबसे वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी का टिकट काट दिया। 85 साल के जोशी यूपी के कानपुर से सांसद हैं। 2014 चुनाव में उन्हें नरेंद्र मोदी के वाराणसी से चुनाव लड़ने की वजह से कानपुर भेजा गया था। 26 मार्च को मुरली मनोहर जोशी ने कानपुर के मतदाताओं के नाम अपने एक लिखित संदेश में कहा है कि इस बार उन्हें कानपुर या किसी भी सीट से प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल ने उन्हें यह जानकारी दी है। जोशी का लिखित संदेश आने के बाद से पार्टी में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। 
 

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कलराज मिश्र, भाजपा सांसद - फोटो : एएनआई
कलराज मिश्र 

भाजपा के एक और कद्दावर नेता कलराज मिश्र भी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। 21 मार्च को देवरिया से लोकसभा सांसद कलराज मिश्र ने चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया था। उन्होंने कहा कि मैं इस बार चुनाव नहीं लड़ूंगा, मुझे पार्टी द्वारा कई अन्य जिम्मेदारियां दी गई हैं, इसलिए मेरा समय उसी के प्रति समर्पित होगा। कलराज मिश्र 2014 लोकसभा चुनाव में देवरिया से सांसद बने थे। उन्हें मोदी कैबिनेट में भी जगह मिली लेकिन 2017 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।  
 
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शांता कुमार(फाइल फोटो)
शांता कुमार 

भाजपा के 75 वर्ष की आयु के फार्मूले से बाहर होने के बाद 85 वर्षीय शांता कुमार ने भी सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई का रास्ता चुना। उन्होंने खुद ही चुनाव नहीं लड़ने का एलान किया। 13,37,838 मतदाताओं वाली कांगड़ा-चंबा संसदीय सीट में भाजपा के उदय के बाद ऐसा पहली बार होगा जब चुनाव शांता कुमार के सक्रिय राजनीति में नहीं होने के दौरान होंगे।

हाईकमान से नाराजगी के बावजूद धूमल से अपने सियासी निपटारे के बाद अपनी पसंद का सीएम जयराम ठाकुर के रूप में बनवाया। पुराने नेताओं को हाशिये पर धकेलने की सियासी हवा को भांपकर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने की कभी भी अपनी इच्छा जाहिर नहीं की।
 
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी - फोटो : अमर उजाला
भगत सिंह कोश्यारी 

भाजपा के एक और वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी भी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। 76 साल के कोश्यारी उत्तराखंड के सीएम भी रह चुके हैं। कोश्यारी की कुमाऊं में मजबूत पकड़ है। वह 2001 से 2002 तक उत्तराखंड के सीएम रहे। फिलहाल नैनीताल-उधमसिंह नगर से सांसद हैं। 
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बी सी खंडूड़ी (फाइल फोटो)
बी सी खंडूड़ी 

भुवनचंद्र खंडूडी गढ़वाल का बड़ा नाम हैं। वह उत्तराखंड के सीएम भी रहे। पिछले कुछ समय से वह हाशिए पर हैं। गढ़वाल की सियासत में 85 साल के खंडूड़ी की भूमिका अहम रही है। चाहे विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा खंडूड़ी को फ्रंट में रखकर भाजपा रणनीति तय करती थी।

खंडूड़ी के इस बार चुनाव लड़ने से इंकार के बाद पार्टी सैन्य पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी को तलाश रही थी, लेकिन एकाएक उनके बेटे मनीष खंडूड़ी के कांग्रेस का दामन थामने से सारे समीकरण बदले। उन्हें मनाने की हरसंभव कोशिश नाकाम रही। आखिरकार उनके शिष्य माने जाने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत को पौड़ी से टिकट देना पड़ा। अब भाजपा के सामने बड़ी चुनौती है कि खंड़ूड़ी को चुनाव प्रचार में कैसे सक्रिय रखा जाए? खंडूड़ी का प्रभाव पौड़ी ही नहीं बल्कि अन्य सीटों पर भी है। 
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सुमित्रा महाजन - फोटो : पीटीआई
5 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष और इंदौर से मौजूदा सांसद सुमित्रा महाजन ने भी चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। इंदौर सीट से प्रत्याशी घोषित करने के भाजपा के असमंजस के बाद महाजन ने ये फैसला किया। आठ बार लोकसभा में सांसद रहीं महाजन ने दिल्ली में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सवाल किया, ‘‘भारतीय जनता पार्टी ने आज तक इंदौर में अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। यह अनिर्णय की स्थिति क्यों है? संभव है कि पार्टी को निर्णय लेने में कुछ संकोच हो रहा है।’’ 
 
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