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दिग्विजय Vs साध्वी प्रज्ञा: भोपाल के हाई प्रोफाइल मुकाबले में किसका पलड़ा भारी?

Thu, 25 Apr 2019 02:53 PM IST
Abhishek Singh चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भोपाल में दिग्विजय और प्रज्ञा ठाकुर का मुकाबला - फोटो : Amar Ujala
लोकसभा चुनाव 2019 की जंग में इस बार भोपाल की सीट हाई प्रोफाइल सीट बन गई है। यहां जिन दो दिग्गजों का मुकाबला हो रहा है उनमें आपसी अदावत इस कदर गहरी है कि मुकाबला चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने यहां से मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को मैदान में उतारा है। जवाब में भाजपा ने अपने भगवा चेहरे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को टिकट देकर चौंकाया। साध्वी प्रज्ञा आक्रामकता के साथ भावात्मक अंदाज में भी प्रचार कर रही हैं। इसी ने कांग्रेस और दिग्विजय की चिंता बढ़ा दी है। इस मुकाबले में किसका पलड़ा दिख रहा है भारी और किसकी क्या है रणनीति, जानते की कोशिश करते हैं। 
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दिग्विजय सिंह-साध्वी प्रज्ञा - फोटो : Social media
साध्वी प्रज्ञा 2008 मालेगांव धमाके में आरोपी रह चुकी हैं और फिलहाल जमानत पर हैं। दिग्विजय पर वह कई गंभीर आरोप लगा चुकी हैं और अपने साथ हुई कथित ज्यादतियों के लिए उन्हें ही जिम्मेदार मानती हैं। साध्वी प्रज्ञा के मैदान में उतरते ही यहां की चुनावी जंग हिंदुत्व की हो गई। एक तरफ दिग्विजय का सॉफ्ट हिंदुत्व तो दूसरी तरफ साध्वी प्रज्ञा का हार्डलाइन हिंदुत्व। मुकाबला जबरदस्त हो चला है। पिछले कुछ समय से दिग्विजय मंदिरों की परिक्रमा कर रहे हैं। भाजपा साध्वी को उतारकर एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है।  
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साध्वी प्रज्ञा - फोटो : Social media
साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से उतारने की चर्चा काफी पहले से ही चल रही थी। माना जा रहा है कि इसके जरिए भाजपा और संघ मध्य प्रदेश में हिंदुत्व के मुद्दे पर अपनी खोई साख को दोबारा हासिल करना चाहती है। विधानसभा चुनाव 2018 में मिली करारी हार का दर्द अभी मंद नहीं पड़ा है। करीबी अंतर से मिली हार भाजपा और संघ भुला नहीं पा रही। संघ के धुर विरोधी रहे दिग्विजय को हार का स्वाद चखाना नाक का सवाल बन गया है।
 

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राहुल गांधी-प्रियंका गांधी - फोटो : PTI
कांग्रेस की मुश्किल ये है कि वह भाजपा के हार्डलाइन हिंदुत्व का मुकाबला करने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चल पड़ी है। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मंदिरों के दर्शन करते दिख रहे हैं। ये सिलसिला पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान ही शुरू हुआ था। खुद दिग्विजय भी इन दिनों राज्य में मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और खुद को हिंदू हितैषी साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन इसमें कई खतरे भी हैं। कांग्रेस के इस स्टैंड से मुस्लिम वोटर पार्टी से छिटक सकते हैं, उधर हिंदू वोटर भी नाराज हो सकते हैं। यही बात कहीं दिग्विजय को भारी न पड़ जाए। 
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कांग्रेस झेडा - फोटो : PTI
भोपाल में चार लाख से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। ये एक बड़ी संख्या है और कांग्रेस के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। सॉफ्ट हिंदुत्व का मुद्दा कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस दिग्विजय सिंह को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रही है। पार्टी ने भोपाल घोषणापत्र अभियान भी शुरू किया है। भोपाल में छठवें चरण में 12 मई को मतदान होगा।  
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दिग्विजय सिंह - फोटो : PTI
दिग्विजय की मुश्किल 
मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने चुनाव पूर्व बयान दिया था कि दिग्विजय जैसे बड़े नेताओं को भोपाल जैसी चुनौतीपूर्ण सीट से चुनाव लड़ना चाहिए। भोपाल भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है और पिछले करीब 25 सालों से भाजपा का उम्मीदवार ही संसद पहुंचता रहा है। इस बार कांग्रेस ने दिग्विजय पर दांव खेला तो भाजपा ने भी तुरुप का इक्का चल दिया। साध्वी प्रज्ञा को मैदान में उतारे जाने के साथ ही हिंदुत्व का मुद्दा उभरकर सामने आ गया। साथ ही दिग्विजय के पुराने बयान भी जिंदा हो उठे। भाजपा ने कहा कि ये दिग्विजय ही थे जिन्होंने सबसे पहले हिंदू आतंकवाद शब्द का ईजाद किया था। चुनाव प्रचार के दौरान दिग्विजय मंदिरों की भी परिक्रमा कर रहे हैं और एक तरह से नरम हिंदुत्व के साथ आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन साध्वी प्रज्ञा का आक्रामक अंदाज और भावात्मक प्रचार दिग्विजय के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। 
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भाजपा-कांग्रेस - फोटो : Social Media
भोपाल सीट 
लंबे अरसे से भोपाल सीट भाजपा का गढ़ रही है। यहां भाजपा का इस कदर वर्चस्व रहा है कि कांग्रेस ने यहां अपना आखिरी संसदीय चुनाव 1984 में जीता था। तब से भाजपा लगातार जीत हासिल करती रही है। 1989 से रिटायर्ड आईएएस सुशील चंद्र वर्मा चार बार यहां से चुने गए। इसके बाद उमा भारती और कैलाश जोशी (दो बार) सांसद बने। भोपाल लोकसभा सीट पर कुल 19,56,936 मतदाता हैं। इसमें करीब चार लाख मुसलमान हैं। करीब सवा लाख सिंधी मतदाता भी हैं। पिछले चुनाव में यहां से भाजपा के आलोक संजर ने जीत हासिल की थी। उन्हें कुल 714178 वोट मिले थे। कांग्रेस के पीसी शर्मा 343482 के साथ दूसरे नंबर पर थे। यहां करीब दो से ढाई लाख कायस्थ मतदाता हैं। ओबीसी वोटर करीब 40 फीसदी हैं। वर्तमान सांसद आलोक संजर का टिकट इस बार काट दिया गया है। प्रज्ञा ठाकुर और दिग्विजय सिंह दोनों ही राजपूत हैं। यानी इस बार लड़ाई ठाकुर बनाम ठाकुर की बन गई है।  

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