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अमेठी से लखनऊ तक, पांचवें चरण में उत्तर प्रदेश की इन 10 सीटों पर नजर आएगा तूफानी मुकाबला

Sat, 04 May 2019 05:47 PM IST
Trainee Trainee चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूनम सिन्हा-राजनाथ सिंह-राहुल गांधी - फोटो : Amar Ujala
देश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश की सियासत अब अपने चुनावी चरम पर है। पांचवें चरण में 6 मई को यूपी की 14 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। इन 14 सीटों में से 12 सीटें भाजपा के कब्जे में हैं जबकि केवल दो सीटें कांग्रेस के पाले में हैं। लेकिन सपा-बसपा का महागठबंधन होने के बाद यूपी का सियासी समीकरण और पेचीदा हो गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में 14 सीटों पर सपा-बसपा के प्रत्याशी दूसरे या तीसरे नंबर पर रहे थे लेकिन दोनों के वोट मिला दिए जाएं तो वो कई सीटों पर भारी पड़ते दिखते हैं। करते हैं 10 ऐसी सीटों की पड़ताल जहां इस बार मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
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निरंजन ज्योति-सुखदेव प्रसाद-राकेश सचान - फोटो : ANI
फतेहपुर लोकसभा सीट से भाजपा ने एक बार फिर से निरंजन ज्योति को टिकट दिया है। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशी के अफजाल सिद्दीकी को 1.87 लाख वोटों से हराया था।
सपा-बसपा के गठबंधन ने इस सीट से सुखदेव प्रसाद को उतारा है। इससे पहले सपा ने राकेश सचान को यहां से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था। लेकिन गठबंधन के बाद ये सीट बसपा के हिस्से में आई। राकेश सचान अब कांग्रेस के टिकट पर यहां से उम्मीदवार हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा को कुल वोट 4.85 लाख वोट मिले थे। जो सपा-बसपा को मिले 4.78 लाख वोटों से कुछ ही ज्यादा रहे।
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राजेश वर्मा-नकुल दुबे- कैसर जहां - फोटो : social Media
उत्तर प्रदेश की सीतापुर लोकसभा सीट की गिनती उन सीटों में होती है, जहां कुर्मी वोटर निर्णायक साबित होते हैं। इस सीट पर भाजपा के राजेश वर्मा, बसपा के नकुल दुबे और कांग्रेस की कैसर जहां के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। 2014 लोकसभा चुनाव में बसपा से भाजपा में आए राजेश वर्मा ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी कैसर जहां को 51,027 वोटों से मात दी थी। सीतापुर लोकसभा सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा को 4.17 लाख वोट मिले थे। जबकि सपा-बसपा के खाते में कुल 5.22 लाख वोट गए थे। जो भाजपा को मिले वोट से ज्यादा थे।

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रेखा वर्मा-जितिन प्रसाद- अरशद सिद्दीकी - फोटो : social Media
धौरहरा लोकसभा सीट पर भाजपा की रेखा वर्मा, कांग्रेस के जितिन प्रसाद और बसपा के अरशद सिद्दीकी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा की रेखा वर्मा ने बसपा के दाऊद अहमद को 1.25 लाख वोटों से पटखनी दी थी। इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा को भाजपा से ज्यादा वोट मिले थे। भाजपा को कुल 3,60,357 वोट मिले थे जबकि सपा-बसपा को 4,68,714 वोट मिले थे। चुनाव में बसपा-सपा के बीच वोटों का अंतर केवल 650 था।
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आरके चैधरी-कौशल किशोर-सीएल वर्मा - फोटो : social Media
मोहनलालगंज की लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने बसपा से कांग्रेस में आए आरके चैधरी को उतारा है। कांग्रेस के प्रत्याशी के खिलाफ बसपा ने सीएल वर्मा और भाजपा ने कौशल किशोर को उतारा है। जिससे यहां का मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कौशल किशोर ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े आरके चौधरी को 1,45,416 वोटों से हराया था। उस चुनाव में यहां सपा-बसपा के कुल 5,52,224 वोट भाजपा को मिले 4,55,274 वोटों से ज्यादा थे।
 
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राजनाथ सिंह-पूनम सिन्हा-प्रमोद कृष्णम - फोटो : social Media
कभी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का संसदीय क्षेत्र रहा लखनऊ पर 28 सालों से भाजपा का कब्जा हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह यहां से जीतकर संसद पहुंचे थे। भाजपा ने एक बार फिर से राजनाथ को यहां से उतारा है। जिनको चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने प्रमोद कृष्णम को उतारा है तो सपा से शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा लखनऊ से चुनावी मैदान में हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी को 2.72 लाख वोटों से मात दी थी। जबकि बसपा तीसरे और सपा चौथे नंबर पर रही थी। सपा-बसपा वोटों को मिलाकर देखें तो कुल 1.21 लाख वोट उन्हें मिले, जबकि राजनाथ सिंह को 5.61 लाख वोट मिले थे।
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सोनिया गांधी-दिनेश प्रताप सिंह - फोटो : social Media
कांग्रेस का अभेद्य किला कही जाने वाली रायबरेली लोकसभा सीट से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने सोनिया के सामने कांग्रेस के पूर्व नेता दिनेश प्रताप सिंह को उतारा है। जबकि सपा-बसपा ने यहां से अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है। इस सीट पर सपा-बसपा को अभी तक जीत नहीं मिली है। 2004 से रायबरेली से चुनाव लड़ रही सोनिया गांधी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के अजय अग्रवाल को 3,52,713 वोटों से हराया था। जबकि बसपा यहां तीसरे नंबर रही थी। 

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समृति ईरानी-राहुल गांधी
उत्तर प्रदेश की हाई प्रोफाईल सीट अमेठी को कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर यहां से मैदान में हैं। उनके सामने भाजपा की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट पर भी रायबरेली की तरह ही सपा-बसपा का गठबंधन चुनाव नहीं लड़ रहा है। 2014 के चुनाव में राहुल गांधी ने स्मृति ईरानी को 1,07,903 वोटों से हराया था। उस चुनाव में राहुल को 46.71 फीसदी, जबकि स्मृति को 34.38 फीसदी वोट मिले थे।

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श्यामनाचरण गुप्ता-बाल कुमार पटेल- आरके सिंंह पटेल - फोटो : social Media
बांदा लोकसभा सीट पर भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा ने बसपा के पूर्व नेता आरके सिंंह पटेल को उतारा है। वहीं सपा ने भाजपा के पूर्व नेता श्यामनाचरण गुप्ता को यहां से टिकट दिया है। कांग्रेस ने सपा के पूर्व नेेता बाल कुमार पटेल को उतार कर मुकाबले को त्रिकोणीय में बदल दिया है। दल बदलू तीनों ही प्रत्याशियों ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के भैंरो प्रसाद मिश्रा ने बसपा के टिकट पर लड़े आरके सिंह पटेल को 1,15,788 वोटों से हराया था। उस चुनाव में भाजपा को कुल 3,42,066  वोट जबकी सपा-बसपा को कुल 4,16,008 वोट मिले थे, जो भाजपा को मिले वोटों से ज्यादा थे।

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लल्लू सिंह-निर्मल खत्री-आनंद सेन - फोटो : social Media
फैजाबाद लोकसभा सीट से भाजपा ने एक बार फिर से यहां के वर्तमान सासंद लल्लू सिंह को उतारा है। जिनके सामने कांग्रेस के निर्मल खत्री और सपा के आनंद सेन यादव चुनावी मैदान में हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में लल्लू सिंह ने सपा के मित्र सेन यादव को 2,82,677 वोटों से हराया था। उस चुनाव में सपा-बसपा को भाजपा से कम वोट मिले थे। भाजपा को 4,91,663 वोट जबकि सपा-बसपा को 3,50,813 वोट मिले थे। फैजाबाद लोकसभा सीट राम मंदिर की वजह से चर्चा में रहती है। राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद के कारण ये सीट राजनीतिक रुप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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सावित्रीबाई फुले-अक्षयवर लाल-शब्बीर अहमद - फोटो : social Media
बहराइच लोकसभा सीट पर मुकाबला इस बार मजेदार है। क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर संसद पहुंची सावित्रीबाई फुले इस बार वहां से कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। भाजपा ने अक्षयवर लाल और सपा ने शब्बीर अहमद को उतारकर यहां के चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा के टिकट पर लड़ीं सावित्रीबाई फुले ने शब्बीर अहमद को 95,645 वोटों से हराया था. उस चुनाव में सपा-बसपा के कुल वोट 4,33,651 भाजपा के 4,32,392 से आंशिक तौर पर सही लेकिन ज्यादा थे।
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