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लालकृष्ण आडवाणी: आक्रामक राजनीति से जमाया सिक्का, एक बयान ने ला दिया था तूफान

Thu, 08 Nov 2018 04:17 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लाल कृष्ण आडवाणी - फोटो : pti
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का आज 91वां जन्मदिन है। राजनीति के लौहपुरुष कहे जाने वाले आडवाणी हालांकि अब राजनीति में पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं, लेकिन एक वक्त वह प्रधानमंत्री बनने के प्रबल दावेदार थे। लेकिन वक्त ने ऐसी करवट बदली कि वह पीएम इन वेटिंग ही रह गए। उप-प्रधानमंत्री की कुर्सी उन्होंने जरूर संभाली लेकिन 2004 में जब उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार बनाया गया तो भाजपा चुनाव ही नहीं जीत पाई। 2005 में मो. अली जिन्ना पर उनके बयान ने मुश्किलें खड़ी कर दी। आडवाणी के जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनका अब तक का सियासी इतिहास। 
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advani atal bihari friendship
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म पाकिस्तान के कराची में 8 नवंबर 1927 को एक हिंदू सिंधी परिवार में हुआ था। वह भाजपा की स्थापना करने वाले प्रमुख नेताओं में से एक रहे। लालकृष्ण आडवाणी तीन बार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। आडवाणी चार बार राज्यसभा के और पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे। वर्तमान में भी वो गुजरात के गांधीनगर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के सांसद हैं। वर्ष 1977 से 1979 तक पहली बार केंद्रीय सरकार में कैबिनेट मंत्री की हैसियत से लालकृष्ण आडवाणी ने दायित्व संभाला। आडवाणी इस दौरान सूचना प्रसारण मंत्री रहे। 2002 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह उप प्रधानमंत्री रहे थे। जबकि 1998 से 2004 की एनडीए सरकार में वह गृहमंत्री रहे। अटल और आडवाणी एक सिक्के के दो पहलू की तरह रहे। जहां अटल की छवि एक उदारवादी नेता के तौर पर रही, वहीं आडवाणी आक्रमक नेता के दौर पर जाना जाता था। अटल के साथ उनकी जुगलबंदी देखने लायक थी। राम मंदिर के लिए रथयात्रा ने उन्हें बेहद मशहूर कर दिया था। 
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Lal Krishna Advani
बयानों को लेकर विवादों में घिरे 

2005 में आडवाणी पकिस्तान दौरे पर गए । सिंध प्रांत के अपने दौरे में उन्होंने उन प्राथमिक स्कूलों का भी दौरा किया जहां उन्होंने प्राथमिक शिक्षा पाई थी। वह मोहम्मद अली जिन्ना के मजार पर गए और उन्होंने पाकिस्तानी कायदे आजम को धर्मनिरपेक्ष बताया जिसपर विश्व हिन्दू परिषद और संघ से जुड़े नेताओं ने नाराजगी जाहिर की। इसी बयान ने संघ में उनका कद छोटा कर दिया। जून 2015 में भाजपा के लौहपुरुष ने अपनी ही केंद्र की सरकार के संदर्भ में कहा कि मैं आश्वस्त नहीं कि देश में दोबारा आपातकाल नहीं लगेगा। आडवाणी के इस बयान से जहां सरकार सवालों के घेरे में घिर गई वहीं उनकी पार्टी में हड़कंप मच गया।
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नरेंद्र मोदी- लाल कृष्ण आडवाणी - फोटो : ANI
आज लालकृष्ण आडवाणी के 91वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके आवास पर जाकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। वर्तमान में आडवाणी सक्रिय राजनीति से दूर भाजपा के मार्गदर्शक मंडल का हिस्सा हैं। हाल ही में सरदार पटेल की प्रतिमा स्टैचू ऑफ यूनिटी के अनावरण कार्यक्रम में सभी दिग्गज नेता मौजूद थे, लेकिन आडवाणी नजर नहीं आए। 
 
 
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