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LCA Tejas: वायुसेना के तरकश का ब्रह्मास्त्र है तेजस लड़ाकू विमान, जानिए खासियतें

Wed, 13 Jan 2021 08:32 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तेजस लड़ाकू विमान - फोटो : भारतीय वायु सेना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों से संबंधित समिति (सीसीएस) ने बुधवार को भारतीय वायुसेना के बेड़े के 83 अतिरिक्त स्वदेशी एडवांस तेजस जेट के लिए लगभग 48,000 करोड़ रुपये के सबसे बड़े स्वदेशी रक्षा खरीद सौदे को मंजूरी दे दी है। 

यह सौदा भारतीय रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के लिए एक गेम-चेंजर होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी जानकारी दी। बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने 40 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद को पहले ही मंजूरी दे दी है। यानी कि अब देश के पास कुल 123 एडवांस तेजस जेट हो जाएंगे।



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तेजस लड़ाकू विमान - फोटो : भारतीय वायु सेना
इन 123 लड़ाकू विमानों के अतिरिक्त भारत 170 तेजस Mark-2 की खरीद को मंजूरी देने पर भी विचार कर रहा है, जो कि पॉवरफुल इंजन और आधुनिक तकनीकी से बना होगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2029 तक सभी 83 विमानों को वायुसेना को सौंपने का लक्ष्य है। 

उल्लेखनीय है कि इन 83 लड़ाकू विमानों से भारतीय वायुसेना की कम से कम छह स्क्वाड्रन बन जाएंगी। एक स्क्वाड्रन में 16-18 शक्तिशाली लड़ाकू विमान होते हैं। बता दें कि ये 83 मार्क वन-ए फाटइर जेट पुराने सौदे वाले मार्क वन से ज्यादा एडवांस यानी घातक और खतरनाक हैं।
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तेजस लड़ाकू विमान - फोटो : भारतीय वायु सेना
तेजस स्वदेशी चौथी पीढ़ी का टेललेस कंपाउंड डेल्टा विंग विमान है। यह फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम, इंटीग्रेटेड डिजिटल एवियोनिक्स, मल्टीमोड रडार से लैस लड़ाकू विमान है। तेजस चौथी पीढ़ी के सुपरसोनिक लड़ाकू विमानों के समूह में सबसे हल्का और सबसे छोटा है।

यह लगभग सभी मामलों में चीन और पाकिस्तान पाक द्वारा मिग-21 की नकल कर बनाए गए थंडरबर्ड से बेहतर है। जब बहरीन इंटरनेशनल एयर शो में तेजस को प्रदर्शित करने की बात की गई थी, तब पाक और चीन ने बेइज्जती से बचने के लिए थंडरबर्ड को वहां से हटा लिया था। 

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तेजस लड़ाकू विमान - फोटो : भारतीय वायु सेना
तेजस की सर्वाधिक गति 1.6 मैक है। 2000 किलोमीटर की रेंज को कवर करने वाले तेजस का अधिकतम थ्रस्ट 9163 केजीएफ है। इसमें कांच का कॉकपिट, हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले, मल्टी मोड रडार, कंपोजिट स्ट्रक्चर और फ्लाई बाय वायर डिजिटल सिस्टम जैसे आधुनिक फीचर हैं। 

इस जेट पर दो आर-73 एयर-टू-एयर मिसाइल, दो 1000 एलबीएस क्षमता के बम, एक लेजर डेजिग्नेशन पॉड और दो ड्रॉप टैंक्स हैं। एक तेजस में लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसका इंजन अमेरिकी है, रडार और वेपन सिस्टम इजरायल का और इजेक्शन सीट ब्रिटेन की है। 
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तेजस लड़ाकू विमान - फोटो : पीटीआई (फाइल)
तेजस का वजन 12 टन है और इसकी लंबाई 13.2 मीटर है। इसके पंख का फैलाव 8.2 मीटर है जबकि, ऊंचाई 4.4 मीटर है और रफ्तार 1350 किमी प्रति घंटा है। दुश्मनों के विमानों से निपटने के लिए इस्तेमाल होने वाले इसका मिशन कम्प्यूटर भारतीय तकनीकी पर आधारित है। 

इस लड़ाकू विमान में आर-73 एयर टू एयर मिसाइल, लेजर गाइडेड मिसाइल और बियांड विजुवल रेंज अस्त्र मिसाइल लगाई जा सकती है। इस जेट को बनाने में भारत निर्मित कार्बन फाइबर का इस्तेमाल किया गया है। इसकी वजह से यह हल्का और धातु के मुकाबले बेहद मजबूत है। 
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तेजस लड़ाकू विमान - फोटो : पीटीआई (फाइल)
तेजस में लगा मुख्य सेंसर 'तरंग रडार' पायलट को दुश्मन जेट्स या जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल के बारे में बताता है। यह सेंसर भी भारत में बना है।  तेजस लड़ाकू विमान का नामांकरण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था, जिसका अर्थ होता है सबसे तेज।
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