कारगिल की वो आग जो 19 साल पहले लगी थी वो आज तक बुझी नही है। 26 जुलाई हर भारतीयों के गर्व करने का दिन है जब हमारे वीर योद्धाओं ने कारगिल की सफेद बर्फ से ढकी पहाड़ी पर तिरंगा फहराया था।
पाकिस्तान के धोखे को भारतीय जवानों ने विजय तिलक लगाकर नेस्तनाबूद कर दिया था। ढाई महीने तक चले इस युद्ध में देश ने लगभग 527 से अधिक वीर योद्धा को खोया था वहीं 1300 से ज्यादा घायल हुए थे। इस युद्ध में सबसे दुखद है उन सैनिकों के बारे में जानना जिन्होंने अपना जीवन खोया उनमें से अधिकांश ने जीवन के 30 वसंत भी नहीं देखे थे।
इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के सामने लेता है। यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का, जिन्होंने हंसते-हंसते मातृभूमि की रक्षा के लिए मौत को गले लगा लिया।
आज उन शहीदों से मिलवाएंगे जिन्होंने हंसते हंसते अपनी जिंदगी देश के नाम कुर्बान कर दी थी।
विज्ञापन
2 of 13
Captain Anuj Nayyar
कैप्टन अनुज नैय्यर जाट रेजिमेंट की 17वीं बटालियन में थे। 7 जुलाई 1999 को वह टाइगर हिल पर दुश्मनों का दांत खट्टे करते हुए शहीद हुए। कैप्टन अनुज की वीरता को सरकार ने मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
3 of 13
Captain N Kenguruse
कैप्टन एन केंगुर्सू राजपूताना राइफल्स के 2री बटालियन में थे। वह कारगिल युद्ध के दौरान लोन हिल्स पर 28 जून 1999 को दुश्मनों को पटखनी देते हुए शहीद हो गए थे। युद्ध के मैदान में दुश्मनों को खदेड़ देने वाले इस योद्धा को सरकार ने मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया।
4 of 13
Lieutenant Keishing Clifford Nongrum
लेफ्टिनेंट शींग क्लिफोर्ड नोंग्रुम जम्मू कश्मीर लाइट इनफेंट्री की 12वीं बटालियन में थे। वह वीरगति को 1 जुलाई 1999 को प्राप्त हुए। वह उस समय शहीद हुए जब कारगिल युद्ध के दौरान प्वांइट 4812 को कब्जा कर रहे थे। नोंगुर्म को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
5 of 13
Major Padmapani Acharya
भारतीय सेना में मेजर पदमपानी आचार्या राजपुताना राईफल्स की 2री बटालियन में थे। 28 जून 1999 को लोन हिल्स पर दुश्मनों के हाथों वीरगति को प्राप्त हो गए थे। सरकार ने कारगिल हिल पर उनकी वीरता के लिए और दुश्मनों का दांत खट्टा करने के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया था।
विज्ञापन
6 of 13
Major Rajesh SIngh Adhikari
मेजर राजेश सिंह अधिकारी की मौत 30 मई 1999 में कारगिल हिल पर हुई थी। उनके वीरता कार्य के लिए सरकार ने उन्हें गैलेंटरी सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया।
विज्ञापन
7 of 13
Colonel Sonam Wangchuk
कर्नल सोनम वांगचुक लद्दाख स्काउट रेजिमेंट में अधिकारी थे। कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना को खदेड़ते हुए वह कॉरवट ला टॉप पर वीरगति को प्राप्त हुए थे। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
8 of 13
Major Vivek Gupta
मेजर विवेक गुप्ता राजपुताना राइफल्स की सेकेंड बटालियन में थे। 12 जून 1999 को द्रास सेक्टर में एक महत्वपूर्ण पोस्ट पर कब्जा किए जाने के दौरान वह वीरगति को प्राप्त हुए थे। कारगिल युद्ध में उनकी हेरोइज्म को देखते हुए सरकार ने उन्हें मरणो परांत महावीर चक्र से सम्मानित किया।
9 of 13
Captain Manoj Kumar Pandey
कैप्टन मनोज कुमार पांडे गोरखा राइफल्स के फर्स्ट बटालियन में थे। वह ऑपरेशन विजय के महानायक थे। उन्होंने 11 जून को बटालिक सेक्टर में दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। वहीं उनके ही नेतृत्व में सेना की टुकड़ी ने जॉबर टॉप और खालुबर टॉप पर सेना ने वापस कब्जा किया था। वह दिन तीन जुलाई 1999 का था। पांडेय ने अपनी चोटों की परवाह किए बिना तिरंगा लहराया और परम वीर चक्र से सम्मानित किए गए।
10 of 13
Naik Digendra Kumar
नायक दिगेंद्र कुमार राजपुताना राइफल्स के सेकेंड बटालियन में थे। उनकी कारगिल युद्ध में अदम्य साहस के लिए सरकार ने 15 अगस्त 1999 को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
11 of 13
Rifleman Sanjay Kumar
राइफल मैन संजय कुमार 13 जम्मू और कश्मीर राइफल्स में थे। वह स्काउट टीम के लीडर थे और उन्होंने फ्लैट टॉप को अपनी छोटी टुकड़ी के साथ कब्जा किया। वह एक जाबांज योद्धा थे उन्होंने दुश्मनों की गोली सीने पर खाई थी। गोली लगने के बाद भी वह दुश्मनों का दांत खट्टा किया। छोटी सी टुकड़ी के साथ उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया इसके बाद राइफल मैन कुमार को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
12 of 13
Yogendra Singh Yadav
कमांडो घटक प्लाटून को गाइड करने वाले ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव थे। जिन्होंने एक चक्र के साथ टाइगर हिल पर एक स्ट्रैटजी बना कर बंकर पर हमला किया। वह अपनी पलटन के लिए रस्सी का रास्ता बनाते थे। 4 जुलाई को उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान अदम्य साहस के लिए योगेंद्र को सरकार ने परमवीर चक्र से सम्मानित किया।
कैप्टन विक्रम बतरा वही हैं जिन्होंने कारगिल के प्वांइट 4875 पर तिरंगा फहराते हुए कहा था यह दिल मांगे मोर। वह वीर गति को भी वहीं प्राप्त हुए। विक्रम बतरा 13वीं जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में थे। विक्रम बतरा तोलोलिंग पर पाकिस्तानियों द्वारा बनाए गए बंकर पर न केवल कब्जा किया बल्कि गोलियों की परवाह किए बिना ही अपने सैनिकों को बचाने के लिए 7 जुलाई 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों को सीधे भिड़ गए और तिरंगा फहरा कर ही दम लिया। आज उस चोटी को बतरा टॉप से जाना जाता है। सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र का सम्मान देकर सम्मानित किया।