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कालिखो पुल: डेढ़ रुपये में बढ़ई की नौकरी से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

Thu, 11 Aug 2016 01:08 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरुणाचल प्रदेश के आठवें मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में आत्महत्या कर ली। उनका शव सीएम आवास में ही पंखे से लटका मिला। उनकी मौत ने न केवल अरुणाचल बल्कि पूरे देश के सियासी गलियारों को सदमे में डाल दिया है। महज छह महीने तक अरुणाचल के मुख्यमंत्री रहे कलिखो लंबे समय से परेशान चल रहे थे। उनकी मौत के बाद सबके मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर कलिखो कौन थे, और उनका राजनीतिक करियर कैसा रहा ? आईए तस्वीरों में जानते हैं कलिखो पुल के राजनीतिक जीवन के बारे में...
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कालिखो पुल: डेढ़ रुपये में बढ़ई की नौकरी से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

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kalikho pul
कलिखो पुल अरुणाचल के आठवें मुख्यमंत्री थे जिन्होंने 19 फरवरी 2016 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन वह महज छह महीने तक ही अपने पद पर बने रह सके। 13 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। इसकी वजह से वह काफी परेशान रहने लगे थे। लेकिन राजनीति में आने से पहले कलिखो का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा।

 
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कालिखो पुल: डेढ़ रुपये में बढ़ई की नौकरी से मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

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कलिखो 20 जनवरी 1969 को अरुणांचल प्रदेश के बढ़ई परिवार में पैदा हुए थे। कलिखो अरुणाचल के कमान मिशमी जातीय समूह से हैं। यह समूह भारत-चीन सीमा के दोनों तरफ पाया जाता है। ये जब 13 महीने के थे, तो इनकी मां चल बसीं। 5 साल की उम्र में इन्होंने अपने पिता को भी खो दिया। इनका बचपन बेहद गरीबी और अभाव में गुजरा।

 

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बचपन में कालिखो के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वह अच्छे स्कूल में पढ़ पाते। कलिखो ने बताया कि वे आंटी के घर में पले-बढ़े। जंगल से लकड़ी लेकर आते थे, तो एक वक्त का खाना मिलता था।' दस साल की उम्र में कालिखो ने बढ़ई का काम करना शुरु किया, इनका शुरुआती वेतन रोजाना डेढ़ रुपये था। इन्होंने रात में चौकीदार का भी काम किया।

 
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ग्यारह साल की उम्र में कालिखो को एक खतरनाक बीमारी ने चपेट में ले लिया। कलिखो ने इलाज के लिए कई रिश्तेदारों से मदद मांगी, पर कोई आगे नहीं आया। हारकर उन्होंने आत्महत्या का फैसला किया। वह आधे घंटे से भी ज्यादा नदी के पुल पर खड़े रहे, लेकिन लोगों की भीड़ होने के चलते सुसाइड नहीं कर सके। फिर वहां से गुजर रहे एक अफसर ने उन्हें सहारा दिया, इस हादसे के बाद कलिखो ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 
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स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही कालिखो ठेके पर छोटे-मोटे काम करने लगे थे। 9वीं क्लास में आते-आते वह 4 सेकंड हैंड ट्रक खरीदने में कामयाब रहे। पुल ने इंदिरा गांधी गवर्नमेंट कॉलेज से बीए किया। स्नातक के तीसरे साल तक कलिखो ने 2.73 लाख रुपये में अपना एक घर बनाया। कॉलेज के दिनों में ये छात्र राजनीति में आए, जहाँ कांग्रेस ने इनकी नेतृत्व प्रतिभा से प्रभावित हो विधानसभा का टिकट दिया।

 
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प्रदेश के हयुलियांग विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले कालिखो ने प्रदेश सरकार में सबसे लंबे समय तक वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला। उन्होंने राज्य के तीन मुख्यमंत्रियों गेगांग अपांग, मुकुट मिठी और स्व. दोर्जी खांडू के कार्यकाल में वित्त मंत्री का पदभार संभाला।

 

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कलिखो ने लगातार पांच बार अपने विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया और राज्य सरकार के कई अहम मंत्रालयों के कार्यभार भी संभाले जिसमें से ऊर्जा मंत्रालय, वित्त और भूमि-प्रबंधन जैसे मंत्रालय प्रमुख थे। इसके अलावा वह वह 13 सालों तक अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमिटी के एक्जीक्यूटिव मेंबर भी रहे और लगभग सात सालों तक प्रदेश चुनाव समिति के सदस्य भी रहे।

 

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कालिखो ने डांगविमसई पुल से शादी की और उनके पांच बेटे भी हैं। कलिखो को खेल, भ्रमण और पढ़ने का भी शौक था।

 

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साल 2016 की शुरुआत में कांग्रेस से मतभेदों की वजह से बगावत कर बीजेपी के समर्थन से कालिखो अरुणाचल की सत्ता पर काबिज हुए थे, जिसके बाद उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री घोषित किया गया था लेकिन उनका यह कार्यकाल छह महीने से ज्यादा नहीं चल सका। कलिखो को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जुलाई 2016 को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। वह महज छह माह ही अरुणाचल के मुख्यमंत्री रहे।

 
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इन्होंने कथित तौर पर घर पर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। वह सीएम आवास में ही रह रहे थे और यहीं उन्होंने फांसी लगाकर ख़ुदकुशी कर ली। बताया जा रहा है कि सत्ता जाने के बाद कलिखो लंबे समय से परेशान चल रहे थे। कालिखो की मौत ने न केवल अरुणाचल बल्कि पूरे देश के सियासी गलियारों को सदमे में डाल दिया है।
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