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पहली बार नहीं चलाया जा रहा है महाभियोग, ये हैं वो चार जज जिन्हें करना पड़ा था इसका सामना

Fri, 20 Apr 2018 02:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Dipak Misra, Chief Justice of India
भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। बता दें कि पिछले दिनों जस्टिस दीपक मिश्रा की कार्यप्रणाली पर  सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने ही उंगली उठाई थी जिसके बाद कांग्रेस, माकपा सहित कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने  उनके खिलाफ महाभियोग चलाए जाने की बात कही थी। शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद की अध्यक्षता में करीब 64 सांसदों ने मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया। 

किसी भी जज पर महाभियोग चलाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी देश के चार जजों के खिलाफ महाभियोग लाया जा चुका है।  जिसमें दो बार राज्य सभा के सांसदों ने ही महाभियोग चलाए जाने का प्रस्ताव जारी किया है। दीपक मिश्रा से पहले आंध्रप्रदेश और तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सीवी नागार्जुन रेड्डी पर महाभियोग चलाया गया था। 
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न्यायाधीश सौमित्र सेन

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justice saumitra
कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन  देश के इतिहास में दूसरे ऐसे जज हैं, जिन्हें अनाचार के आरोप में महाभियोग की कार्यवाही का सामना करना पड़ा था। 53 साल के सेन ने महाभियोग चलाए जाने के बाद अपना इस्तीफा उस समय की राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल को भेजा था।

उन्होंने इस्तीफा लोकसभा में महाभियोग चलाया जाए उसके पांच दिन पहले ही भेज दिया था। उन्होंने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा था कि मैं भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में दोषी नहीं हूं। मैंने अपने पावर का कभी भी किसी भी रूप में दुरुपयोग नहीं किया है। लेकिन फिर भी मुझे महाभियोग से गुजरना पड़ रहा है।  

सौमित्र से पहले सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी. रामास्वामी पर मई 1993 में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। लेकिन यह प्रस्ताव लोकसभा में गिर गया, क्योंकि सत्ताधारी कांग्रेस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने उस समय लोकसभा में न्यायमूर्ति रामास्वामी का बचाव किया था।
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पीडी. दिनाकरन

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pd-dinakaran
सिक्कम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पीडी. दिनाकरन के खिलाफ भी महाभियोग लाने की तैयारी की गई थी पर सुनवाई के कुछ दिनों पहले ही दिनाकरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। दिनाकरन पर भूमि पर कब्जा करने और आय से अधिक संपत्ति के मामले थे। राज्यसभा के 75 सांसदों ने जस्टिस दिनाकरन के खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग की गई थी। तब सभापति हामिद अंसारी को पत्र सौंपा गया था। न्यायमूर्ति दिनाकरन पर आरोप था कि उन्होंने तमिलनाडु के तिरूवल्लूर जिले में काफी जमीन हथियाने का आरोप लगा था। 

जेबी पारदीवाला

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justice pardiwala
वर्ष 2015 में  58 राज्यसभा सांसदों ने गुजरात हाई कोर्ट के न्यायाधीश जेबी पारदीवाला के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाए थे। जेबी पारदीवाला के खिलाफ आरक्षण के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। सांसदों ने अपनी याचिका में अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ अपशब्द कहे थे।  

उन्होंने कहा था कि यदि मुझसे पूछा जाए कि इस देस को तोड़ने और सफलता में कौन बाधक है तो मैं कहूंगा आरक्षण और भ्रष्टाचार। उन्होंने कहा था कि देश को आजाद हुए 65 साल से अधिक हो गए हैं लेकिन यहां आज भी विकास की बात नहीं की जाती है हम आज भी आरक्षण की बात कर रहे हैं। हामिद अंसारी के पास महाभियोग का नोटिस जाने के बाद जज ने अपने जजमेंट से वह शब्द हटा लिए थे।
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वी रामास्वामी

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वी रामास्वामी
वी रामास्वामी पहले न्यायाधीश हैं जिनके खिलाफ 1993 में पहली बार महाभियोग चलाया गया था। उनके खिलाफ महाभियोग लोकसभा में लाया गया था लेकिन  दो तिहाई बहुमत न होने की वजह से गिर गया था। न्यायाधीश रामास्वामी 1990 में पंजाब और हरियाणा के मुख्य न्यायाधीश थे तब उनपर आधिकारिक तौर पर एलॉट किए गए घर पर कब्जा किए जाने का आरोप लगा था। 
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