दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में शुमार राफेल भारत आ चुके हैं। वायुसेना के गोल्डन ऐरो स्क्वाॅड्रन में शामिल होने वाले इन विमानों के आने से वायुसेना को चीन और पाकिस्तान पर बढ़त मिलेगी। राफेल का मुकाबला करने के लिए चीन के पास जे-20 और पाकिस्तान के पास एफ-16 विमान है। आइए जानते हैं कि तीनों में से कौन कितना शक्तिशाली है...
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पहाड़ी इलाके में उड़ान भरने में माहिर राफेल
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राफेल एयरक्राफ्ट
- फोटो : Amar Ujala
राफेल का विंग स्पैन (पंखों का फैलाव) सिर्फ 10.90 मीटर है, जो इसे पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने के लिए आदर्श एयरक्राफ्ट बनाता है। वहीं चीन के जे-20 का विंग स्पैन 13.50 मीटर और एफ-16 का विंग स्पैन 9.96 मीटर है।
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रडार को चकमा देने में माहिर
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राफेल एयरक्राफ्ट
- फोटो : Amar Ujala
रडार से बचने की क्षमता राफेल को खास बनाती है। राफेल का रडार सिस्टम 100 किमी दायरे में एक बार में 40 टारगेट की पहचान कर सकता है। वहीं, ए-16 का रडार 84 किमी दायरे में केवल 20 टारगेट को पहचान सकता है।
हर मौसम में ऑपरेशन को दे सकता है अंजाम
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राफेल एयरक्राफ्ट
- फोटो : Amar Ujala
राफेल हर मौसम में काम करने में सक्षम है, इसलिए इसे मल्टी रोल एयरक्राफ्ट के नाम से भी जाना जाता है।
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ऊंचाई हासिल करने में आगे...
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राफेल एयरक्राफ्ट स्क्वाड्रन
- फोटो : Amar Ujala
राफेल एक मिनट में 18000 मीटर की ऊंचाई पर जा सकता है। वहीं, पाक का एफ16- 15,240 मीटर व चीन का जे20- 18,240 मीटर ऊंचाई पर जा सकता है।
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70 लाख की एक हैमर मिसाइल
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राफेल एयरक्राफ्ट स्क्वाड्रन
- फोटो : Amar Ujala
राफेल में लगी हैमर मिसाइल हवा से सतह में मार कर सकती है। यह पलभर में किसी भी बंकर या ठिकाने को तबाह कर सकती है। कीमत 70 लाख रुपये।
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राफेल पाने वाला चौथा देश है भारत
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राफेल विमानों के साथ दो सुखोई विमान (पीछे की ओर)
- फोटो : twitter.com/IAF_MCC
4.5 पीढ़ी का यह विमान भारत के अलावा फ्रांस, मिस्र और कतर के पास है। मिराज 2000 या सुखोई तीसरी या फिर चौथी पीढ़ी के विमान हैं। राफेल एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सकता है।
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राफेल विमान में भरा गया ईंधन
- फोटो : ANI
दुश्मन के इलाके में भीतर तक जाकर हमला करने की क्षमता