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ऑपरेशन ट्राइडेंट: जब इंदिरा गांधी ने नौसेना प्रमुख से कहा- इफ देअर इज अ वॉर, देअर इज अ वॉर

Thu, 12 Dec 2019 05:25 PM IST
Priyesh Mishra बीबीसी हिंदी
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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
आज भारतीय नौसेना दिवस है। पूरा देश समुद्री सीमा की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अपने वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दे रहा है। इसी दिन साल 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान नौसेना ने पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को बर्बाद कर दिया था। जिससे लगी आग सात दिनों तक जलती रही थी। जानिए ऑपरेशन ट्राइडेंट को नौसेना ने कैसे दिया अंजाम और इंदिरा गांधी ने क्यों कहा था- वेल एडमिरल, इफ देअर इज अ वॉर, देअर इज अ वॉर:-
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भारतीय नौसेना का युद्धपोत - फोटो : Indian Navy
भारतीय नौसेना एक संतुलित त्रिआयामी शक्ति है, जो महासागरों की सतह पर, उसके ऊपर और उसके नीचे, हमारे राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है। भारतीय नौसेना भारतीय सशस्त्र बलों की समुद्री शाखा है और भारतीय नौसेना के कमांडर-इन-चीफ भारत के राष्ट्रपति हैं। 17वीं शताब्दी के मराठा सम्राट, छत्रपति शिवाजी भोसले को "भारतीय नौसेना का पिता" माना जाता है। 
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इंदिरा गांधी से मिलते तत्कालीन नौसेना प्रमुख - फोटो : Indian Navy
भारत पाकिस्तान के बीच 1971 की लड़ाई शुरू होने से दो महीने पहले अक्तूबर 1971 में तत्कालीन नौसेना अध्यक्ष एडमिरल एसएम नंदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिलने गए। नौसेना की तैयारियों के बारे में बताने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी से पूछा अगर नौसेना कराची पर हमला करें, तो क्या इससे सरकार को राजनीतिक रूप से कोई आपत्ति हो सकती है।

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indira gandhi - फोटो : PTI
इंदिरा गांधी ने हां या न कहने के बजाए सवाल पूछा कि आप ऐसा पूछ क्यों रहे हैं। नंदा ने जवाब दिया कि 1965 मे नौसेना से खास तौर से कहा गया था कि वह भारतीय समुद्री सीमा से बाहर कोई कार्रवाई न करें, जिससे उसके सामने कई परेशानियां उठ खड़ी हुई थीं।
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इंदिरा गांधी
इंदिरा गांधी ने कुछ देर सोचा और कहा कि वेल एडमिरल, इफ देयर इज अ वॉर, देअर इज अ वॉर। यानी अगर लड़ाई है तो लड़ाई है। एडमिरल नंदा ने उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि मैडम मुझे मेरा जवाब मिल गया।
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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
कराची पर हमले की योजना बनाई गई और एक दिसंबर 1971 को सभी पोतों को कराची पर हमला करने के सील्ड लिफाफे में आदेश दे दिए गए। भारतीय नौसेना का पूरा वेस्टर्न फ्लीट दो दिसंबर को मुंबई से कूच कर गया। उनसे कहा गया कि युद्ध शुरू होने के बाद ही वह उस सील्ड लिफाफे को खोलें।
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नौसेना - फोटो : Pak Navy website
योजना थी कि नौसैनिक बेड़ा दिन के दौरान कराची से 250 किलोमीटर के वृत्त पर रहेगा और शाम होते-होते उसके 150 किलोमीटर की दूरी पर पहुंच जाएगा। अंधेरे में हमला करने के बाद पौ फटने से पहले वह अपनी तीव्रतम रफ्तार से चलते हुए कराची से 150 दूर आ जाएगा, ताकि वह पाकिस्तानी बमवर्षकों की पहुंच से बाहर आ जाए।

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नौसेना का शौर्य
हमला भी रूस की ओसा क्लास मिसाइल बोट से किया जाएगा। वह वहां खुद से चल कर नहीं जाएंगी, बल्कि उन्हे नाइलोन की रस्सियों से खींच कर ले जाया जाएगा।

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आईएनएस निपात - फोटो : Indian Navy
ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत पहला हमला निपट, निर्घट और वीर मिसाइल बोट्स ने किया। प्रत्येक मिसाइल बोट चार-चार मिसाइलों से लैस थीं। स्क्वार्डन कमांडर बबरू यादव निपट पर मौजूद थे। बाण की शक्ल बनाते हुए निपट सबसे आगे था उसके पीछे बाईं तरफ निर्घट था और दाहिना छोर वीर ने संभाला हुआ था। उसके ठीक पीछे आईएनएस किल्टन चल रहा था।

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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
कराची से 40 किलोमीटर दूर यादव ने अपने रडार पर हरकत महसूस की। उन्हें एक पाकिस्तानी युद्ध पोत अपनी तरफ आता दिखाई दिया। उस समय रात के 10 बज कर 40 मिनट हुए थे। यादव ने निर्घट को आदेश दिया कि वह अपना रास्ता बदले और पाकिस्तानी जहाज पर हमला करे।

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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
निर्घट ने 20 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तानी विध्वंसक पीएनएस खैबर पर मिसाइल चलाई। खैबर के नाविकों ने समझा कि उनकी तरफ आती हुई मिसाइल एक युद्धक विमान है। उन्होंने अपनी विमान भेदी तोपों से मिसाइल को निशाना बनाने की कोशिश की लेकिन वह अपने को मिसाइल का निशाना बनने से न रोक सके।

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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
तभी कमांडर यादव ने 17 किलोमीटर की दूरी से खैबर पर एक और मिसाइल चलाने का आदेश दिया और किल्टन से भी कहा कि वह निर्घट के बगल में जाए। दूसरी मिसाइल लगते ही खैबर की गति शून्य हो गई। पोत में आग लग गई और उससे गहरा धुंआ निकलने लगा। थोड़ी देर में खैबर पानी में डूब गया। उस समय वह कराची से 35 नॉटिकल मील दूर था और समय था 11 बजकर 20 मिनट।

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पाकिस्तानी नौसेना - फोटो : Social Media
उधर निपट ने पहले वीनस चैलेंजर पर एक मिसाइल दागी और फिर शाहजहां पर दूसरी मिसाइल चलाई। वीनस चैलेंजर तुरंत डूब गया जबकि शाहजहां को नुकसान पहुंचा। तीसरी मिसाइल ने कीमारी के तेल टैंकर्स को निशाना बनाया जिससे दो टैंकरों में आग लग गई।

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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
इस बीच वीर ने पाकिस्तानी माइन स्वीपर पीएन एस मुहाफिज पर एक मिसाइल चलाई जिससे उसमें आग लग गई और वह बहुत तेजी से डूब गया। इस हमले के बाद से पाकिस्तानी नौसेना सतर्क हो गई और उसने दिन रात कराची के चारों तरफ छोटे विमानों से निगरानी रखनी शुरू कर दी।

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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
छह दिसंबर को नौसेना मुख्यालय ने पाकिस्तानी नौसेना का एक संदेश पकड़ा जिससे पता चला कि पाकिस्तानी वायुसेना ने एक अपने ही पोत पीएनएस ज़ुल्फिकार को भारतीय युद्धपोत समझते हुए उस पर ही बमबारी कर दी।

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भारतीय नौसेना - फोटो : ANI
पश्चिमी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग एडमिरल कुरुविला ने कराची पर दूसरा मिसाइल बोट हमला करने की योजना बनाई और उसे ऑपरेशन पाइथन का नाम दिया गया। इस बार अकेली मिसाइल बोट विनाश, दो फ्रिगेट्स त्रिशूल और तलवार के साथ गई। आठ दिसंबर 1971 की रात आठ बजकर 45 मिनट का समय था। आईएनएस विनाश पर कमांडिंग आफिसर विजय जेरथ के नेतृत्व में 30 नौसैनिक कराची पर दूसरा हमला करने की तैयारी कर रहे थे।

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navy
तभी बोट की बिजली फेल हो गई और कंट्रोल ऑटोपाइलट पर चला गया। वह अभी भी बैटरी से मिसाइल चला सकते थे लेकिन वह अपने लक्ष्य को रडार से देख नहीं सकते थे। वह अपने आप को इस संभावना के लिए तैयार कर ही रहे थे कि करीब 11 बजे बोट की बिजली वापस आ गई।

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भारतीय नौसेना
जेरथ ने रडार की तरफ देखा। एक पोत धीरे धीरे कराची बंदरगाह से निकल रहा था। जब वह पोत की पोजीशन देख ही रहे थे कि उनकी नजर कीमारी तेल डिपो की तरफ गई। मिसाइल को जांचने-परखने के बाद उन्होंने रेंज को मैनुअल और मैक्सिमम पर सेट किया और मिसाइल फायर कर दी। जैसे ही मिसाइल ने तेल टैंकरों को हिट किया वहां जैसे प्रलय ही आ गई।

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पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज पर पाक आर्मी चीफ - फोटो : Social Media
जेरथ ने दूसरी मिसाइल से पोतों के एक समूह को निशाना बनाया। वहां खड़े एक ब्रिटिश जहाज हरमटौन में आग लग गई और पनामा का पोत गल्फ स्टार बर्बाद होकर डूब गया। चौथी मिसाइल पीएनएस ढाका पर दागी गई लेकिन उसके कमांडर ने कौशल और बुद्धि का परिचय देते हुए अपने पोत को बचा लिया। 

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कराची बंदरगाह - फोटो : Map
कराची के तेल टैंकरों में आग
लेकिन कीमारी तेल डिपो में लगी आग की लपटों को 60 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता था। ऑपरेशन खत्म होते ही जेरथ ने संदेश भेजा, 'फोर पिजंस हैपी इन द नेस्ट। रिज्वाइनिंग'। उनको जवाब मिला, 'एफ 15 से विनाश के लिए: इससे अच्छी दिवाली हमने आज तक नहीं देखी।' कराची के तेल डिपो में लगी आग को सात दिनों और सात रातों तक नहीं बुझाया जा सका।
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नौसेना का शौर्य - फोटो : Social Media
अगले दिन जब भारतीय वायु सेना के विमान चालक कराची पर बमबारी करने गए तो उन्होंने रिपोर्ट दी कि यह एशिया का सबसे बड़ा बोनफायर था।’ कराची के ऊपर इतना धुआं था कि तीन दिनों तक वहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंच सकी।
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