पाकिस्तान और चीन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना अपने नवीनतम हथियार प्रणालियों को सीमा पर तैनाती की योजना बना रही है। अक्तूबर माह में अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा के निकट होने वाले युद्ध अभ्यास में भारतीय सेना M 777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर और वायुसेना चिनूक हैवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों को शामिल करेगी।
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Yudh Abhyas
- फोटो : Indian Army Twitter
हिम विजय नाम का यह युद्धक अभ्यास मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश में नव-निर्मित 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर की युद्ध लड़ने की क्षमताओं का परीक्षण करेगा। इस अभ्यास में भारतीय वायु सेना भी शामिल होगी जो वास्तविक युद्ध स्थिति के अभ्यासों के लिए हवाई सुरक्षा प्रदान करेगी।
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गोले दागता बोफोर्स
- फोटो : Indian Army
सेना के वरिष्ठ सूत्रों ने एएनआई को बताया कि हिम विजय युद्ध अभ्यास के दौरान 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स को M777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर के साथ तैनात किया जाएगा जिससे सेना दुश्मन के खिलाफ तेज और निर्णायक कार्रवाई कर सके।
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चिनूक
- फोटो : IAF
इस युद्धाभ्यास में अमेरिकी हैवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर चिनूक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इससे M-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर को ऊंचाई वाले इलाकों में एयरलिफ्ट करके जल्दी से तैनात करने की क्षमताओं का परीक्षण किया जा सके।
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चिनूक
- फोटो : IAF
इन हेलिकॉप्टरों को औपचारिक रूप से 25 मार्च को चंडीगढ़ एयरबेस में वायु सेना में शामिल किया गया था। चिनूक को अभी तक वायु सेना द्वारा पूर्वोत्तर में शामिल नहीं किया गया है।
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हॉवित्जर
- फोटो : अमर उजाला
वहीं M777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर को K-9 वज्र हॉवित्जर के साथ भारतीय सेना में शामिल किया गया है।
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के9 वज्र और एम777 होवित्जर
- फोटो : pti
नौ नवंबर 2018 को तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में नासिक के देवलाली तोपखाना केंद्र पर ‘K9 वज्र और M777 होवित्जर' तोपों को सेना में शामिल किया गया था।
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के9 वज्र और एम777 होवित्जर
- फोटो : pti
पाकिस्तान और चीन की सीमा पर मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर इस तोप की जरूरत काफी समय पहले से महसूस की जा रही थी। आखिरी बार भारतीय सेना में बोफोर्स तोप को शामिल किया गया था। K9 वज्र की पहली रेजीमेंट इस साल के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है।
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के9 वज्र और एम777 होवित्जर
- फोटो : pti
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 'के9 वज्र को 4,366 करोड़ रूपये की लागत से शामिल किया गया है। यह कार्य नवंबर 2020 तक पूरा होगा। कुल 100 तोपों में 10 तोपों के पहली खेप को सेना में शामिल किया गया है।
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चिनूक
- फोटो : ANI
अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा बनाए गए चिनूक सीएच-47आई हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर से भारत की सामरिक शक्ति बढ़ेगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत है तेज गति। पहले चिनूक ने 1962 में उड़ान भरी थी। यह एक मल्टीमिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है।
चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना की खास ताकत है। इसी चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था। वियतनाम से लेकर इराक के युद्धों तक शामिल चिनूक दो रोटर वाला हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर है।