इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को उनकी बेटी आरुषि के कत्ल के आरोपों से बरी कर दिया है। ये केस कत्ल के उन मामलों में गिना जाता है, जिसने लंबे समय तक आम लोगों को लंबे समय तक झकझोरे रखा।
यूं तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरों के आंकड़ों पर जाएं तो भारत भर में हजारों कत्ल के मामले दर्ज किए जाते हैं, लेकिन मीडिया की दिलचस्पी हर केस में नहीं होती। अलग-अलग वजहों से मीडिया कुछ चुनिंदा मामलों में सक्रियता दिखलाता है और ये मुकदमे सुर्खियों में लंबे समय तक बने रहते हैं जैसे आरुषि हत्याकांड।
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शीना बोरा मर्डर केस
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शीना बोरा नाम की एक लड़की की हत्या अप्रैल, 2012 में होती है। उनकी मौत के तीन साल बाद केस खुलता है और जांच शुरू होती है। शक की सुई शीना की मां इंद्राणी मुखर्जी और सौतेले पिता और मशहूर मीडिया हस्ती पीटर मुखर्जी पर जाती है। पुलिस दोनों को गिरफ्तार करती है। इस मामले की जांच पहले मुंबई पुलिस कर रही थी। बाद में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया। स्टेटस: केस पेंडिंग।
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सुनंदा पुष्कर मर्डर
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17 जनवरी 2014 को कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर का शव दिल्ली के एक होटल में पाया गया था। मूलतः कश्मीर की रहने वालीं सुनंदा के पिता पीएन दास भारतीय सेना में वरिष्ठ अधिकारी थे। शशि थरूर के साथ उनकी तीसरी शादी थी।एम्स की फारेसिंक रिपोर्ट के मुताबिक सुनंदा पुष्कर की मौत ड्रग्स के ओवरडोज के चलते हुई थी। दिल्ली पुलिस का एक विशेष जांच दल सुनंदा के मौत की जांच कर रहा है।
रिजवानुर रहमान की मौत
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21 दिसंबर, 2007 को कोलकाता में एक रेलवे ट्रैक पर रिजवानुर रहमान की लाश पाई गई थी। पुलिस ने शुरू में कहा कि रिजवानुर ने खुदकुशी की है लेकिन बाद में शक की सुई रिजवानुर की पत्नी प्रियंका तोड़ी के उद्योगपति पिता अशोक तोड़ी की तरफ उठी। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। इस साल अगस्त में कलकत्ता हाई कोर्ट ने अशोक तोड़ी की आरोपों से बरी किए जाने के लिए दायर याचिका खारिज कर दी थी।
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निठारी हत्याकांड
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29 दिसंबर 2006 को दिल्ली से सटे नोएडा में पंढेर के घर के पीछे के नाले से पुलिस ने 19 कंकाल बरामद किए थे।इन 19 में से 176 मामलों पर पंढेर और कोली के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
बहुचर्चित निठारी कांड मामले में सीबीआई की एक स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके घरेलू नौकर सुरिंदर कोली को फांसी की सजा सुनाई है।
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शिवानी भटनागर मर्डर केस
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दिल्ली के अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' में काम करने वाली पत्रकार शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को उनके पूर्वी दिल्ली स्थित अपार्टमेंट में हत्या कर दी गई थी। करीब नौ साल बाद अदालत ने 18 मार्च 2008 को फैसला सुनाते हुए पूर्व आईपीएस अधिकारी रविकांत शर्मा समेत अन्य अभियुक्तों को आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी करार दिया।इस मामले में बीजेपी के कद्दावर नेता रहे प्रमोद महाजन का नाम भी आया लेकिन उन्होंने शिवानी भटनागर से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था। अक्टूबर, 2011 में दिल्ली हाई कोर्ट ने रविकांत शर्मा और अन्य दो अभियुक्तों को बरी कर दिया लेकिन एक अभियुक्त की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की लॉ स्टूडेंट रहीं प्रियदर्शिनी मट्टू का शव 23 जनवरी, 1996 में दिल्ली स्थित उनके चाचा के घर पर पाया गया था। साल 1999 में निचली अदालत ने उनके कातिल और कॉलेज के सीनियर संतोष कुमार सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। लेकिन अक्तूबर, 2006 में दिल्ली हाई कोर्ट ने संतोष कुमार सिंह को मौत की सजा सुनाई थी। लगभग चार साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को उम्रकैद में बदल दिया।