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PM मोदी करेंगे देश के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन, चलेंगे सेना के टैंक!

Mon, 15 May 2017 09:37 AM IST
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला
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ये है देश का सबसे लंबा पुल - फोटो : WikiMedia
अगर आपसे पूछा जाए कि देश में सबसे लंबा पुल कौन सा है? तो आप बांद्रा-वर्ली सी लिंक का नाम लेंगे। पर अपनी जानकारी दुरुस्त कर लीजिए। भारत ने अपना सबसे लंबा पुल असम में बना लिया है, जो चीनी सीमा को कवर कर सकेगा। खास बात ये है कि भारतीय सेना को अबतक पूर्वोत्तर में सैन्य समान पहुंचाने में जो दिक्कतें होती थी, वो भी अब खत्म हो चली है। इस पुल से भारतीय सेना के टैंक भी गुजरेंगे, जो जरूरत पड़ने पर किसी भी विदेशी हमले का मुंहतोड़ जवाब देंगे। इस पुल का उद्घाटन 26 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

भारत का ये सबसे लंबा पुल असम में बन चुका है। ये लोहित नदी पर बना है, जो ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी है। इस पुल की लंबाई 9.15 किमी है, जो बांद्रा-कुर्ली सी लिंक से भी 3.55 किमी ज्यादा है। इस पुलिस को 26 मई को खोल दिया जाएगा।
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देश के इस सबसे लंबे पुल का पीएम करेंगे उद्धाटन

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पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन - फोटो : Indian Express
लोहित नदी पर ढोला-सादिया के बीच बना ये पुल बेहद मजबूत है। इसे भारतीय सेना की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। तभी तो, ये पुल 60 टन वजनी टैंकों का भार सहन कर भारतीय सेना को मजबूत करने में सक्षम है।
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26 मई से खुल जाएगा ये पुल - फोटो : getty images
भारत को इस पुल की जरूरत इसलिए भी थी, क्योंकि सीमा के पास चीन तेजी से बुनियादी क्षमताओं का विस्तार कर रहा था। जब भारत के पास असम-अरुणाचल को जोड़कर सैनिक साजोसामान सड़क के रास्ते पहुंचाने की खास व्यवस्था नहीं थी। 

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि इस पुल का उद्धाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मई को करेंगे। इस पुल से असम और अरुणाचल के लोगों को बेहद फायदा पहुंचेगा, साथ ही ये पुल भारतीय सुरक्षा बलों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। 
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करीब 950 करोड़ की आई है लागत - फोटो : getty images
सोनोवाल ने कहा कि असम और अरुणाचल प्रदेश हमारे देश के लिए स्टेटजिक तौर पर बेहद गंभीर राज्य हैं। साथ ही ये पुल चीन के साथ लगी सीमा के भी पास है। ऐसे में इससे मिलिटरी सामानों और गोला बारूद को समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी।

बता दें कि ये पुल साल 2011 में बनना शुरू हुआ था, जिसकी लागत 950 करोड़ आई है। ये पुल खासतौर पर मिलिटरी मूवमेंट को झेलने लायक बनाया गया है। 
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