आज 5 सितंबर है, जी हां शिक्षक दिवस। इस दौरान अध्यापन से जुड़े रहे तमाम शिक्षकों के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे लेकिन हम आज आपको रूबरू कराते हैं कुछ ऐसे नामों से जो शिक्षण में नहीं राजनीति में अपनी छाप छोड़ गए। उनकी राजनीतिक नर्सरी से निकले नामों ने बाद में देश की राजनीति को काफी हद तक प्रभावित किया। तो चलिए आपको बताते हैं उन शिक्षकों के बारे में-
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जय प्रकाश नारायण
जय प्रकाश नारायण
जय प्रकाश नारायण... जी वही जिन्हें आमतौर पर लोग जेपी के नाम से जानते हैं। जेपी की पहचान भारतीय राजनीति में एक ऐसे बुजुर्ग के रूप में है जिसने भारतीय राजनीति की चूलें हिला दी और एक दौर में सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी को उनकी कुर्सी से बेदखल कर दिया। जेपी के संपूर्ण क्रांति के आंदोलन से नेताओं की ऐसी फौज निकली जो आज भी काफी हद तक देश की राजनीति को प्रभावित करती है। जेपी के आंदोलन से ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, मुख्तार अब्बास नकवी और मुलायम सिंह जैसे दिग्गज नेता निकले।
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राम मनोहर लोहिया
राम मनोहर लोहिया
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रखर समाजवादी चिंतक राममनोहर लोहिया ने भारत की राजनीति को गैर कांग्रेसवाद की नई सोच दी। लोहिया ने खुद तो राजनीति में कभी किसी बड़े पद की चाह नहीं की लेकिन उनके सिखाए शिष्यों ने जरूर राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह उनके बड़े शिष्य माने जाते हैं। इसके अलावा भी राजनीति में लोहिया के कई और शिष्य आज स्थापित मुकाम पा चुके हैं।
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चंद्रास्वामी
चंद्रास्वामी
यूं तो चंद्रास्वामी का राजनीति से कभी सीधा वास्ता नहीं रहा लेकिन अपने एक शिष्य के चलते एक दौर में वह देश की राजनीति में सबसे जाना पहचाना नाम बन गए थे। ये शिष्य थे पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव। चंद्रास्वामी को नरसिम्हा राव का राजनीतिक गुरु कहा जाता है। माना जाता है एक दौर में नरसिम्हा राव बिना चंद्रास्वामी से पूछे कोई फैसला नहीं लिया करते थे। नरसिम्हा राव के अलावा कई और बड़े नेता भी चंद्रास्वामी के शिष्य रहे हैं।
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अन्ना हजारे
अन्ना हजारे
प्रसिद्ध गांधीवादी अन्ना हजारे हमेशा राजनीति से दूर रहे लेकिन ये विडंबना ही कही जाएगी कि उनके आंदोलनों में सबसे आगे रहे उनके शिष्य आज देश की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल कर चुके हैं। चाहे वो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हों या उनके नायब मनीष सिसौदिया। केंद्रीय मंत्री और पूर्व सैन्य जनरल वीके सिंह भी अन्ना हजारे के शिष्य रह चुके हैं तो भाजपा की बड़ी नेता और वर्तमान में पुडुचेरी की उप राज्यपाल किरण बेदी भी अन्ना की शिष्या रह चुकी हैं।
एमजी रामचंद्रन यानि मरूथुर गोपालन रामचंद्रन दक्षिण भारत की राजनीति में एक बड़ा नाम रहे हैं। हालांकि उनकी शुरूआती पहचान एक फिल्म अभिनेता और निर्माता निर्देशक की रही है। लेकिन एक बार फिल्मों को छोड़कर रामचंद्रन राजनीति में आए तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने खुद की पार्टी AIADMK की स्थापना की। इसके बाद वह अपनी शिष्या और तबकी प्रसिद्ध अभिनेत्री रही जे जयललिता को राजनीति में लेकर आए। बाद में रामचंद्रन के नक्शेकदम पर चलकर ही जयललिता ने दशकों तक तमिलनाडु की राजनीति पर राज किया।