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दो साल में आठ 'ब्लू फ्लैग' पाने वाला एशिया का पहला देश है भारत, जानें क्या हैं इसके मानक और लाभ

Mon, 12 Oct 2020 04:37 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शिवराजपुर बीच (गुजरात) - फोटो : Twitter - @PBNS_India
देश के आठ समुद्री बीच (तट) स्वच्छता का सर्वोच्च मानक कहे जाने वाले प्रतिष्ठित ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन के मानकों पर खरा उतरे हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने रविवार को इन सभी बीच को ब्लू फ्लैग मिलने की घोषणा की। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन 50 देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास ब्लू फ्लैग दर्जे वाले स्वच्छ समुद्री तट मौजूद हैं। साथ ही भारत को तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ‘इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिस’ के तहत तीसरे पुरस्कार के लिए भी चुना गया है।
 
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कासरकोड बीच (कर्नाटक) - फोटो : Twitter - @PBNS_India
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने दावा किया है कि दुनिया के किसी भी देश के 8 बीच एक ही बार में ब्लू फ्लैग दर्जा पाने में सफल नहीं रहे हैं।  जावडेकर ने आठ समुद्र तटों को ब्लू फ्लैग मिलने को देश के लिए गर्व का पल बताया है। उन्होंने कई ट्वीट करते हुए कहा, यह दर्जा भारत के संरक्षण और सतत विकास प्रयासों को एकतरह से वैश्विक मान्यता मिलना है। उन्होंने भारत को दावा किया कि भारत एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में महज 2 साल के अंदर ब्लू फ्लैग दर्जा हासिल करने वाला पहला देश भी बन गया है।
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रुशिकोंडा बीच (आंध्र प्रदेश) - फोटो : Twitter - @PBNS_India
मान्यता प्राप्त ईको-लेबल में से एक
ब्लू फ्लैग कार्यक्रम का संचालन डेनमार्क का ‘फाउंडेशन फॉर एनवायरमेंट एजुकेशन’ करता है। इसे वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त ईको-लेबल में से एक माना जाता है। साल 2018 में पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देश के 13 समुद्री तटों को ब्लू फ्लैग के लिए चिह्नित किया था। इनमें से फिलहाल 8 के नाम 18 सितंबर को भेजे गए थे, जिन्हें मानकों पर पूरी तरह खरा पाया गया।

पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, देश के पांच राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में फैले इन आठ समुद्री तटों को एक इंटरनेशनल ज्यूरी ने ब्लू फ्लैग के लिए चुना है। इस ज्यूरी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी), संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनटीडब्ल्यूओ), फाउंडेशन फॉर एनवायरमेंटल एजुकेशन (एफईई) और इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के सदस्य शामिल थे।

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गोल्डन बीच (ओडिशा) - फोटो : Twitter - @PBNS_India
एशिया का महज चौथा देश बना भारत
भारत ब्लू फ्लैग दर्जे वाले समुद्री तटों वाला एशिया का महज चौथा देश बन गया है। पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक, एशिया में अब तक महज जापान, दक्षिण कोरिया और यूएई के तट ही इस सूची में मौजूद थे, लेकिन इन देशों को यह दर्जा पाने में 5 से 6 साल का समय लगा था। इस समय ब्लू फ्लैग सूची में स्पेन पास दुनिया में सबसे ज्यादा 566 समुद्र तट हैं, जबकि ग्रीस के 515 और फ्रांस के 395 तटों को यह दर्जा मिला हुआ है।
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राधानगर बीच (अंडमान और निकोबार) - फोटो : Twitter - @PBNS_India
इन भारतीय तटों को मिला ब्लू फ्लैग
शिवराजपुर बीच (गुजरात), गोल्डन बीच (ओडिशा), घोघाला बीच (दीव), पादुबिदरी बीच और कासरकोड बीच (कर्नाटक), कप्पड़ बीच (केरल), रुशिकोंडा बीच (आंध्र प्रदेश) और राधानगर बीच (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह)।
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कप्पड़ बीच (केरल) - फोटो : Twitter - @PBNS_India
यह हैं मानक और यह होगा लाभ
किसी भी समुद्री तट ब्लू फ्लैग देने के लिए 33 मानक तैयार किए गए हैं। इनमें पर्यावरणीय शिक्षा और जानकारी, पानी की गुणवत्ता, पर्यावरण प्रबंधन व संरक्षण तथा सुरक्षा के साथ ही अपशिष्ट निस्तारण, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा और पालतू जानवरों पर प्रतिबंध जैसे कुछ मानक प्रमुख हैं।

ब्लू फ्लैग दर्जा पाने के लिए नामों की सिफारिश एक स्वतंत्र राष्ट्रीय ज्यूरी करती है, जिसमें प्रमुख पर्यावरणविद और वैज्ञानिक शामिल होते हैं। ब्लू फ्लैग दर्जा पाने वाले समुद्र तटों को दुनिया के सबसे स्वच्छ बीच में से एक माना जाता है। ऐसे में इन तटों पर पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होती है। खासतौर पर विदेशी पर्यटक किसी भी समुद्र तट पर जाने से पहले सामान्य तौर पर इस मानक को परखते हैं।
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