प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच उर्जा, व्यापार और रक्षा के क्षेत्र में कई समझौते हुए। आने वाले दिनों में दोनों देश सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की रेंज को 290 किलोमीटर से बढ़ाकर 600 किलोमीटर करने की दिशा में काम करेंगे। इससे न केवल पूरा पाकिस्तान इस मिसाइल की जद में होगा बल्कि कोई भी टारगेट पलभर में इस मिसाइल से तबाह किया जा सकेगा।
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ब्रह्मोस मिसाइल
- फोटो : Brahmos Aerospace
ब्रह्मोस कम दूरी की रैमजेट इंजन युक्त, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, लड़ाकू विमान से या जमीन से दागा जा सकता है।
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ब्रह्मोस मिसाइल
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रैमजेट इंजन की मदद से मिसाइल की क्षमता तीन गुना तक बढ़ाई जा सकती है। अगर किसी मिसाइल की क्षमता 100 किमी दूरी तक है तो उसे रैमजेट इंजन की मदद से 320 किमी तक किया जा सकता है।
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ब्रह्मोस मिसाइल
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रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है।
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ब्रह्मोस मिसाइल
- फोटो : Brahmos Aerospace
ब्रह्मोस मिसाइल का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की गति ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना अधिक है।
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ब्रह्मोस मिसाइल
- फोटो : Brahmos Aerospace
हवा से सतह पर मार करने में सक्षम 2.5 टन वजनी ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 300 किलोमीटर है। इसके एयर लॉन्च वर्जन का परीक्षण लगातार चल रहा है। वायुसेना के सुखोई लड़ाकू विमान से इसके कई सफल फायर ट्रायल को आयोजित किया जा चुका है।
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ब्रह्मोस मिसाइल
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ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ध्वनि के वेग से करीब तीन गुना अधिक 2.8 मैक गति से लक्ष्य पर प्रहार करती है। इसके दागे जाने के बाद दुश्मन को संभलने का मौका भी नहीं मिलता है।
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ब्रह्मोस मिसाइल -2
- फोटो : Brahmos Aerospace
ब्रह्मोस मिसाइल को दिन अथवा रात तथा हर मौसम में दागा जा सकता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता अचूक होती है।
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ब्रह्मोस मिसाइल
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वर्तमान में चीन और पाकिस्तान के पास अभी तक ऐसी मिसाइल नहीं है जिसे ज़मीन, समुद्र और आसमान तीनों जगहों से दागा जा सके। वर्तमान में भारत और रूस इस मिसाइल की मारक दूरी बढ़ाने के साथ इसे हाइपरसोनिक गति पर उड़ाने पर भी काम कर रहे हैं।
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ब्रह्मोस मिसाइल
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किसी मिसाइल के 'हाइपरसोनिक' होने का मतलब है कि उसकी इंजन की गति 6,200 किमी प्रति घंटा से अधिक है। इस मिसाइल में लगने वाले रैमजेट इंजन में सॉलिड फ़्यूल का इस्तेमाल किया जाता है।
ब्रह्मोस एयरस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्र ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) का सदस्य होने के नाते अब भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल की मारक दूरी को बढ़ाने के लिए काम करेंगे।