प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी हर बात में 125 करोड़ हिंदुस्तानियों की बात करते हैं लेकिन भाजपा के ही एक नेता का मानना है कि भारत की आबादी 150 करोड़ को पार कर चुकी है। इतना ही नहीं, दिल्ली भाजपा के इस नेता अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि भारत की हर बीमारी का इलाज अनियंत्रित रूप से बढ़ती हुई जनसंख्या है और अगर भारत को अपनी समस्याओं को हल करना है तो उसे चीन की तरह कठोर जनसंख्या नीति लागू करनी पड़ेगी।
इसके लिए उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी दायर कर चुके हैं। उनकी सरकार से मांग है कि सरकार आगामी संसद सत्र में "हम दो, हमारे दो" की नीति को लागू करने के लिए कानून बनाये। रविवार को दिल्ली के इंडिया गेट पर जनसंख्या हेतु कानून की मांग में एक अभियान शुरू करते हुए अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि हमारे देश में 122 करोड़ लोगों के पास आधार है जबकि लगभग 25 करोड़ लोग (20%) बिना आधार के हैं। और लगभग 5 करोड़ अवैध घुसपैठिये हमारे देश में रहते रहते हैं।
अर्थात हमारे देश की जनसँख्या सवा सौ करोड़ नहीं, बल्कि डेढ़ सौ करोड़ है और हम चीन से आगे निकल चुके हैं। उपाध्याय ने कहा कि जल जंगल और जमीन की समस्या, रोटी कपड़ा और मकान की समस्या, गरीबी और बेरोजगारी की समस्या, भुखमरी और कुपोषण की समस्या, वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण की समस्या का मूल कारण भी जनसँख्या विस्फोट ही है। उन्होंने कहा कि बस, रेल, थाना, तहसील और सुप्रीम कोर्ट में भीड़ का मूल कारण भी जनसँख्या विस्फोट है। देश में चोरी डकैती और झपटमारी का कारण भी जनसंख्या वृद्धि ही है।
उपाध्याय के मुताबिक कृषि योग्य भूमि दुनिया की 2%, पीने योग्य पानी मात्र 4% और जनसँख्या दुनिया की 20 फीसदी है। क्षेत्रफल चीन का एक तिहाई और जनसँख्या वृद्धि की दर चीन की तीन गुना है। चीन में प्रति मिनट 11 बच्चे पैदा होते हैं और भारत में प्रति मिनट 33 बच्चे पैदा होते हैं। अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत की दयनीय स्थिति का मुख्य कारण जनसँख्या विस्फोट है। उन्होंने कहा कि इन तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही संविधान समीक्षा आयोग (जस्टिस वेंकटचलैया आयोग) ने 2002 में संविधान में संशोधन कर आर्टिकल 47A जोड़ने और जनसँख्या नियंत्रण कानून बनाने का सुझाव दिया था जिसे आजतक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार कठोर जनसंख्या नीति लागू करती है तब इन सारी समस्याओं का निदान हो सकता है।