जम्मू-कश्मीर के उड़ी में आतंकवादी हमले में 18 जवान शहीद हो गए। सेना के अधिकारियों की जांच में इस हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के सबूत मिले हैं। इसके बाद से भारत, पाकिस्तान के ऊपर दबाव बनाया है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को 'आतंवादी देश' घोषित करने की मांग कर रहा है।
जवानों के शहीद होने के बाद से भारत, पाकिस्तान को चारों तरफ से घेरने की योजना बना रहा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय दबाव से लेकर सेना पर जवानों की मुस्तैदी तक शामिल है। हमले के बाद भारत और पाकिस्तान में 1960 में हुए 'सिंधु जल समझौते' पर भी बात होने लगी है। सोशल साइट्स से लेकर अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग इस समझौते को तोड़ने की बात कर रहे हैं।
जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान में हुए समझौते के मुताबाकि सिंधु, झेलम, चेनाब, ब्यास, रावी और सतलज नदी के पानी में हिस्सादारी हुई है। सिंधु, झेलम और चेनाब का अधिकतर पानी पाकिस्तान को मिलता है, जबकि व्यास, सतलज और रावी का अधिकर पानी भारत को मिलता है। दूसरी तरफ से देखें तो इन छह नदियों के पानी का 80 फीसदी हिस्सा पाकिस्तान को और 20 फीसदी हिस्सा जम्मू-कश्मीर को मिलता है।
यदि किन्हीं परिस्थितियों में 'सिंधु जल समझौता' रद्द हो जाता है तो पाकिस्तान पर इस तरह का असर पड़ सकता है...
विज्ञापन
2 of 7
सिंधु जल समझौता
पाकिस्तान की अखबर दैनिक ट्रिब्यून ने पिछले दिनों एक आर्टिकल में कहा था का कि सिंधु के पानी के बगैर पाकिस्तान का एक हिस्सा रेगिस्तान बन सकता है।
विज्ञापन
3 of 7
सिंधु जल समझौता
कुछ लोग इस समझौते को 'जल परमाणु' की भी संज्ञा देते हैं। कहा जाता है कि यह समझौता तोड़ देने से पाकिस्तान को बिना हथियारों से हराया जा सकता है।
4 of 7
सिंधु जल समझौता
पाकिस्तान सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों में पानी आधारित बिजली उत्पादन का प्रोजेक्ट चला रहा है। ऐसे में ये समझौता रद्द होता है तो पहले से बिजली के लिए संघर्ष कर रहे पाकिस्तान में हाहाकार मच जाएगा।
विज्ञापन
5 of 7
सिंधु जल समझौता
सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के सहारे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर सिंचाई होती है। इस समझौते के रद्द होने से पाकिस्तान के किसानों को संकट का सामना कर सकता है।
विज्ञापन
6 of 7
सिंधु जल समझौता
इन तीनों नदियों के सहारे पाकिस्तान में कुछ और तरह के उद्योग चलते हैं, ऐसे में यह समझौता रद्द होने से पहले से कर्ज में डूबे पाकिस्तान के लिए और मूसीबत खड़ी हो सकती है।