लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से इस विधानसभा चुनाव की हार को देखा जाए तो मंडी को छोड़कर सभी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। इनमें केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर का क्षेत्र हमीरपुर और कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का क्षेत्र मंडी भी है। आइए जानते हैं अनुराग ठाकुर कितनी सीटें भाजपा को दिला पाए? भाजपा के अन्य दोनों सांसदों का क्या रहा रिपोर्ट कार्ड?
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश में भाजपा के हाथ से सत्ता चली गई। 12 नवंबर को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे गुरुवार को घोषित हो गए। इस बार भाजपा 25 सीटों पर ही सिमट गई। कांग्रेस के 40 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। अब हिमाचल देश का छठवां राज्य होगा, जहां कांग्रेस सत्ता में होगी। इनमें तीन राज्य ऐसे हैं, जहां कांग्रेस गठबंधन के साथ सरकार में है।
हिमाचल प्रदेश की इस हार के काफी सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। खासतौर पर 2024 लोकसभा चुनाव को देखते हुए। सूबे में चार लोकसभा सीटें हैं। 2019 में इनमें चारों सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि, 2021 में हुए मंडी उपचुनाव में कांग्रेस की प्रतिभा सिंह यहां से जीत गई थीं।
अगर लोकसभा क्षेत्र के हिसाब से इस विधानसभा चुनाव की हार को देखा जाए तो मंडी को छोड़कर सभी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। इनमें केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर का क्षेत्र हमीरपुर और कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का क्षेत्र मंडी भी है। आइए जानते हैं अनुराग ठाकुर कितनी सीटें भाजपा को दिला पाए? भाजपा के अन्य दोनों सांसदों का क्या रहा रिपोर्ट कार्ड?
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अनुराग ठाकुर
- फोटो : सोशल मीडिया
शुरुआत अनुराग ठाकुर से करते हैं
केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रौद्योगिकी, युवा कल्याण एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर की लोकसभा क्षेत्र में कुल 17 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें श्रीनैना देवीजी, घुमारवीं, बिलासपुर, झंडूता, कुटलैहड़, ऊना, हरोली, गगरेट, चिंतापूर्णी, नादौन, बड़सर, हमीरपुर, सुजानपुर, भोरंज, धरमपुर, जसवान परागपुर, डेहरा सीट शामिल है। हमीरपुर में पांच सीटें भाजपा ने जीतीं, दो पर निर्दलियों को जीत मिली।
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सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर
- फोटो : social media
वहीं, दस सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। जिन 12 सीटों पर कांग्रेस या फिर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की उनमें डेहरा , धरमपुर, भोरंज, हरोली, गगरेट, चिंतापूर्णी, नादौन, बड़सर, हमीरपुर, सुजानपुर, कुटलैहड़, घुमारवीं शामिल हैं।भाजपा केवल पांच सीट जसवां परागपुर, ऊना, झंडूता, बिलासपुर और श्रीनैना देवीजी ही जीत पाई। यही नहीं, अनुराग ठाकुर अपने पैतृक क्षेत्र भोरंज, आवासीय क्षेत्र हमीरपुर और पिता प्रेमसिंह धूमल की सीट सुजानपुर भी भाजपा को नहीं जीता पाए।
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भाजपा सांसद किशन कपूर
- फोटो : अमर उजाला
अब कांगड़ा सांसद किशन कपूर के क्षेत्र का रिजल्ट भी देख लेते हैं
कांगड़ा लोकसभा के दायरे में कुल 17 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 12 सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई, जबकि पांच पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने सफलता हासिल की। कांगड़ा लोकसभा से भारतीय जनता पार्टी के किशन कपूर सांसद हैं। किशन कपूर का परफॉरमेंस भी काफी खराब रहा। कपूर अपनी लोकसभा की ज्यादातर सीटें हार गए। कांग्रेस ने जिन सीटों पर जीत हासिल की, उनमें भाट्टियात, बैजनाथ, चंबा, इंदौरा, फतेहपुर, ज्वाली, ज्वालामुखी, जयसिंहपुर, नगरोटा, शाहपुर, धर्मशाला, पालमपुर शामिल हैं। जबकि, जहां से भाजपा प्रत्याशियों की जीत हुई, उनमें चुरह, डलहौजी, नुरपूर, सुलह, कांगड़ा सीट शामिल हैं।
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सुरेश कुमार कश्यप, सांसद शिमला
- फोटो : अमर उजाला
शिमला में सबसे बुरा हाल
शिमला लोकसभा से सुरेश कुमार कश्यप सांसद हैं। इस लोकसभा सीट के दायरे में 17 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। यहां भाजपा केवल तीन सीटें जीत सकी। एक सीट पर निर्दलीय केएल ठाकुर जीतने में सफल रहे। जबकि, बाकी 13 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। भाजपा को केवल चौपाल,पच्छाद और पोंटा साहिब में जीत मिली।
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष व सांसद प्रतिभा सिंह
- फोटो : ANI
मंडी में सबसे बेहतर रहे नतीजे
मंडी लोकसभा सीट का उपचुनाव भले भाजपा हार गई थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में यहां की 17 में से 12 विधानसभा सीटों पर उसे जीत मिली है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी इसी इलाके से जीते हैं। पांच सीटों पर कांग्रेस को सफलता मिली। ये सीट कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह की है। प्रतिभा यहां से सांसद हैं। मतलब ये एक तरह से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह की भी हार है।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 मतगणना
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा की हार के पांच बड़े कारण क्या हैं?
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में भाजपा की हार के तीन बड़े कारण को बताया।
1. बगावत ने छीन ली सत्ता: हिमाचल प्रदेश में प्रत्याशियों के एलान के बाद सबसे ज्यादा बगावत भारतीय जनता पार्टी में दिखी। भाजपा के 21बागियों ने निर्दलीय ही चुनावी मैदान में ताल ठोक दी थी। कुछ कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में भी चले गए। इसके चलते भाजपा के वोटों में बड़ी सेंधमारी हुई। इसका फायदा कांग्रेस को हुआ।
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हिमाचल प्रदेश चुनाव 2022
- फोटो : अमर उजाला
2. स्थानीय नेताओं से नाराजगी: स्थानीय नेताओं और मंत्रियों को लेकर लोगों के बीच काफी नाराजगी थी। बड़ी संख्या में लोगों का कहना था कि नेता उनकी बातें नहीं सुनते हैं। क्षेत्र में भी नहीं रहते। इसके बावजूद पार्टी ने टिकट दिया। कुछ प्रत्याशियों पर परिवारवाद का भी आरोप लगा। जैसे- मनाली के प्रत्याशी और शिक्षामंत्री गोविंद ठाकुर हैं। गोविंद के पिता भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोग उनसे काफी नाराज रहे।
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हिमाचल में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करती कांग्रेस।
- फोटो : अमर उजाला
3. महंगाई-बेरोजगारी का मुद्दा भी रहा अहम : कोरोना के बाद पूरे देश की आर्थिक स्थिति में काफी बदलाव आया। हिमाचल प्रदेश के आय का स्त्रोत पर्यटन है। कोरोनाकाल में ये पूरी तरह ठप पड़ गया था। इसके बावजूद यहां के लोगों को कुछ राहत नहीं मिली। इस बीच, महंगाई और बेरोजगारी भी काफी बढ़ गई। इसके चलते भी लोगों में सरकार के खिलाफ काफी नाराजगी दिखी।
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हिमाचल प्रदेश में प्रियंका गांधी
- फोटो : अमर उजाला
4. कांग्रेस के लुभावने वादे: इस बार चुनाव में कांग्रेस ने कई लुभावने चुनावी वादे किए। पुरानी पेंशन योजना से लेकर 300 यूनिट मुफ्त बिजली, स्कूलों की बेहतर स्थिति और पर्यटन को बढ़ावा देने जैसी कई लुभावने वादे हुए। इसका असर भी मतदान में देखने को मिला।
भाजपा मुख्यालय में पीएम मोदी और अध्यक्ष जेपी नड्डा।
- फोटो : Twitter@BJP4India
5. भाजपा के पास नेतृत्व की कमी: भारतीय जनता पार्टी के पास हिमाचल प्रदेश में नेतृत्व की कमी दिखी। 2020 में हुए उपचुनाव के दौरान भी ये साफ हो गया था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर लोगों के बीच ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाए। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के खिलाफ भी लोगों की नाराजगी दिखी।